15 सितंबर को मनाए जाने वाले ‘अभियन्ता दिवस’ के अवसर पर उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मचारी और अभियंता एक विशेष उम्मीद के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर देख रहे हैं।

निर्भीक इंडिया (संवाददाता गोरखपुर)- विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, गोरखपुर ने मुख्यमंत्री से अपील की है कि वे इस दिन को यादगार बनाते हुए, पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के फैसले को निरस्त करने की घोषणा करें।
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अभियन्ता दिवस पर तोहफे की उम्मीद
संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि जिस तरह 05 सितंबर को ‘शिक्षक दिवस’ पर मुख्यमंत्री ने शिक्षकों को कैशलेस इलाज का तोहफा देकर सुखद आश्चर्य दिया था, उसी तरह बिजली कर्मियों को भी उम्मीद है कि उन्हें निजीकरण से मुक्ति का तोहफा मिलेगा। समिति का मानना है कि निजीकरण का फैसला वापस लेने से कर्मचारी पूरी एकाग्रता के साथ ‘समर्थ उत्तर प्रदेश – विकसित उत्तर प्रदेश’ के सपने को साकार करने में जुट जाएंगे।
समिति के पदाधिकारियों पुष्पेन्द्र सिंह, जीवेश नन्दन, जितेंद्र कुमार गुप्त, और अन्य ने जोर देकर कहा कि बिजली अभियंता और कर्मचारी किसी भी चुनौती का सामना करने में हमेशा खरे उतरे हैं, चाहे वह महाकुंभ में निर्बाध बिजली आपूर्ति की बात हो या भीषण गर्मी में देश में सर्वाधिक विद्युत आपूर्ति का नया कीर्तिमान स्थापित करना हो। उन्होंने कहा कि इन इंजीनियरों और कर्मचारियों को अपने जीवन के अंतिम पड़ाव तक सरकारी क्षेत्र में सेवा करने का अवसर मिलना चाहिए।

अभियन्ता दिवस’ पर अभियन्ता प्रबंधन की वापसी की मांग
संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री से यह भी अनुरोध किया है कि वे उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद के पुराने गौरवशाली दिनों की तरह ही ऊर्जा निगमों में विशेषज्ञ बिजली इंजीनियरों को शीर्ष प्रबंधन के पदों पर नियुक्त करें।
उनका मानना है कि ऐसा करने से न केवल बिजली व्यवस्था में गुणात्मक सुधार होगा, बल्कि यह कर्मचारियों के मनोबल को भी बढ़ाएगा। कई ऐसे बिजली कर्मी हैं जिन्होंने निजी क्षेत्र की नौकरी छोड़कर सरकारी नौकरी चुनी, और उनकी यही आकांक्षा है कि वे सरकारी क्षेत्र में रहते हुए अपनी सेवा पूरी करें।

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