अंतरिक्ष और खगोल विज्ञान की दुनिया में दिलचस्पी रखने वालों के लिए फरवरी का अंत और मार्च की शुरुआत बेहद रोमांचक होने वाली है। आसमान में एक के बाद एक दो बड़ी खगोलीय घटनाएं होने जा रही हैं, जो विज्ञान प्रेमियों और आम जनमानस दोनों के लिए किसी उत्सव से कम नहीं हैं।

पूर्व इसरो (ISRO) अप्रेंटिस और वर्तमान में शिक्षक व शोध छात्र मुकुंद शुक्ल ने इन आगामी खगोलीय घटनाओं के वैज्ञानिक महत्व, धार्मिक मान्यताओं और इन्हें देखने के खास ‘ऑब्जर्वेशन टिप्स’ (Observation Tips) पर विस्तार से जानकारी साझा की है।
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Chandra Grahan Sutak Kaal Time 2026 : 3 मार्च को लगेगा पूर्ण चंद्र ग्रहण, आसमान में सजेगी 6 ग्रहों की महफिल
आगामी दिनों में आसमान में ग्रहों की एक दुर्लभ परेड देखने को मिलेगी और उसके ठीक बाद साल का पहला पूर्ण चंद्र ग्रहण (ब्लड मून) लगेगा। लोग अभी से Total lunar eclipse 2026 in India Hindi से जुड़ी जानकारियों और इसे देखने के तरीकों को लेकर काफी उत्साहित हैं।
Chandra Grahan Sutak Kaal Time 2026 : 3 मार्च को लगेगा पूर्ण चंद्र ग्रहण, आसमान में सजेगी 6 ग्रहों की महफिल
मुकुंद शुक्ल के अनुसार, चंद्र ग्रहण से ठीक पहले 28 फरवरी (शनिवार) को सूर्यास्त के बाद आकाश में एक बेहद दुर्लभ ‘प्लॅनेट परेड’ (Planet Parade) देखने को मिलेगी। इस घटना को विज्ञान की भाषा में Solar system 6 planets alignment कहा जाता है।
इस दौरान सौरमंडल के छह प्रमुख ग्रह—शुक्र, बुध, शनि, नेपच्यून, यूरेनस और गुरु—एकदम सीधी कतार में नजर आएंगे। मुकुंद बताते हैं, “यह नजारा सच में अद्भुत होगा क्योंकि आसमान में सबसे चमकदार ग्रह ‘गुरु’ (Jupiter) के ठीक पास चंद्रमा भी अपनी सुंदर उपस्थिति दर्ज कराएगा।”
प्लॅनेट परेड देखने के लिए ‘ऑब्जर्वेशन टिप्स’ (Observation Tips)
- दिशा और समय: 28 फरवरी को सूर्यास्त के ठीक बाद अपना ध्यान पश्चिम (West) दिशा के क्षितिज (Horizon) की ओर केंद्रित करें।
- उपकरण: इस अलाइनमेंट में शुक्र (Venus) और बुध (Mercury) को नंगी आंखों से क्षितिज के काफी करीब आसानी से देखा जा सकेगा। गुरु (Jupiter) भी चमकता हुआ दिखेगा।
- दूरबीन का प्रयोग: नेपच्यून (Neptune) और यूरेनस (Uranus) जैसे दूर के ग्रहों का दीदार करने के लिए आपको एक अच्छी बाइनोक्युलर (Binoculars) या छोटी टेलीस्कोप की आवश्यकता होगी। शहर की रोशनी (Light Pollution) से दूर किसी अंधेरी और खुली जगह से यह नजारा सबसे स्पष्ट दिखेगा।
3 मार्च को दिखेगा ‘ब्लड मून’ (Total lunar eclipse 2026 in India Hindi)
ग्रहों की इस शानदार परेड के ठीक दो दिन बाद, 3 मार्च 2026 को खगोल विज्ञान की एक और बड़ी घटना घटेगी। इस दिन साल का पहला पूर्ण चंद्र ग्रहण लगेगा। विज्ञान प्रेमियों के बीच Total lunar eclipse 2026 in India Hindi को लेकर काफी उत्सुकता है।
वैज्ञानिक महत्व समझाते हुए मुकुंद शुक्ल ने बताया कि पूर्ण चंद्र ग्रहण तब होता है जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीधी रेखा में आ जाते हैं। पृथ्वी, सूर्य के प्रकाश को चंद्रमा तक पहुँचने से रोक देती है और अपनी छाया से उसे पूरी तरह ढक लेती है। पृथ्वी के वायुमंडल से छनकर जाने वाले प्रकाश के कारण चंद्रमा का रंग गहरा लाल यानी तांबे जैसा प्रतीत होने लगता है। इसी लाल रंग के कारण इसे ‘ब्लड मून’ (Blood Moon) कहा जाता है।

ब्लड मून देखने के लिए ‘ऑब्जर्वेशन टिप्स’ (Observation Tips)
- दिशा: 3 मार्च की शाम को पूर्व (East) दिशा में चंद्रोदय (Moonrise) के समय अपनी नज़रें जमाएं।
- सुरक्षा: सूर्य ग्रहण के विपरीत, चंद्र ग्रहण को नंगी आंखों से देखना पूरी तरह से सुरक्षित है। इसके लिए किसी विशेष चश्मे की जरूरत नहीं होती।
- उपकरण: हालांकि यह नंगी आंखों से शानदार दिखता है, लेकिन यदि आप चंद्रमा के क्रेटर्स (गड्ढों) और लाल रंग की गहराई को करीब से देखना चाहते हैं, तो एक साधारण दूरबीन (Binoculars) का इस्तेमाल आपके अनुभव को दोगुना कर देगा।
Chandra Grahan Sutak Kaal Time और गोरखपुर में ग्रहण का समय
धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टिकोण से भी इस चंद्र ग्रहण का विशेष महत्व है। स्थानीय लोगों के लिए Gorakhpur eclipse time 6 PM to 6:48 PM तक रहेगा। यानी गोरखपुर क्षेत्र में यह चंद्र ग्रहण कुल 48 मिनट तक प्रभावी रहेगा। शाम 6 बजे से शुरू होकर 6:48 बजे यह ग्रहण समाप्त हो जाएगा।
ग्रहण के साथ ही सूतक काल का भी बहुत महत्व होता है। मान्यताओं के अनुसार, Chandra Grahan Sutak Kaal Time ग्रहण शुरू होने से ठीक 9 घंटे पहले लग जाता है। 3 मार्च की सुबह 9 बजे से ही सूतक काल के नियम लागू हो जाएंगे, जो ग्रहण समाप्ति के साथ ही खत्म होंगे। सूतक काल के दौरान शुभ कार्य, पूजा-पाठ या मंदिरों के कपाट खोलने की मनाही होती है।
गर्भवती महिलाओं के लिए सावधानियां (Sutak kaal rules for pregnant ladies)
भारतीय सनातन परंपरा में ग्रहण और सूतक काल के दौरान कुछ विशेष नियमों का पालन करने की सलाह दी जाती है। विशेषकर Sutak kaal rules for pregnant ladies को लेकर घरों में काफी सतर्कता बरती जाती है:
- बाहर न निकलें: सूतक और ग्रहण काल के दौरान गर्भवती महिलाओं को घर से बाहर निकलने से बचने की सलाह दी जाती है, ताकि ग्रहण की नकारात्मक किरणें उन पर न पड़ें।
- नुकीली चीजों का वर्जित प्रयोग: इस दौरान कैंची, चाकू, सुई या किसी भी धारदार उपकरण का उपयोग न करने की मान्यता है।
- भोजन और मंत्र जाप: सूतक लगने के बाद भोजन पकाने और खाने से बचा जाता है (बीमारों और बच्चों को छूट होती है)। महिलाओं को इस दौरान धार्मिक पुस्तकों का पाठ या मानसिक जाप करने की सलाह दी जाती है।
कौन हैं खगोल विज्ञानी मुकुंद शुक्ल?
इस महत्वपूर्ण और रोचक जानकारी को वैज्ञानिक तथ्यों के साथ साझा करने वाले मुकुंद शुक्ल क्षेत्र के एक उभरते हुए खगोल विज्ञानी हैं। मूल रूप से गोरखपुर के बेतियाहाता के निवासी मुकुंद का प्रोफाइल बेहद प्रभावशाली है:

इसरो का अनुभव: मुकुंद ने वर्ष 2019-20 में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) में एक प्रशिक्षु (अप्रेंटिस) के तौर पर काम किया है, जहां उन्होंने तकनीकी और अंतरिक्ष विज्ञान का जमीनी अनुभव प्राप्त किया।
शोध कार्य: वर्तमान में वे Siddharth University research scholar geography के रूप में अपना शोध कार्य कर रहे हैं और ब्रह्मांडीय भूगोल (Cosmic Geography) पर उनकी गहरी पकड़ है।
सामाजिक योगदान: वर्तमान में वे बिहार सरकार में एक विद्यालय अध्यापक के पद पर कार्यरत हैं और बच्चों को विज्ञान के प्रति प्रेरित कर रहे हैं।
मुकुंद शुक्ल ने युवाओं और छात्रों से एक खास अपील की है कि वे मोबाइल की वर्चुअल दुनिया से बाहर निकलकर इन प्राकृतिक और ब्रह्मांडीय घटनाओं को जरूर देखें। उनका मानना है कि आसमान में होने वाली ये गतिविधियां छात्रों में विज्ञान और भूगोल के प्रति एक नई जिज्ञासा पैदा करती हैं।

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