दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय (डीडीयूजीयू) ने अपने विद्यार्थियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए विशेष बैक पेपर परीक्षा लेने का निर्णय लिया है। विश्वविद्यालय सत्र 2024-25 के स्नातक अंतिम वर्ष के उन सभी विद्यार्थियों के लिए परीक्षा आयोजित करने जा रहा है, जो किसी विषय में उत्तीर्ण नहीं हो पाए हैं। यह पहल सीधे तौर पर हजारों विद्यार्थियों को एक साल बर्बाद होने से बचाएगी और उन्हें अपनी पढ़ाई जारी रखने का अवसर देगी।

निर्भीक इंडिया संवाददाता (नवनीत मिश्र)– डीडीयूजीयू यह विशेष बैक पेपर परीक्षा का आयोजन सितंबर के दूसरे सप्ताह से शुरू होने की संभावना जताई है, जिससे विद्यार्थियों को जल्द ही अपने परिणाम सुधारने का मौका मिलेगा। यह कदम विश्वविद्यालय की उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिसके तहत वह विद्यार्थियों की शैक्षणिक जरूरतों को पूरा करने और उनके भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए ठोस प्रयास करता है।
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डीडीयूजीयू के विशेष बैक पेपर परीक्षा का विवरण
परीक्षा में 6,125 विद्यार्थियों के शामिल होने की उम्मीद है। इन विद्यार्थियों को अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है, जिनके लिए परीक्षा का आयोजन किया जाएगा। यह जानकारी उन सभी छात्रों के लिए महत्वपूर्ण है जो अपनी बैक पेपर की स्थिति को लेकर चिंतित हैं। परीक्षा में सम्मिलित होने वाले विद्यार्थियों का विवरण इस प्रकार है:
- माइनर विषयों में: कुल 2,019 विद्यार्थी
- प्रायोगिक (Practical) विषयों में: कुल 712 विद्यार्थी
- सिद्धांत (Theory) विषयों में: कुल 3,394 विद्यार्थी
- कुल योग: 6,125 विद्यार्थी
विश्वविद्यालय कुल 233 बैक पेपर आयोजित करेगा, ताकि इन सभी विद्यार्थियों को उनकी लंबित परीक्षाओं को पास करने का मौका मिल सके। विषयों के अनुसार बैक पेपर की संख्या भी निर्धारित की गई है:
- माइनर विषयों के लिए: 30
- प्रायोगिक विषयों के लिए: 52
- सिद्धांत विषयों के लिए: 151
- कुल योग: 233
यह स्पष्ट है कि विश्वविद्यालय ने बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इस परीक्षा की पूरी योजना तैयार की है।
डीडीयूजीयू की विशेष बैक पेपर परीक्षा के लिए क्या एनईपी 2020 में है प्रावधान
यह विशेष परीक्षा नई शिक्षा नीति (NEP) 2020 के ढांचे के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण प्रावधान है। नई शिक्षा नीति के अनुसार, यदि कोई विद्यार्थी अपने सभी पाठ्यक्रमों को एक साथ उत्तीर्ण नहीं कर पाता है, तो भी उसे अगले वर्ष में प्रोन्नत किया जा सकता है। विद्यार्थी बाद में आयोजित होने वाली बैक पेपर परीक्षाओं के माध्यम से अपने शेष पाठ्यक्रमों को उत्तीर्ण कर सकता है।
यह प्रावधान विद्यार्थियों को अनावश्यक तनाव से मुक्ति दिलाता है और उन्हें अपनी शैक्षणिक प्रगति को बाधित होने से बचाता है। डीडीयूजीयू का यह निर्णय यह दर्शाता है कि विश्वविद्यालय एनईपी 2020 के सिद्धांतों को प्रभावी ढंग से लागू कर रहा है ताकि विद्यार्थियों को अधिकतम लाभ मिल सके।
विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा, “हम विद्यार्थियों का एक वर्ष बचाने के लिए उन्हें यह विशेष अवसर प्रदान कर रहे हैं। साथ ही, विश्वविद्यालय बैक पेपर प्रणाली में आवश्यक सुधारों पर भी काम कर रहा है, ताकि इसे और अधिक पारदर्शी, छात्र-हितैषी और परिणामोन्मुखी बनाया जा सके।” उनका यह बयान विश्वविद्यालय के छात्र-केंद्रित दृष्टिकोण को रेखांकित करता है।
विद्यार्थियों के लिए एक सकारात्मक कदम
यह विशेष बैक पेपर परीक्षा सिर्फ एक शैक्षणिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि डीडीयूजीयू की अपने विद्यार्थियों के प्रति जिम्मेदारी को भी दर्शाती है। यह उन सभी छात्रों के लिए एक बड़ी राहत है जिनका भविष्य एक या दो विषयों में उत्तीर्ण न हो पाने के कारण अधर में लटका हुआ था।
इस परीक्षा के माध्यम से विद्यार्थी न केवल अपनी डिग्री पूरी कर पाएंगे, बल्कि समय पर अपने करियर की योजना भी बना सकेंगे। विश्वविद्यालय का यह कदम उन्हें अकादमिक उत्कृष्टता की ओर प्रेरित करेगा और उनके भविष्य के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करेगा। यह पहल निश्चित रूप से अन्य विश्वविद्यालयों के लिए भी एक प्रेरणा का स्रोत बन सकती है।

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