गोरखपुर नगर निगम(Gorakhpur Nagar Nigam)ने शहर को स्वच्छ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, अपनी घर-घर कचरा संग्रहण व्यवस्था (Ghar-Ghar Kachra Sangrahan Vyavastha) को और भी प्रभावी बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया।

निर्भीक इंडिया संवाददाता ()नवनीत मिश्र)- यह बैठक 29 अगस्त, 2025 को गोरखपुर नगर निगम (Gorakhpur Nagar Nigam) में नगर आयुक्त की अध्यक्षता में हुई, जिसमें घर-घर कचरा संग्रहण व्यवस्था (Ghar-Ghar Kachra Sangrahan Vyavastha) में न केवल प्रणाली की खामियों को उजागर किया गया, बल्कि उन्हें दूर करने के लिए कड़े और तत्काल निर्णय भी लिए गए। इस पहल से उम्मीद है कि शहर की सफाई व्यवस्था में एक नया अध्याय शुरू होगा।
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गोरखपुर नगर निगम (Gorakhpur Nagar Nigam) में घर-घर कचरा संग्रहण व्यवस्था (Ghar-Ghar Kachra Sangrahan Vyavastha) की समीक्षा
बैठक में जोन 1 के 17 वार्डों के सभी सम्मानित पार्षदों, अपर नगर आयुक्तों श्री दुर्गेश मिश्रा और श्री प्रमोद कुमार, जोनल अधिकारी सुश्री अनुष्का सिंह, और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। इस बैठक में सबसे खास बात यह रही कि इसमें फील्ड स्तर के कर्मचारियों – सुपरवाइजरों, ड्राइवरों और मेट को भी बुलाया गया था, ताकि जमीनी हकीकत को समझा जा सके। बैठक का मुख्य एजेंडा घर-घर कचरा संग्रहण व्यवस्था (Ghar-Ghar Kachra Sangrahan Vyavastha) की गाड़ियों, उनके मार्गों, और कचरा शुल्क वसूली की समीक्षा करना था।
समीक्षा के दौरान, नगर आयुक्त ने पार्षदों से कर्मचारियों की कार्यप्रणाली के बारे में सीधे फीडबैक लिया। इस सीधे संवाद से कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए। कई जगहों पर कर्मचारियों की लापरवाही और काम में ढिलाई साफ तौर पर देखी गई। इस पर तुरंत कार्रवाई करते हुए, नगर आयुक्त ने कुछ सुपरवाइजरों और ड्राइवरों को सेवा से हटाने का आदेश दिया और कुछ अन्य का वेतन रोकने का निर्देश भी जारी किया। यह दर्शाता है कि नगर निगम गोरखपुर इस अभियान को लेकर कितनी गंभीर है और किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
गोरखपुर नगर निगम स्वच्छता और शुल्क वसूली के लिए कड़े दिशा-निर्देश जारी
बैठक में केवल समस्याओं की पहचान ही नहीं की गई, बल्कि उनके समाधान के लिए ठोस दिशा-निर्देश भी जारी किए गए। इन निर्देशों का उद्देश्य व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और प्रभावी बनाना है।
किरायेदारों से शुल्क वसूली: अब तक कई जगहों पर किरायेदारों से कचरा शुल्क नहीं वसूला जा रहा था। इसे अनिवार्य कर दिया गया है, ताकि कोई भी नागरिक इस जिम्मेदारी से बच न सके।
सड़क किनारे ठेलों और दुकानों पर अभियान: शहर में सड़कों पर लगे ठेलों और दुकानों से भी कचरा निकलता है, लेकिन उनसे शुल्क वसूली नहीं हो पाती थी। इसके लिए एक विशेष अभियान चलाने का निर्णय लिया गया है।
पार्षदों की अध्यक्षता में प्रगति बैठक: अब हर 15 दिन में वार्ड स्तर पर पार्षद की अध्यक्षता में एक समीक्षा बैठक होगी। इसकी रिपोर्ट फोटोग्राफ के साथ नगर आयुक्त को भेजी जाएगी। यह कदम निचले स्तर पर भी जवाबदेही सुनिश्चित करेगा।
नालियों में गोबर बहाने वालों पर कार्रवाई: शहर की नालियों में गोबर बहाने की समस्या गंभीर है। ऐसे लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
अतिरिक्त वाहनों की व्यवस्था: कुछ वार्डों में वाहनों की कमी के कारण कचरा संग्रह में दिक्कत आ रही थी। ऐसे वार्डों की पहचान कर उन्हें अतिरिक्त वाहन तुरंत उपलब्ध कराए जाएंगे।
नगर निगम गोरखपुर की यह पहल निश्चित रूप से शहर की सफाई व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव लाएगी। जहां एक ओर निगम अपने कर्मचारियों पर सख्ती बरत रहा है, वहीं दूसरी ओर नागरिकों से भी सहयोग की अपील की जा रही है। शहर को स्वच्छ और सुंदर बनाए रखने की जिम्मेदारी केवल प्रशासन की नहीं, बल्कि हर नागरिक की है।
नगर निगम ने सभी निवासियों से अपील की है कि वे इस स्वच्छता अभियान में सक्रिय रूप से भाग लें और समय पर कचरा शुल्क का भुगतान कर एक बेहतर और स्वच्छ गोरखपुर के निर्माण में अपना योगदान दें। यह बैठक ‘स्वच्छ भारत मिशन’ की भावना को सही मायने में दर्शाती है और यह उम्मीद जगाती है कि गोरखपुर देश के सबसे स्वच्छ शहरों में से एक बनकर उभरेगा।

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