उत्तर प्रदेश पुलिस (UP Police) के महानिदेशक द्वारा चलाए जा रहे "ऑपरेशन कनविक्शन" (Operation Conviction) अभियान के तहत गोरखपुर में एक और बड़ी सफलता मिली है। गोरखनाथ थाना क्षेत्र में 2023 में नाबालिग से हुए दुष्कर्म के मामले में न्यायालय ने दो अभियुक्तों को 21-21 वर्ष के कठोर कारावास (rigorous imprisonment) की सजा सुनाई है। इस फैसले से बाल यौन अपराधों के प्रति पुलिस और न्यायिक व्यवस्था की सख्ती का संदेश स्पष्ट रूप से सामने आया है।

निर्भीक इंडिया संवाददाता (नवनीत मिश्र)- यह मामला 2023 में गोरखनाथ थाना क्षेत्र में हुआ था, जब अभियुक्तों ने एक नाबालिग के साथ दुष्कर्म किया था। इस जघन्य अपराध के संबंध में गोरखनाथ थाने में मु0अ0सं0 282/2023 के तहत भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 342 (गलत तरीके से रोकना) और पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) की धारा 5G/6 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए त्वरित कार्रवाई की और सबूतों को मजबूत किया।
Table of Contents
नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपितों के खिलाफ प्रभावी पैरवी से मिली सफलता
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, गोरखपुर के निर्देशन में विवेचक निरीक्षक विज्ञानकर सिंह, थाने के पैरोकार और मॉनिटरिंग सेल ने इस मामले में प्रभावी पैरवी की। “ऑपरेशन कनविक्शन” के तहत, पुलिस ने यह सुनिश्चित किया कि केस की सुनवाई में कोई देरी न हो और सभी साक्ष्य न्यायालय में समय पर प्रस्तुत किए जाएं। अभियोजन पक्ष की सशक्त दलीलों और पुलिस की कड़ी मेहनत के परिणामस्वरूप, मा0 न्यायालय विशेष पॉक्सो-01 जनपद गोरखपुर ने अभियुक्तों को दोषी पाया। इस दोषसिद्धी में सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता (ADGC) श्री राघवेंद्र राम त्रिपाठी का भी अमूल्य योगदान रहा।
दोषियों की पहचान और सजा
न्यायालय ने जिन दो अभियुक्तों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई है, उनके नाम और पते इस प्रकार हैं:
- संतोष राजभर: पुत्र मोहन, निवासी बटराव, थाना मधुबन, जनपद मऊ।
- कृष्णा साह: पुत्र जगन साह, निवासी बलुआ पडेवा, थाना जोगापट्टी, जनपद पश्चिमी चंपारण, बेतिया (बिहार)।
न्यायालय ने इन दोनों अभियुक्तों को 21-21 वर्ष के कठोर कारावास के साथ-साथ 26,000-26,000 रुपये के अर्थदण्ड (fine) से भी दण्डित किया है। यह फैसला नाबालिगों के साथ होने वाले अपराधों के प्रति योगी सरकार (Yogi Government) की जीरो टॉलरेंस की नीति को दर्शाता है। “ऑपरेशन कनविक्शन” का उद्देश्य जघन्य अपराधों में शामिल अपराधियों को जल्द से जल्द सजा दिलाना है, और यह मामला इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ है। इस फैसले से समाज में एक मजबूत संदेश गया है कि बच्चों के खिलाफ अपराध करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।

निर्भीक इंडिया (NIRBHIK INDIA) एक समाचार पत्र नही अपितु 245 साल से भी लम्बे समय से चल रहे पत्रकारिता की विचारधारा है, जो हमेशा लोकतंत्र के चारो स्तम्भ को मान्यता देने एवं जनता सर्वोपरि की विचारों का प्रतिनिधित्वकत्र्ता है। आप सभी हमारे साथ जुड़े अपने तन, मन व धन से हमें ताकत दें जिससे कि हम आप (जनता) के लिए आप (जनता) के द्वारा, आप (जनता) के आदेशों पर केन्द्र से सवाल करते हुए एक पूर्ण लोकतंत्र बना सकें।

You must be logged in to post a comment.