निर्भीक इंडिया (NIRBHIK INDIA) – प्रधान सम्पादक के कलम से,

निर्भीक इंडिया (NIRBHIK INDIA) एक हिन्दी दैनिक समाचार पत्र है, जो कि भारत में उत्तर प्रदेश राज्य के गोरखपुर जिले से निकलता है। समाचार का नाम निर्भीक इंडिया रखा गया, जो कि काफी हद तक एक राष्ट्र के रूप में भारत अर्थात् इंडिया के सशक्त व निर्भीकता को प्रदर्शित करने के साथ ही भारत में पत्रकारिता में निर्भीकता से भरे इतिहास को भी आगे अपने नाम के तरह ले जाने का काम कर रहा है।
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आप सभी का निर्भीक इंडिया समाचार पत्र के स्वामी, मुद्रक, प्रकाशक एवं प्रधान सम्पादक होने के अधिकार से स्वागत करते हुए अपने समाचार पत्र, स्वंय ओर हमारी सेवाओं के साथ ही हमारे ध्यय वाक्य एवं लक्ष्य से परिचित करवाते है।

स्वर्णिम समाचार पत्रों व पत्रकारिता का प्रतिनिधित्वकत्र्ता है, निर्भीक इंडिया (NIRBHIK INDIA)

निर्भीक इंडिया समाचार पत्र भारत के समाचार पत्रों के पंजीयक द्वारा पंजीकृत समाचार पत्र है, जिसकी शुरूवात वर्ष 2023 के जून महीने में पंजीकरण प्रमाण पत्र मिलने के साथ हुई, अर्थात् आप कह सकते है, कि इतिहास के मामले में हम अभी पैदा ही नहीं हुए है।

भले ही हमारी शुरूवात अभी हुई, परन्तु हम बतौर पत्रकार व अपने समाचार पत्र निर्भीक इंडिया के माध्यम से जिस पत्रकारिता का प्रतिनिधित्व कर रहे है, वह कोई 100 साल नही अपितु प्रत्यक्ष व लिखित इतिहास में 244 साल पुरानी है, जिसने अपनी पत्रकारिता में निर्भीकता का प्रदर्शन करते हुए कभी राजा राम मोहन राय भारत में विभिन्न कुप्रथा जैसे कि सती प्रथा, बाल विवाह इत्यादि को समाप्त किया।

इसी प्रकार इसी हिन्दी पत्रकारिता से विभिन्न अध्यात्मिक गुरू ने भारतीय पुर्नजागरण शुरू किया, उदाहरण के रूप इंडियन मिरर, इत्यादि, तो वही इसी पत्रकारिता व समाचार पत्र से विभिन्न नेताओं ने ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ प्रथम स्वंत्रता का बिगुल फूँका, उदाहरण के रूप में ‘‘पैगाम ए आजादी’’ तो कभी आज की कथित राष्ट्रवादी विचार से उलट सच्चाई से भी राष्ट्रप्रेम वाली राष्ट्रवादी विचार को पुनः जगाने के लिए मराठा, केसरी जैसे न जाने कितने समाचार पत्रों का प्रकाशन किया गया।

जब ब्रिटिश राज से भारत को स्वतंत्रता दिलाने का समय आया तो, भी इस पत्रकारिता व समाचार पत्र ने अपने लेखन से इसको पूर्णता प्रदान किया जिसमें नेशनल हेराल्ड, यंग इंडिया, द क्राॅनिकल, इंडियन ओपिनियन, हरिजन, नवजीवन, प्रताप, स्वदेश और फिर कहूँगा यह कुछ ही नाम है जो केवल ऊपरी सतह पर इसके अलावा भी समाचार पत्र के न जाने कितने गुमनाम पत्रकार, सम्पादक ने इससे माँ भारती की सेवा की है।

अब यहाॅ पर पहले लिखित समाचार पत्र जो भारत अर्थात् इंडिया में पहली बार संचालित किया गया वह तो था एक अंग्रेंज का ही जो ईस्ट इंडिया के लिए विज्ञापन का काम करता था, जिसको हम सभी ‘‘बंगाल गजट या हिक्की गजट’’ के नाम से जानते है उसको एक आयरिश ‘‘जेम्स आस्टन हिक्की’’ ने शुरू किया था, परन्तु मैं यह उसको इस लिए गिन रहा हूँ,

क्योंकि वह पहला व्यक्ति था जिसने भारत में पत्रकारिता करते हुए उस समय के बंगाल के गर्वनर व उसकी न्यायधिकरण पर सवाल उठाया था और नतीजा बता है क्या हुआ उसको जेल में डाल उस समाचार पत्र को कूड़ेदान में डाल दिया गया था और यही से भारतीय को समाचार पत्र व पत्रकारिता के ताकत समझ में आ गई थी।

इसी कड़ी में जब हम सभी समाचार पत्रों की बात कर रहे तो यह भी जान लेना चाहिए कि, पहले हिन्दी समाचार पत्र उदंत मार्तण्ड व सुधावर्षण की भी चर्चा होनी चाहिए जिन्होने उस समय की स्थिती में दैनिक समाचार पत्र का संचालन का पराक्रम दिखाया था।

उपरोक्त भारतीय इतिहास में इनका नाम ही गायब कर दिया गया है और यह बताया गया कि जब 1915 में महात्मा गंाधी भारत आये तभी से स्वतंत्रता की शुरूवात हुई।

यदि उपरोक्त इतिहास को आप पढ़ मेरे इस विचार से सहमत हो जायेगें कि, ‘‘पत्रकारिता करते हुए बड़े-बड़े पत्रकार नेता बन गये तो वही बड़े-बड़े नेता पत्रकारिता करते हुए इतिहास में पत्रकार के रूप में दर्ज हो गये’’

निर्भीक इंडिया के प्रधान सम्पादक का परिचय

नमस्कार, मेरा नाम नवनीत मिश्र है, और मैं निर्भीक इंडिया समाचार पत्र का स्वामी, मुद्रक, प्रकाशक व प्रधान सम्पादक हूँ, ऐसे तो यह समाचार पत्र कुछ ही महीने लाँच हुआ और अब इसकी पोर्टल निर्माण किया जा रहा है, जिसका लक्ष्य रियल टाइम खबर देना है।

मैं अपने बारे में आप को सूचित करूँ, तो मैं एक पत्रकार के रूप में बिगत 2015 से कार्यरत रहा हूँ, जहाॅ मैं गोरखपुर के एक क्षेत्रीय समाचार पत्र में पहले पत्रकारिता में प्रशिक्षण प्राप्त किया और लगभग 2022 तक उसमें विभिन्न पदों का काम देखा, इस दौरान मैंने गोरखपुर में विभिन्न खबरों को कवर किया और आम गोरखपुर वासियासें के मुख्य परेशानी को भी समझा, अपने स्तर पर जितना करना कर सकता था किया।

मैंने अपने इस छोटे से पत्रकारिता जीवन में मैंने दो तीन चीजों का खुद प्रत्यक्षदर्शी बना पहला कि, आज भारत अर्थात् इंडिया में पहले धूमिल हो चूके पत्रकारिता के इतिहास को पूरी तरह से समाप्त करने की कोशिश चल रही, जिसमें पत्रकारिता एवं पत्रकार को बिका होना बताना, आज की पत्रकारिता मे देश व जनहित से ज्यादा अपना हित व किसी एक व्यक्ति या संगठन की चाटुकारिता करना है।

मैंने यह भी पाया है, कि आम जन को जनसंचार एवं संचार में होने वाले कुटिलता को भी समझने व पकड़ने में कमी है, मैं मानता हूँ, कि इसके पीछे भी भारतीय शिक्षा नीति व वही पुरानी रूढ़िवादी शिक्षा पद्धति व उसको लागू करन वाली संस्था जिम्मेदार है।

निर्भीक इंडिया समाचार पत्र के पत्रकारिता का ध्येय

मेरे द्वारा निर्भीक इंडिया समाचार पत्र के स्थापन के पीछे का एक मात्रा उद्ेश्य यही है, कि एक बार फिर से उस पत्रकारिता के रूतबे को स्थापित करूँ, साथ ही साथ एक प्रेस नियमावली बनाऊ, जो कि पत्रकारों व पत्रकारिता में लगे सभी माध्यम उसका अनुसरण करते हुए देशहित, जनहित को सर्वपरि रखते हुए केवल निष्पक्षता का प्रतिपालन करते हुए पत्रकारिता करें।

मेरा यह लक्ष्य है, कि एक बार फिर से इतिहास लिखा जायें और निचले स्तर से इतिहास में पत्रकारों व पत्रकारिता को सम्मान देते हुए उन सभी पत्रकारों व समाचारों को सम्मान मिले और बच्चें बढ़े, और जाने स्वतंत्रता की लड़ाई 1915 से शुरू नही हुई। साथ ही साथ सभी के लिए विज्ञान, कला, वाणिज्य के साथ ही जनसंचार की पढ़ाई का विकल्प 9 से उपलब्ध कराना भी लक्ष्य है, क्योकि ‘‘जिस देश के लोग सूचित नहीं होगे व देश कभी विकास नही करेंगा।’’

सबसे अन्तिम में लेकिन सर्वोच्च प्राथमिकता में निर्भीक इंडिया समाचार पत्र के माध्यम भारतीय लोकतंत्र में ‘‘प्रेस’’ को चैथी लोकतंात्रिक स्तम्भ का मान्यता दिलवाना है, साथ उतनी ही आजादी दिलवाना है, जितनी भारतीय न्यायालय को है, क्योंकि तीन पाये की न तो कुर्सी होती है ओर न ही बेड इस पर बैठने वाला या सोने वाला व्यक्ति हो या लोकतंत्र हमेशा अस्थिर ही रहेगा।

यह सब कुछ आप सभी के लिए करना है, और आप के सहयोग से ही करना है, लेकिन सबसे पहले अपने घर अर्थात् गोरखपुर से शुरू करना है, क्योंकि संस्कृत में कहते है, कि ‘‘जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी’’ इसके बाद मण्डल फिर राज्य और अन्त में सम्पूर्ण देश एक बार फिर उस पत्रकारिता के पुनः दर्शन करेगा जिसको कभी अंग्रेजी शासन ने किया था और डरती थी।

-----नवनीत कुमार मिश्र (प्रधान सम्पादक) निर्भीक इंडिया (NIRBHIK INDIA)
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