आंचलिक पत्रकारिता: लोकतंत्र की ज़मीनी धड़कन और गहराता संकट
प्रस्तावना- जब भी हम ‘मीडिया’ या ‘पत्रकारिता’ शब्द सुनते हैं, तो हमारे मानस पटल पर स्वतः ही देश की राजधानी दिल्ली या आर्थिक राजधानी मुंबई के वातानुकूलित (Air-conditioned) और भव्य स्टूडियो का चित्र उभर आता है। वहां बैठे तेज-तर्रार एंकर, चमकते हुए ग्राफिक्स और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय राजनीति की ऊंची बहसें हमें आकर्षित करती हैं। आंचलिक पत्रकारिता…

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