नागरिक पत्रकारिता (Citizen Journalism) का नैतिक पतन: लोकतंत्र के रक्षक या भक्षक?
प्रस्तावना- नागरिक पत्रकारिता (Citizen Journalism) की सुदृढ़ और पवित्र अवधारणा का जन्म उस ऐतिहासिक कालखंड में हुआ था, जब यह स्वीकार किया गया कि केवल बड़े मीडिया घराने ही सत्य के एकाधिकार वाले नहीं हो सकते। स्मार्टफोन की सुलभता और इंटरनेट की असीम शक्ति से लैस आम नागरिक भी सत्ता के गलियारों का वह कड़वा…
