अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) गोरखपुर के पेन क्लिनिक ने चिकित्सा जगत में एक बार फिर अपनी विशेषज्ञता का लोहा मनवाया है। पिछले एक वर्ष से गुप्तांग (वजाइनल क्षेत्र) और मलाशय (रेक्टम) में असहनीय जलन और चुभन झेल रही एक 42 वर्षीय महिला के लिए एम्स के डॉक्टरों का प्रयास वरदान साबित हुआ है।

एम्स गोरखपुर की बड़ी कामयाबी: पुडेंडल न्यूराल्जिया का इलाज (Pudendal Neuralgia Treatment) कर महिला को दी नई जिंदगी
यहाँ पुडेंडल न्यूराल्जिया का इलाज (Pudendal Neuralgia Treatment) आधुनिक तकनीक के माध्यम से सफलतापूर्वक संपन्न किया गया, जिससे मरीज को वर्षों के मानसिक और शारीरिक संताप से मुक्ति मिली है। यह उपलब्धि न केवल संस्थान के लिए गौरव की बात है, बल्कि पूर्वांचल के उन हजारों मरीजों के लिए भी एक नई किरण है जो पेल्विक क्षेत्र के अज्ञात दर्द को चुपचाप सहने के लिए विवश हैं।
इस जटिल मामले में मरीज की स्थिति इतनी दयनीय हो चुकी थी कि सामान्य रूप से बैठना भी उसके लिए किसी भीषण यातना से कम नहीं था। चिकित्सा विज्ञान की भाषा में इसे ‘न्यूरोपैथिक पेन’ कहा जाता है, जो नसों की संवेदनशीलता और उन पर पड़ने वाले दबाव के कारण उत्पन्न होता है।
एम्स गोरखपुर के एनेस्थीसियोलॉजी, पेन मेडिसिन एवं क्रिटिकल केयर विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. संतोष कुमार शर्मा के नेतृत्व में इस चुनौतीपूर्ण मामले को हाथ में लिया गया। डॉ. शर्मा के साथ डॉ. रवि शंकर शर्मा (असिस्टेंट प्रोफेसर) और डीएम पेन मेडिसिन के शोधार्थियों की टीम ने इस सफल उपचार को अंजाम दिया।
मरीज के उपचार का इतिहास अत्यंत मार्मिक रहा है। दर्द से इस कदर व्याकुलता थी कि राहत पाने की अंतिम आशा में मरीज ने लगभग छह माह पूर्व अपना गर्भाशय तक निकलवा दिया था (हिस्टेरेक्टॉमी), परंतु नियति की विडंबना देखिए कि ऑपरेशन के बाद भी दर्द रत्ती भर कम नहीं हुआ।
पेन ओपीडी में अपनी व्यथा सुनाते समय वह महिला फफक-फफक कर रो पड़ीं। उनकी आँखों के आंसू उस हताशा का प्रमाण थे जो लंबे समय तक चलने वाले ‘क्रोनिक पेन’ के कारण उत्पन्न होती है। वास्तव में, पुडेंडल न्यूराल्जिया का इलाज केवल शारीरिक स्वास्थ्य की बहाली नहीं, बल्कि मरीज के मानसिक अवसाद को दूर करने का भी एक जरिया बना।
प्रारंभिक जांच और गहन परीक्षण के उपरांत डॉक्टरों ने पाया कि यह साधारण स्त्री रोग संबंधी समस्या नहीं, बल्कि नसों से जुड़ी एक विशेष बीमारी है। अल्ट्रासाउंड गाइडेड तकनीक का प्रयोग करते हुए मरीज को सटीक उपचार प्रदान किया गया।
इस आधुनिक प्रक्रिया के उपरांत मरीज को अपने दर्द में लगभग 90 प्रतिशत तक सुधार महसूस हुआ। जो महिला कुछ दिनों पहले तक चलने-फिरने और बैठने में असमर्थ थी, वह अब ओपीडी में मुस्कुराते हुए अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही है। यह सफलता दर्शाती है कि सही समय पर सही विशेषज्ञ की सलाह जीवन की दिशा बदल सकती है।
पुडेंडल नर्व ब्लॉक इंजेक्शन (Pudendal nerve block injection) से मिली 90% राहत और पुनः मुस्कान
एम्स गोरखपुर में अपनाई गई प्रक्रिया पूरी तरह से आधुनिक और न्यूनतम आक्रामक (Minimally Invasive) थी। जब दवाओं से राहत मिलना बंद हो गई, तब डॉक्टरों ने पुडेंडल नर्व ब्लॉक इंजेक्शन (Pudendal nerve block injection) का विकल्प चुना।
इस प्रक्रिया में अल्ट्रासाउंड मशीन की सहायता से पुडेंडल नस की सटीक स्थिति का पता लगाया जाता है और फिर एक विशेष सुई के माध्यम से नस के चारों ओर सूजन कम करने वाली और दर्द निवारक दवाओं का मिश्रण पहुँचाया जाता है। यह तकनीक इतनी सटीक है कि इससे आस-पास के अन्य ऊतकों को कोई क्षति नहीं पहुँचती और मरीज को तत्काल राहत का अनुभव होता है।
पुडेंडल न्यूराल्जिया का इलाज करने की इस प्रक्रिया का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह दर्द के स्रोत की पहचान करने में भी मदद करती है। यदि इंजेक्शन के बाद दर्द कम होता है, तो यह पुष्टि हो जाती है कि दर्द का कारण पुडेंडल नस ही है।
डॉ. संतोष कुमार शर्मा ने बताया कि कई बार मरीज वर्षों तक गलत इलाज कराते रहते हैं क्योंकि इस नस की स्थिति शरीर के काफी अंदरूनी हिस्से में होती है। इस आधुनिक नर्व ब्लॉक प्रक्रिया ने न केवल मरीज को दर्द से मुक्ति दिलाई, बल्कि उनके भीतर यह विश्वास भी जगाया कि वे अब एक सामान्य जीवन जी सकती हैं।
प्रक्रिया के सफल संपादन में टीम वर्क की महत्वपूर्ण भूमिका रही। डीएम पेन मेडिसिन के विद्यार्थी डॉ. अजय और डॉ. देवेंद्र ने डॉ. रवि शंकर शर्मा के साथ मिलकर प्रक्रिया के दौरान और उसके बाद मरीज की निरंतर निगरानी की।
पेन मेडिसिन विभाग का यह प्रयास दर्शाता है कि चिकित्सा के क्षेत्र में नई पीढ़ी के डॉक्टर आधुनिकतम पद्धतियों को अपनाने के लिए कितने तत्पर हैं। पुडेंडल न्यूराल्जिया का इलाज होने के बाद अब मरीज को भारी मात्रा में पेनकिलर्स लेने की आवश्यकता नहीं है, जिससे उनके गुर्दे और लीवर पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों का खतरा भी टल गया है।
चिकित्सकों के अनुसार, इस इंजेक्शन का प्रभाव लंबे समय तक बना रहता है। यदि भविष्य में दर्द के लक्षण दोबारा उभरते हैं, तो विभाग के पास रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन (RFA) जैसी और भी उन्नत तकनीकें मौजूद हैं। यह तकनीक तंत्रिका के माध्यम से मस्तिष्क तक जाने वाले दर्द के संकेतों को स्थायी रूप से बाधित कर सकती है। फिलहाल, मरीज को दवाओं की न्यूनतम खुराक पर रखा गया है और उन्हें जीवनशैली में बदलाव के परामर्श दिए गए हैं। एम्स की यह पहल पूर्वांचल में पेन मैनेजमेंट की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम मानी जा रही है।
पुडेंडल न्यूराल्जिया के लक्षण और कारण: क्यों होता है बैठने पर पेल्विक हिस्से में तेज दर्द?
आम जनमानस के लिए यह समझना अत्यंत आवश्यक है कि आखिर यह बीमारी है क्या। डॉ. शर्मा के अनुसार, पुडेंडल न्यूराल्जिया पेल्विक क्षेत्र की एक महत्वपूर्ण नस ‘पुडेंडल नर्व’ की समस्या है। बैठने पर पेल्विक हिस्से में तेज दर्द होना इसका सबसे प्रमुख और विशिष्ट लक्षण है।
मरीज अक्सर शिकायत करते हैं कि जैसे ही वे किसी सख्त सतह पर बैठते हैं, उन्हें ऐसा महसूस होता है जैसे उनके गुप्तांगों या मलाशय क्षेत्र में कोई जलती हुई कील चुभो रहा हो। यह दर्द लेटने या खड़े होने पर कम हो जाता है, जो इसे अन्य प्रकार के दर्दों से अलग करता है।
- पुडेंडल न्यूराल्जिया का इलाज खोजने से पहले इसके कारणों को जानना जरूरी है। इसके मुख्य कारणों में शामिल हैं:
- पेल्विक क्षेत्र की मांसपेशियों में अत्यधिक तनाव या जकड़न।
- लंबे समय तक एक ही मुद्रा में बैठकर काम करना।
- साइक्लिस्ट सिंड्रोम क्या है (What is cyclist syndrome) – यह शब्द उन लोगों के लिए प्रयोग किया जाता है जो बहुत अधिक साइकिल या बाइक चलाते हैं, जिससे पुडेंडल नस पर निरंतर दबाव बना रहता है।
- पेल्विक क्षेत्र में हुई कोई पुरानी चोट या सर्जरी (जैसे हर्निया या प्रोस्टेट सर्जरी)।
- कब्ज के कारण मलाशय क्षेत्र पर पड़ने वाला अत्यधिक दबाव।
इसे एल्कॉक सिंड्रोम का इलाज (Alcock syndrome treatment) भी कहा जाता है क्योंकि पुडेंडल नस एक विशेष नहरनुमा हिस्से से गुजरती है जिसे ‘एल्कॉक कैनाल’ कहते हैं। यदि इस नहर में नस दब जाती है, तो पेल्विक एरिया में जलन और करंट का कारण (Cause of burning and current sensation in pelvic area) स्पष्ट हो जाता है।
मरीज को कई बार ऐसा महसूस होता है जैसे उस हिस्से में बिजली के झटके लग रहे हों या सुइयां चुभ रही हों। कई मामलों में गुदा और जननांगों में सुन्नपन का इलाज (Treatment for numbness in anal and genital areas) भी इसी पुडेंडल नर्व को ठीक करके किया जाता है।
पुडेंडल न्यूराल्जिया का इलाज चुनौतीपूर्ण इसलिए है क्योंकि इसके लक्षण अक्सर अन्य बीमारियों जैसे प्रोस्टेटाइटिस, एंडोमेट्रियोसिस या बवासीर से मिलते-जुलते होते हैं। इसी कारण से कई बार मरीज वर्षों तक गलत विभागों के चक्कर काटते रहते हैं।
एम्स गोरखपुर के विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति को बैठने पर जननांगों या मलाशय के आस-पास असहनीय दर्द हो रहा है और सामान्य अल्ट्रासाउंड या एमआरआई में कुछ नहीं निकल रहा, तो उन्हें तुरंत पेन मेडिसिन विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए।
पुडेंडल न्यूराल्जिया की दवाएं (Pudendal neuralgia medications) और आधुनिक उपचार के चरण
जब हम पुडेंडल न्यूराल्जिया का इलाज शुरू करते हैं, तो इसे कई चरणों में विभाजित किया जाता है। प्रथम चरण में पुडेंडल न्यूराल्जिया की दवाएं (Pudendal neuralgia medications) दी जाती हैं। ये दवाएं सामान्य पेनकिलर (जैसे इबुप्रोफेन या पैरासिटामोल) से भिन्न होती हैं।
चूंकि यह नसों का दर्द है, इसलिए इसमें ‘न्यूरोपैथिक पेन मेडिकेशन’ जैसे कि गाबापेंटिनोइड्स या ट्राइसाइक्लिक एंटीडिप्रेसेंट्स का उपयोग किया जाता है। ये दवाएं मस्तिष्क तक जाने वाले दर्द के संदेशों को शांत करने का कार्य करती हैं।
दवाओं के साथ-साथ, मरीज को यह समझना चाहिए कि रिकवरी रातों-रात नहीं होती। डॉ. संतोष कुमार शर्मा के अनुसार, मरीज को धैर्य रखना पड़ता है। यदि दवाओं से 4-6 सप्ताह में सुधार नहीं दिखता, तब नर्व ब्लॉक या इंजेक्शंस का सहारा लिया जाता है।
एम्स गोरखपुर में महिला मरीज को दिए गए इंजेक्शन ने न केवल दर्द कम किया बल्कि मांसपेशियों की जकड़न को भी शिथिल कर दिया। यह प्रक्रिया क्रोनिक पेल्विक पेन सिंड्रोम का इलाज (Chronic pelvic pain syndrome treatment) का एक अभिन्न अंग है।
अत्यंत दुर्लभ और गंभीर मामलों में, जहां न तो दवाएं काम करती हैं और न ही इंजेक्शन, वहां पुडेंडल नर्व डीकंप्रेशन सर्जरी (Pudendal nerve decompression surgery) पर विचार किया जा सकता है। इस सर्जरी में उस लिगामेंट या ऊतक को हटा दिया जाता है जो नस को दबा रहा होता है।
हालांकि, एम्स गोरखपुर में अधिकांश मरीजों को इंजेक्शन और फिजियोथेरेपी से ही राहत मिल जाती है। यहाँ पुडेंडल न्यूराल्जिया का इलाज इस तरह किया जाता है कि मरीज को कम से कम दवाइयों पर रखा जाए।
मरीज को वर्तमान में न्यूरोपैथिक दर्द की दवाओं पर रखा गया है ताकि नस पूरी तरह से शांत हो सके। विशेषज्ञों का मानना है कि नसों का दर्द ‘मेमोरी’ की तरह होता है; शरीर उस दर्द को याद रखता है। इसलिए दवाओं का नियमित सेवन मस्तिष्क को यह सिखाने के लिए जरूरी है कि अब दर्द का कारण मौजूद नहीं है। एम्स का पेन क्लिनिक हर मंगलवार और शुक्रवार को संचालित होता है, जहां ऐसे जटिल मामलों का विस्तृत परामर्श दिया जाता है।
पुडेंडल न्यूराल्जिया एक्सरसाइज और फिजियोथेरेपी (Pudendal neuralgia exercise and physiotherapy) का महत्व
उपचार का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और अक्सर अनदेखा किया जाने वाला हिस्सा है पुडेंडल न्यूराल्जिया एक्सरसाइज और फिजियोथेरेपी (Pudendal neuralgia exercise and physiotherapy)। दवाओं और इंजेक्शन के बाद भी, यदि पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियां तनाव में रहती हैं, तो दर्द वापस आ सकता है। एम्स गोरखपुर के डॉक्टर मरीजों को विशेष ‘पेल्विक फ्लोर रिलैक्सेशन तकनीक’ सिखाते हैं। इसमें उन मांसपेशियों को ढीला करने का अभ्यास किया जाता है जो अनजाने में पुडेंडल नस को दबा रही होती हैं।
- पुडेंडल न्यूराल्जिया का इलाज सफल बनाने के लिए मरीजों को निम्नलिखित सलाह दी जाती है
- सॉफ्ट कुशन का प्रयोग: बैठने के दौरान ‘डोनट कुशन’ या विशेष गद्दी का प्रयोग करें जिससे पुडेंडल नस वाले हिस्से पर सीधा दबाव न पड़े।
- सही बैठने की मुद्रा: लंबे समय तक झुककर बैठने से बचें।
- योगासन: कुछ विशेष योगासन जैसे ‘हैप्पी बेबी पोज़’ या ‘डीप स्क्वाट’ मांसपेशियों के तनाव को कम करने में सहायक होते हैं।
- स्ट्रैचिंग: पेल्विक एरिया की कोमल स्ट्रैचिंग से रक्त संचार बढ़ता है और नस को ठीक होने में मदद मिलती है।
फिजियोथेरेपी के माध्यम से मांसपेशियों की ‘ट्रिगर पॉइंट्स’ को रिलीज किया जाता है। कई बार पेल्विक क्षेत्र की आंतरिक मांसपेशियों में गांठें बन जाती हैं, जो लगातार दर्द पैदा करती हैं। विशेषज्ञ फिजियोथेरेपिस्ट इन गांठों को विशेष मसाज और व्यायाम के जरिए ठीक करते हैं। यह दृष्टिकोण पुडेंडल न्यूराल्जिया के मरीजों के लिए गेम-चेंजर साबित होता है। पुडेंडल न्यूराल्जिया का इलाज दवाओं, इंजेक्शन और व्यायाम के इस त्रिकोणीय संगम पर टिका है।
एम्स गोरखपुर में उपचार पा रही महिला को भी दवाओं के साथ-साथ इन विशेष अभ्यासों की सलाह दी गई है। डॉ. शर्मा बताते हैं कि जो मरीज व्यायाम और जीवनशैली में बदलाव को गंभीरता से लेते हैं, उनमें दोबारा दर्द होने की संभावना न के बराबर होती है। साइक्लिंग या लंबे समय तक बाइक चलाने वाले युवाओं को भी सलाह दी जाती है कि वे बीच-बीच में ब्रेक लें और अपनी सीट की बनावट पर ध्यान दें ताकि पुडेंडल नर्व सुरक्षित रहे।
पूर्वांचल के मरीजों के लिए नया सवेरा: दर्द मुक्त जीवन की ओर एम्स गोरखपुर के कदम
पुडेंडल न्यूराल्जिया का इलाज अब पूर्वांचल के मरीजों के लिए दिल्ली या मुंबई जैसे शहरों की दूरी का मोहताज नहीं रहा। एम्स गोरखपुर के कार्यकारी निदेशक एवं सीईओ ने भी इस सफलता पर पेन मेडिसिन टीम को बधाई दी है।
संस्थान का लक्ष्य है कि कोई भी मरीज दर्द के कारण अवसाद की स्थिति में न पहुँचे। पूर्वांचल के सुदूर इलाकों जैसे देवरिया, कुशीनगर और महाराजगंज के मरीजों के लिए यह एक बड़ी राहत है कि उन्हें अब अपने ही क्षेत्र में विश्वस्तरीय पेन मैनेजमेंट सुविधा मिल रही है।
चिकित्सा विज्ञान केवल रोगों को ठीक करने का नाम नहीं है, बल्कि यह मनुष्य की गरिमा को वापस लौटाने का माध्यम है। जिस मरीज ने 1 साल तक समाज और परिवार के बीच दर्द को छिपाया और अंत में निराश होकर रोने लगी थी, उसकी मुस्कान ही इस संस्थान की असली उपलब्धि है। पुडेंडल न्यूराल्जिया का इलाज यह संदेश देता है कि पेल्विक क्षेत्र का दर्द कोई शर्मिंदगी की बात नहीं है, बल्कि एक चिकित्सीय स्थिति है जिसका पूर्ण उपचार संभव है।
मरीजों के लिए अंतिम संदेश यही है कि यदि आपको जननांगों या मलाशय क्षेत्र में लंबे समय से दर्द है, तो उसे चुपचाप न सहें। हर दर्द सामान्य स्त्री रोग या सामान्य बवासीर नहीं होता। सही समय पर पुडेंडल न्यूराल्जिया का इलाज शुरू कराने से न केवल आप बड़ी सर्जरी से बच सकते हैं, बल्कि अपने जीवन की गुणवत्ता को भी फिर से प्राप्त कर सकते हैं। एम्स गोरखपुर का पेन मेडिसिन विभाग आधुनिक तकनीक और मानवीय संवेदना के साथ आपकी सेवा में सदैव तत्पर है।

निर्भीक इंडिया (NIRBHIK INDIA) एक समाचार पत्र नही अपितु 245 साल से भी लम्बे समय से चल रहे पत्रकारिता की विचारधारा है, जो हमेशा लोकतंत्र के चारो स्तम्भ को मान्यता देने एवं जनता सर्वोपरि की विचारों का प्रतिनिधित्वकत्र्ता है। आप सभी हमारे साथ जुड़े अपने तन, मन व धन से हमें ताकत दें जिससे कि हम आप (जनता) के लिए आप (जनता) के द्वारा, आप (जनता) के आदेशों पर केन्द्र से सवाल करते हुए एक पूर्ण लोकतंत्र बना सकें।
Navneet Mishra is a seasoned journalist currently associated with Nirbhik India and its digital portal, nirbhikindia.in. With over six years of experience across print and digital platforms, Navneet specializes in politics, sports, economics, and geopolitics.
A Master’s graduate in Mass Communication from Deen Dayal Upadhyay Gorakhpur University, he is also a dedicated media scholar. His academic research focuses on “the pivotal role of Gorakhpur’s Hindi newspapers during the Indian freedom struggle against the British Crown”. Before joining Nirbhik India, Navneet spent five years at Adarsh Jeevan and gained valuable field experience at Amar Ujala Gorakhpur as training reporter only for 5 days.
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नवनीत मिश्रा वर्तमान में ‘निर्भीक इंडिया’ मीडिया समूह से जुड़े हैं। उन्होंने दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया है। पत्रकारिता के अपने 6 वर्षों के सफर में उन्होंने प्रिंट और डिजिटल दोनों डेस्क पर काम किया है। उनके शोध का विषय ब्रिटिश शासन के खिलाफ गोरखपुर के अखबारों का योगदान रहा है, जो उनकी ऐतिहासिक समझ को दर्शाता है। वे राजनीति, अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय मामलों (Geopolitics) पर निरंतर लिखते रहे हैं। ‘आदर्श जीवन’ दैनिक में 5 साल का कार्यकाल और ‘अमर उजाला’ गोरखपुर में ट्रेनिंग रिपोर्टिंग के तौर पर मात्र 5 दिन काम क्या है उनकी लेखनी को और भी निखारता है।

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