पूर्वांचल के 21 जिलों में कार्यरत जनपदीय एपिडेमियोलॉजिस्ट (Epidemiologist) के लिए आज अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS gorakhpur) में एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। सामुदायिक एवं पारिवारिक चिकित्सा विभाग में आयोजित इस चार दिवसीय 'प्रॉब्लम सॉल्विंग इन पब्लिक हेल्थ' (पी०एस०पी०एच०) प्रशिक्षण का उद्देश्य सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्याओं को पहचानने और उनके निदान के लिए समाधान खोजने की क्षमता को बढ़ाना है।

निर्भीक इंडिया संवाददाता (नवनीत मिश्र)- एपिडेमियोलॉजिस्ट (Epidemiologist) के प्रशिक्षण का उद्घाटन करते हुए संस्थान की अधिशासी निदेशक डॉ. (मेजर जनरल) विभा दत्ता ने कहा कि यह हमारे लिए गर्व का विषय है कि उत्तर प्रदेश सरकार के चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा इस प्रशिक्षण को अपने व्यय पर आयोजित करने का निर्णय लिया गया है।
उन्होंने बताया कि पिछले साल जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के सहयोग से इसी तरह का एक सफल प्रशिक्षण आयोजित किया गया था, जिसमें प्रदेश के 60 से अधिक वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारियों को प्रशिक्षित किया गया था। इस सफलता को देखते हुए, राज्य सरकार ने इसे आगे बढ़ाने का फैसला किया है।
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एपिडेमियोलॉजिस्ट (Epidemiologist) के प्रशिक्षण का उद्देश्य
सामुदायिक एवं पारिवारिक चिकित्सा विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. आनंद मोहन दीक्षित ने बताया कि एपिडेमियोलॉजिस्ट (Epidemiologist) प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य जनस्वास्थ्य की समस्याओं की सटीक पहचान करना और उनके उपयुक्त निदान की क्षमता विकसित करना है। उन्होंने कहा कि इसके तहत, प्रशिक्षु अपने अनुभवों के आधार पर प्रमुख स्वास्थ्य समस्याओं की पहचान करेंगे और उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करके उनका समाधान खोजेंगे।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए डॉ. अनिल कोपरकर, प्रोफेसर, सामुदायिक एवं पारिवारिक चिकित्सा विभाग, एम्स गोरखपुर (AIIMS gorakhpur) ने प्रतिभागियों को प्रॉब्लम सॉल्विंग इन पब्लिक हेल्थ के इतिहास से भी अवगत कराया।

एपिडेमियोलॉजिस्ट (Epidemiologist) प्रशिक्षण में विशेषज्ञों की उपस्थिति
एपिडेमियोलॉजिस्ट (Epidemiologist) प्रशिक्षण कार्यक्रम में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग, उत्तर प्रदेश से पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट डॉ. अंकिता सिंह, येल स्कूल ऑफ़ पब्लिक हेल्थ के डॉ. रघुकुल रतन और प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर सुमित कुमार पांडेय भी उपस्थित थे।
डॉ. दत्ता ने सभी प्रशिक्षार्थियों से आग्रह किया कि वे इस प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान और अनुभव को अपने कार्यक्षेत्र में लागू करें और जनस्वास्थ्य को मजबूत बनाने में अपना योगदान दें। यह पहल न केवल स्वास्थ्य अधिकारियों की क्षमता को बढ़ाएगी, बल्कि यह भी सुनिश्चित करेगी कि जनस्वास्थ्य से संबंधित समस्याओं का समाधान प्रभावी ढंग से हो सके।

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