अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS gorakhpur) ने न्याय और चिकित्सा क्षेत्र के बीच तालमेल को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। 13-14 अगस्त 2025 को चिकित्सा अधिकारियों के लिए दो दिवसीय विशेष प्रशिक्षण के बाद, आज एम्स गोरखपुर (AIIMS gorakhpur) ने पुलिस अधिकारियों के लिए एक 'ओरिएंटेशन प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण कार्यक्रम' (forensic training) का आयोजन किया। यह प्रशिक्षण संस्थान की कार्यकारी निदेशक मेजर जनरल (डॉ.) विभा दत्ता, एस.एम. (से.नि.) के कुशल मार्गदर्शन में संपन्न हुआ, जिसका उद्देश्य विवेचना से जुड़े अधिकारियों की विधिक-वैज्ञानिक दक्षता को बढ़ाना है।

निर्भीक इंडिया संवाददाता (नवनीत मिश्र) – इस विशेष प्रशिक्षण (forensic training) का लक्ष्य पुलिस और चिकित्सा अधिकारियों—जो कि विधिक एवं फॉरेंसिक प्रक्रिया के दो महत्वपूर्ण स्तंभ हैं—की क्षमता को सुदृढ़ करना था। इसका उद्देश्य क्षेत्रीय स्तर पर विधि-वैज्ञानिक कार्यों को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाना भी था।
पुलिस अधिकारियों का फॉरेंसिक क्षमता निर्माण: एम्स गोरखपुर (AIIMS gorakhpur) की पहल
इस प्रशिक्षण (forensic training) में, फॉरेंसिक मेडिसिन एवं टॉक्सिकोलॉजी विभाग की टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। टीम में डॉ. मनोज बी. पर्चाके (विभागाध्यक्ष), डॉ. यशवंत कुमार सिंह, डॉ. आशीष सराफ और डॉ. नवनीत अटेरीया शामिल थे। इन विशेषज्ञों ने पुलिस अधिकारियों को कई महत्वपूर्ण विषयों पर गहन प्रशिक्षण दिया। इस संयुक्त पहल ने पुलिस और फॉरेंसिक विशेषज्ञों के बीच सहयोग को और मजबूत बनाने पर विशेष बल दिया, जो न्याय प्रक्रिया को सुगम और सटीक बनाने के लिए आवश्यक है।

एम्स गोरखपुर (AIIMS gorakhpur) : प्रशिक्षण (forensic training) में पुलिस अधिकारियों को निम्न विषयों पर प्रशिक्षित किया गया:
- अपराध स्थल का वैज्ञानिक प्रबंधन: साक्ष्य को बिना नुकसान पहुंचाए कैसे एकत्र किया जाए।
- साक्ष्य की श्रृंखला (Chain of Custody) बनाए रखना: यह सुनिश्चित करना कि एकत्र किए गए साक्ष्य अपनी प्रामाणिकता और अखंडता बनाए रखें।
- जैविक नमूनों का सुरक्षित संरक्षण: ब्लड, डीएनए जैसे नमूनों को सही तरीके से संरक्षित कर प्रयोगशाला में प्रेषित करना।
- विधिक दस्तावेज़ीकरण: मामलों से संबंधित सभी दस्तावेजों को सटीक और सही तरीके से तैयार करना।
- चिकित्सकीय एवं अन्वेषण टीमों के बीच समन्वय: प्रभावी संवाद और सहयोग स्थापित करना।
न्याय व्यवस्था में तालमेल: एक मजबूत कदम
इस कार्यक्रम में कई प्रमुख अधिकारी उपस्थित थे, जिनमें मेजर जनरल (डॉ.) विभा दत्ता, डॉ. राजेश झा (सीएमओ, गोरखपुर), डॉ. ए.के. चौधरी (अतिरिक्त सीएमओ, गोरखपुर) और श्री सुधीर जायसवाल (पुलिस अधीक्षक, क्राइम, गोरखपुर) शामिल थे।
अपने मुख्य संबोधन में मेजर जनरल (डॉ.) विभा दत्ता ने कहा कि न्याय सुनिश्चित करने में चिकित्सा अधिकारियों और पुलिस अधिकारियों के बीच तालमेल अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि “विधिक-वैज्ञानिक कार्य की विश्वसनीयता वैज्ञानिक पद्धतियों की सूक्ष्मता, विभागीय समन्वय और सत्य के प्रति अटूट प्रतिबद्धता पर निर्भर करती है।” साथ ही उन्होंने एम्स गोरखपुर (AIIMS gorakhpur) को क्षेत्रीय स्तर पर फॉरेंसिक क्षमता निर्माण (forensic kshamta nirman) का प्रमुख केंद्र बनाने की अपनी दृष्टि साझा की और इस तरह की पहल को निरंतर समर्थन देने का आश्वासन दिया।
सीएमओ डॉ. राजेश झा और एसपी क्राइम श्री सुधीर जायसवाल ने भी इस पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि निरंतर प्रशिक्षण और अंतरविभागीय सहयोग ही क्षेत्र में विधिक-वैज्ञानिक कार्य को सुदृढ़ करने के लिए आवश्यक है। डॉ. मनोज पर्चाके के अनुसार, यह संयुक्त प्रशिक्षण पूर्वी उत्तर प्रदेश में विधिक-वैज्ञानिक प्रक्रियाओं की पारदर्शिता, विश्वसनीयता और उत्तरदायित्व को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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