आजादी के 7 दशक बीत जाने के बाद भी उत्तर प्रदेश का महराजगंज जिला मुख्यालय रेल नेटवर्क से पूरी तरह अछूता था। अब जाकर तराई क्षेत्र में आनन्द नगर घुघुली नई रेल लाइन (Anand Nagar Ghughuli New Rail Line) के निर्माण की सुगबुगाहट जमीन पर दिखाई दी है। यह स्थानीय लोगों के लिए एक ऐतिहासिक खबर है।

नवनीत मिश्र (संवाददाता)- हालांकि, रेल मंत्रालय की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। मार्च 2019 में इस 958.27 करोड़ रुपये की परियोजना को आधिकारिक मंजूरी मिल गई थी। इसके बावजूद, विस्तृत अधिसूचना अगस्त 2023 में जारी हुई और अब 2026 में जाकर इसका जमीनी काम शुरू हो पाया है। 7 साल की यह भयानक देरी लालफीताशाही का जीता-जागता प्रमाण है।
आनन्द नगर घुघुली नई रेल लाइन (Anand Nagar Ghughuli New Rail Line): 7 साल की सरकारी लेटलतीफी
आजादी के बाद से ही रेल मंत्रालय ने गोरखपुर और आसपास के क्षेत्रों के साथ बजट आवंटन में सौतेला व्यवहार किया है। पूर्वोत्तर रेलवे (NER) का मुख्यालय होने के बावजूद, गोरखपुर क्षेत्र में रेलवे मैन्युफैक्चरिंग या रेल कोच फैक्ट्री जैसी बड़ी परियोजनाओं पर नाममात्र का बजट खर्च किया गया है। यह क्षेत्र हमेशा बुनियादी रेल सुविधाओं के लिए तरसता रहा है।
देर से ही सही, अब आनन्द नगर घुघुली नई रेल लाइन के 51.300 किलोमीटर लंबे ट्रैक के लिए 244 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण पूरा कर लिया गया है। इस परियोजना पर 20,000 घनमीटर मिट्टी का कार्य भी पूरा हो चुका है, जो एक सकारात्मक संकेत है।
आनन्द नगर घुघुली नई रेल लाइन (Anand Nagar Ghughuli New Rail Line) के निर्माण की जमीनी हकीकत
इस वृहद हिमालय तराई क्षेत्र रेलवे (Himalayan Terai Region Railway) परियोजना को दो प्रमुख चरणों में पूरा किया जाना है। पहले चरण के अंतर्गत घुघुली से महराजगंज तक की नई रेल लाइन के लिए टेंडर अवार्ड कर दिया गया है, जिस पर काम तेजी से चल रहा है।
दूसरे चरण में महराजगंज से आनन्द नगर तक के ट्रैक के लिए टेंडर की प्रक्रिया अभी भी फाइलों में दौड़ रही है। इसके साथ ही, आनन्द नगर स्टेशन यार्ड रिमॉडलिंग (Anand Nagar Station Yard Remodeling) और महराजगंज स्टेशन बिल्डिंग के निर्माण का काम भी शुरू कर दिया गया है।
यात्रियों की सुविधा के लिए इस नए रूट के मध्य पिपरा, मुन्दारी, शिकारपुर, पकरी नौनिया और परसिया बुजुर्ग नामक नए हॉल्ट स्टेशन बनाए जा रहे हैं। आनन्द नगर घुघुली नई रेल लाइन (Anand Nagar Ghughuli New Rail Line) पर कुल 25 बड़े पुल और 8 छोटे पुल बनाए जाने हैं, जिन पर निर्माण कार्य प्रगति पर है।
सुरक्षा के लिहाज से इस मार्ग पर 44 सड़क अंडरपास और सीमित ऊंचाई के सब-वे प्रस्तावित हैं, जिनमें से 6 पर काम चल रहा है। सबसे खास बात यह है कि आनन्द नगर घुघुली नई रेल लाइन (Anand Nagar Ghughuli New Rail Line) पूरी तरह से ब्रॉड गेज और विद्युतीकृत (Electrified) लाइन होगी।

आनन्द नगर घुघुली नई रेल लाइन से बदलेगी पूर्वांचल की तस्वीर
इस लाइन के शुरू होने से महराजगंज जनपद का विकास (Development of Maharajganj District) एक नए औद्योगिक युग में प्रवेश करेगा। यह जिला सीधे तौर पर भारत के रेलवे मानचित्र पर मजबूती से अपनी उपस्थिति दर्ज कराएगा।
यह नया ट्रैक पूर्वोत्तर भारत वैकल्पिक रेल मार्ग (North East India Alternative Rail Route) के रूप में एक गेम-चेंजर साबित होगा। वर्तमान में गोंडा से पनियहवा (वाया गोरखपुर) की दूरी 307 किलोमीटर है। इस नई रेल लाइन के बनने से यह दूरी 42 किलोमीटर कम होकर मात्र 265 किलोमीटर रह जाएगी।
गोरखपुर जंक्शन के बाईपास हो जाने से न केवल यात्रा के समय में भारी कमी आएगी, बल्कि गोरखपुर स्टेशन पर ट्रेनों का भारी दबाव भी कम होगा। इस कृषि बाहुल्य क्षेत्र औद्योगिक विकास (Agriculture Dominated Area Industrial Development) को भी नई गति मिलेगी, क्योंकि सीमेंट, खाद, कोयला और अनाज की ढुलाई बेहद सस्ती और आसान हो जाएगी।
भले ही 2019 से 2026 तक का अमूल्य समय सरकारी लेटलतीफी की भेंट चढ़ गया हो, लेकिन अब जनता को उम्मीद है कि यह काम तय समय सीमा में पूरा होगा। आनन्द नगर घुघुली नई रेल लाइन (Anand Nagar Ghughuli New Rail Line) से न सिर्फ यूपी, बल्कि पड़ोसी देश नेपाल के व्यापारिक रिश्तों और आम जनजीवन को भी भारी आर्थिक लाभ मिलेगा।

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Navneet Mishra is a seasoned journalist currently associated with Nirbhik India and its digital portal, nirbhikindia.in. With over six years of experience across print and digital platforms, Navneet specializes in politics, sports, economics, and geopolitics.
A Master’s graduate in Mass Communication from Deen Dayal Upadhyay Gorakhpur University, he is also a dedicated media scholar. His academic research focuses on “the pivotal role of Gorakhpur’s Hindi newspapers during the Indian freedom struggle against the British Crown”. Before joining Nirbhik India, Navneet spent five years at Adarsh Jeevan and gained valuable field experience at Amar Ujala Gorakhpur as training reporter only for 5 days.
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नवनीत मिश्रा वर्तमान में ‘निर्भीक इंडिया’ मीडिया समूह से जुड़े हैं। उन्होंने दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया है। पत्रकारिता के अपने 6 वर्षों के सफर में उन्होंने प्रिंट और डिजिटल दोनों डेस्क पर काम किया है। उनके शोध का विषय ब्रिटिश शासन के खिलाफ गोरखपुर के अखबारों का योगदान रहा है, जो उनकी ऐतिहासिक समझ को दर्शाता है। वे राजनीति, अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय मामलों (Geopolitics) पर निरंतर लिखते रहे हैं। ‘आदर्श जीवन’ दैनिक में 5 साल का कार्यकाल और ‘अमर उजाला’ गोरखपुर में ट्रेनिंग रिपोर्टिंग के तौर पर मात्र 5 दिन काम क्या है उनकी लेखनी को और भी निखारता है।

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