दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय (Ddu Gorakhpur University) अपने 44वें दीक्षांत समारोह के उपलक्ष्य में, इस साल के Ddu Dikshaotsav 2025 को लेकर एक ऐसी अनूठी शर्त के साथ मैदान में उतरा है, जिसने छात्रों के साथ-साथ आम जनता का भी ध्यान खींचा है।

निर्भीक इंडिया (नवनीत मिश्र)- विश्वविद्यालय ने कविता, निबंध, भाषण, नृत्य और संगीत जैसी प्रतियोगिताओं का आयोजन किया है, लेकिन एक शर्त ने सबको चौंका दिया है: “प्रतिभागी छात्र अपनी प्रतियोगिता से संबद्ध सामग्री स्वयं लाएंगे।”
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डीडीयू दीक्षांतोत्सव (Ddu Dikshaotsav) पर डीडीयू की नीति वाह!
यह खबर उन सभी के लिए है जो सोचते थे कि विश्वविद्यालय सिर्फ डिग्री और ज्ञान बांटने का काम करता है। डीडीयू दीक्षांतोत्सव (Ddu Dikshaotsav) की इस पहल से यह साबित हो गया है कि वह छात्रों को स्वावलंबी बनाने के लिए हर मुमकिन कोशिश कर रहा है।
जब पूरे देश में शैक्षणिक संस्थान अपने छात्रों को बेहतर से बेहतर सुविधाएँ देने की होड़ में लगे हैं, तब गोरखपुर का यह विश्वविद्यालय एक अलग ही रास्ता दिखा रहा है। ‘कला और संस्कृति’ को बढ़ावा देने के लिए प्रतियोगिताएँ आयोजित करना तो एक अच्छी बात है, लेकिन जब बात उस प्रतियोगिता में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की आती है, तो विश्वविद्यालय ने छात्रों के कंधे पर पूरी जिम्मेदारी डाल दी है।

DDU Dikshaotsav 2025: आत्मनिर्भर भारत का नया अध्याय?
सवाल यह उठता है कि क्या यह आत्मनिर्भर भारत की एक नई और अनोखी मिसाल है? जहां एक ओर देश के युवा उद्यम और नवाचार की बात कर रहे हैं, वहीं डीडीयू गोरखपुर (Ddu Gorakhpur) ने यह साबित कर दिया है कि कला और संस्कृति के क्षेत्र में भी आत्मनिर्भरता उतनी ही जरूरी है।
उदाहरण के लिए, अगर कोई छात्र काव्य पाठ प्रतियोगिता में भाग लेना चाहता है, तो उसे अपनी कलम, कागज और मंच पर खड़े होने का जज्बा खुद लाना होगा। अगर किसी को नृत्य प्रतियोगिता में हिस्सा लेना है, तो अपने घुँघरू, ड्रेस और संगीत की व्यवस्था भी उसे स्वयं ही करनी होगी। इस नियम से यह तो साफ है कि विश्वविद्यालय सिर्फ मंच देगा, कला और कलाकार खुद छात्र को पैदा करने होंगे।
दीक्षांतोत्सव में राज्यपाल महोदया करेंगी पुरस्कार वितरण, लेकिन…
इमेज के अनुसार, प्रतियोगिताओं में विजयी प्रतिभागियों को स्वयं राज्यपाल महोदया के द्वारा पुरस्कृत किया जाएगा। यह एक सम्मान की बात है, लेकिन इस सम्मान के पीछे की ‘सामग्री’ जुटाने की मेहनत सिर्फ और सिर्फ छात्रों की होगी। ऐसा लगता है कि विश्वविद्यालय ने यह सुनिश्चित कर दिया है कि पुरस्कार का असली मजा वही ले पाएगा जिसने अपनी ‘सामग्री’ के लिए पसीना बहाया हो।
कुल मिलाकर, Ddu Dikshaotsav 2025 एक ऐसा आयोजन है जो न केवल छात्रों की प्रतिभा को परख रहा है, बल्कि उनकी संसाधन जुटाने की क्षमता को भी चुनौती दे रहा है। तो अगली बार जब आप Ddu Dikshaotsav में भाग लें, तो अपनी प्रतिभा के साथ-साथ अपना पूरा ‘किट बैग’ ले जाना न भूलें!

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