गोरखपुर फोरम फॉर क्लीन एयर (Gorakhpur Forum for Clean Air) विषय पर केयर फाउंडेशन इंडिया (Care Foundation India) की पहल पर स्वच्छ वायु और जलवायु कार्रवाई के लिए एम्स सभागार, गोरखपुर में कार्यशाला का आयोजन किया गया।

निर्भीक इंडिया गोरखपुर (संवाददाता)- वायु प्रदूषण से निपटने पर केंद्रित एक महत्वपूर्ण कार्यशाला, जिसका शीर्षक गोरखपुर फोरम फॉर क्लीन एयर (Gorakhpur Forum for Clean Air) था, एम्स सभागार, गोरखपुर में आयोजित की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव ने की तथा इसका आयोजन जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) गोरखपुर और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) गोरखपुर ने संयुक्त रूप से किया।
गोरखपुर फोरम फॉर क्लीन एयर (Gorakhpur Forum for Clean Air) विषय पर चर्चा के पूरा विवरण
कार्यक्रम का नेतृत्व लंग केयर फाउंडेशन इंडिया द्वारा डॉक्टर्स फॉर क्लीन एयर एंड क्लाइमेट एक्शन पहल द्वारा किया गया। कार्यशाला की शुरुआत महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव ने इलेक्ट्रॉनिक तरीके से दीप प्रज्ज्वलित कर किया। अपने संबोधन में महापौर ने वायु प्रदूषण से निपटने की महत्वपूर्ण आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि हम दूषित भोजन और पानी से बच सकते हैं, लेकिन स्वच्छ हवा जीवित रहने के लिए आवश्यक है। उन्होंने भावी पीढ़ियों के लिए स्वस्थ वातावरण सुनिश्चित करने के लिए सामूहिक जिम्मेदारी और वृक्षारोपण जैसे सक्रिय उपायों का आह्वान किया।
कार्यशाला के दौरान लंग केयर फाउंडेशन और डॉक्टर्स फॉर क्लीन एयर एंड क्लाइमेट एक्शन ने आधिकारिक तौर पर स्वच्छ वायु के लिए गोरखपुर फोरम (Gorakhpur Forum for Clean Air) का शुभारंभ किया। इस पहल का उद्देश्य वायु प्रदूषण से उत्पन्न गंभीर स्वास्थ्य खतरों से निपटना है, जो सीमित जन जागरूकता के बावजूद लगातार बढ़ रहे हैं।
इस फोरम (Gorakhpur Forum for Clean Air) का उद्देश्य जागरूकता फैलाने और व्यावहारिक समाधानों को बढ़ावा देने में डॉक्टरों, नौकरशाहों, नागरिक समाज के प्रतिनिधियों, व्यापार और राजनीतिक नेताओं, उद्योग प्रतिनिधियों, शिक्षाविदों, युवाओं और प्रेस सहित विभिन्न हितधारकों को शामिल करना है।
गोरखपुर फोरम फॉर क्लीन एयर की चर्चा के मुख्य तत्व जो बने चर्चा के केन्द्र
कार्यक्रम में मुख्य चर्चाओं में वायु प्रदूषण, इसके गंभीर स्वास्थ्य प्रभावों और इन मुद्दों को संबोधित करने के लिए व्यावहारिक कदमों के बारे में बुनियादी तथ्य शामिल थे। कार्यशाला में विभिन्न विशेषज्ञों की अंतर्दृष्टि शामिल थी-
- ’’विनीत कुमार सिंह’’, अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (डी/आर)/डीडीएमए के सीईओ ने पराली जलाने सहित वायु प्रदूषण के स्वास्थ्य प्रभावों को संबोधित करने के महत्व पर जोर दिया।
- ’’डॉ. करुणा’’, एक प्राकृतिक चिकित्सक और पर्यावरणविद् ने वायु प्रदूषण के छिपे हुए प्रभावों पर प्रकाश डाला, ज्ञान और नागरिक सशक्तिकरण की आवश्यकता पर बल दिया।
- ’’डॉ. स्मिता जायसवाल’’, आईएमए गोरखपुर की अध्यक्ष ने वायु प्रदूषण के स्रोतों और हानिकारक प्रभावों, विशेष रूप से महिलाओं पर इसके प्रजनन स्वास्थ्य प्रभाव के बारे में जागरूकता की कमी की ओर इशारा किया।
- ’’एम्स में पल्मोनोलॉजी के प्रमुख प्रोफेसर डॉ. सुबोध’’ ने वायु प्रदूषण के प्रति स्वास्थ्य सेवा प्रणाली की प्रतिक्रिया को बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण की वकालत की।
- ’’एम्स गवर्निंग काउंसिल के अध्यक्ष प्रोफेसर प्रसाद’’ ने अस्थमा के साथ अपने व्यक्तिगत अनुभव को साझा किया, प्लास्टिक के उपयोग को कम करने और पर्यावरण चेतना को बढ़ावा देने के लिए तत्काल कार्रवाई का आग्रह किया।
- डीडीएमए गोरखपुर के गौतम गुप्ता ने कचरा जलाने के कारण खतरनाक ।फप् स्तरों पर चर्चा की और नागरिक सुरक्षा, अग्निशमन विभाग और अन्य हितधारकों से सामूहिक कार्रवाई का आह्वान किया। प्रसिद्ध पल्मोनोलॉजिस्ट ’’डॉ. संजय कुमार लाठ’’ ने मानव अस्तित्व और प्राकृतिक दुनिया के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए वृक्षारोपण के महत्व को रेखांकित किया।
- कार्यशाला का समापन ’’डॉ. हर्षवर्धन पुरी’’, डॉक्टर्स फॉर क्लीन एयर एंड क्लाइमेट एक्शन के वरिष्ठ सलाहकार द्वारा एक प्रस्तुति के साथ हुआ, जिन्होंने प्रदूषण समाधान और पारिवारिक जीवन में सुधार के लिए व्यक्तिगत कार्रवाई के महत्व पर चर्चा की।
इस कार्यक्रम में डॉ. पी.एन. सिंह, डॉ. बी.बी. गुप्ता, डॉ. अरविंद कुमार और डॉ. राजीव खुराना। डॉ. कुमार ने सामूहिक कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया, जबकि डॉ. खुराना ने स्मार्ट शहरों के साथ-साथ स्मार्ट नागरिक बनाने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।
यह कार्यशाला गोरखपुर में वायु प्रदूषण के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने और सामूहिक कार्रवाई को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
प्रदूषित हवा वाले शहरों में आया है गोरखपुर का नाम
गोरखपुर की जनता में से अधिकतर को शायद यह पता भी नहीं होगा कि वह जिस हवा में सांस ले रहे वह प्रदूषित हो चुकी है। मई के महीने में एक रिपोर्ट ने गोरखपुर के पढ़े लिखे लोग जो गोरखपुर में हवा की गुणवत्ता के गिरते स्तर को लेकर चिंता करते है, उन्होने देखा कि रिपोर्ट में गोरखपुर की हवा अत्यन्त प्रदूषित हो चुकी है।
मई के गर्मी वाले महीने में सुबह-सुबह प्रदूषण की चादर गोरखपुर की हवा में घुला हुआ पाया गया था। इसमें पराली को गुनहगार तो बना दिया जाता है, लेकिन वाहनों से उत्पन्न जहरीली गैस और कल-कारखानों से निकलने वाले गैस पर कोई बात नहीं करता ना ही उसको निस्तारित करने के लिए भी कुछ करता है।
हमने मई के महीने में गोरखपुर में हवा की गिरती गुणवत्ता पर एक विडियो कवरेज किया जिसका समाचार निर्भीक इंडिया में प्रकाशित किया गया। यही नही गोरखपुर की जनता को उनके आस-पास की हवा की स्थिती को लेकर जागरूक बनाने के लिए अपने निर्भीक इंडिया समाचार के गोरखपुर पेज पर मौसम के साथ हवा की गुणवत्ता का सूचकांक भी प्रकाशित किया जाता है।

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