गोरखपुर में डेंगू के बढ़ते खतरे और डेंगू रोकथाम की जरूरत स्म्झ्ते हुए स्वास्थ्य विभाग अब उन जगहों पर भी ताबड़तोड़ कार्रवाई कर रहा है, जहाँ संक्रमण फैलने का सबसे अधिक जोखिम होता है। बुधवार को गोरखपुर स्वास्थ्य विभाग रेलवे अस्पताल के साथ मिलकर एक बड़ा अभियान शुरू किया गया।

निर्भीक इंडिया (संवाददाता गोरखपुर)- अभियान ललित नारायण मिश्र रेलवे अस्पताल से शुरू हुआ, जहाँ स्वास्थ्य विभाग की टीम ने रेलवे अस्पताल के स्टाफ को डेंगू से बचाव के लिए प्रशिक्षित किया। इस पहल का उद्देश्य रेलवे के सभी परिसरों जैसे स्टेशनों, कॉलोनियों और वर्कशॉप को मच्छर मुक्त बनाना है।
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क्यों अहम है रेलवे अस्पताल गोरखपुर में डेंगू रोकथाम अभियान
क्यों? डॉ राजेश झा ने इस मौके पर कहा कि स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर की गई यह संयुक्त कार्रवाई बेहद महत्वपूर्ण है। रेलवे स्टेशन पर हर दिन हजारों यात्री आते-जाते हैं। इनमें से कई यात्री डेंगू प्रभावित क्षेत्रों से आ सकते हैं, जिससे बीमारी के फैलने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में रेलवे परिसर में मच्छरों को पनपने से रोकना बहुत जरूरी है।
इस अभियान का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि रेलवे अस्पताल, रेलवे स्टेशन और आवासीय कॉलोनियों में खुद ही एंटी-लार्वल अभियान चला पाएगा। उन्होंने कहा कि यह संवेदीकरण कार्यशाला (जागरूकता कार्यक्रम) इस दिशा में एक अहम कदम है- सीएमओ
कौन? इस विशेष डेंगू जागरूकता कार्यक्रम गोरखपुर में रेलवे अस्पताल के चिकित्सा निदेशक डॉ एए खान, मंडलीय कीटविज्ञानी डॉ वीके श्रीवास्तव और जिला मलेरिया अधिकारी अंगद सिंह ने भी प्रमुखता से हिस्सा लिया। सभी ने मिलकर रेलवे कर्मचारियों और अधिकारियों को डेंगू और अन्य मच्छर जनित रोग से बचाव के बारे में जागरूक किया।

डेंगू रोकथाम : डेंगू से जुड़ी भ्रांतियां: क्या आपको पता है कि….
क्या? मंडलीय कीटविज्ञानी डॉ वीके श्रीवास्तव डेंगू पर बनी एक यूट्यूब फिल्म के माध्यम से लोगों के बीच फैली भ्रांतियों को दूर किया। उन्होंने कहा कि डेंगू कोई जानलेवा बीमारी नहीं है, लेकिन अगर हम लापरवाही बरतें तो यह खतरनाक हो सकती है। उन्होंने सबसे अहम जानकारी दी कि डेंगू का मच्छर गंदे पानी में नहीं, बल्कि साफ और ठहरे हुए पानी में पनपता है।
कहाँ? यह मच्छर कूलर, गमलों, एसी ट्रे, नारियल के खोल, टायर और पशुओं के पानी के पात्र जैसे छोटे-छोटे जलस्रोतों में ही पैदा होता है। उन्होंने बताया कि अगर इन जगहों पर पानी जमा होने से रोका जाए और नियमित रूप से एंटी-लार्वल अभियान चलाया जाए, तो वाहक मच्छरों से आसानी से बचा जा सकता है।
इलाज में लापरवाही पड़ सकती है भारी
क्या करें? जिला मलेरिया अधिकारी अंगद सिंह ने लोगों को डेंगू से बचने के उपाय बताए। उन्होंने कहा कि डेंगू बचाव के उपाय बहुत आसान हैं। सबसे पहले तो, अगर डेंगू के लक्षण (जैसे तेज बुखार, जोड़ों में दर्द) दिखें तो तुरंत किसी प्रशिक्षित डॉक्टर से सलाह लें। इलाज में देरी करने या खुद से दवा लेने से मरीज की हालत बिगड़ सकती है, और कई बार उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ सकता है।
कैसे बचें? अंगद सिंह ने बताया कि डेंगू के संक्रमण से बचने के लिए पूरी बांह के कपड़े पहनना और अपने घर के आसपास, दफ्तर या दुकान पर किसी भी जगह साफ पानी इकट्ठा न होने देना सबसे जरूरी है।
आगे क्या? रेलवे अस्पताल के चिकित्सा निदेशक डॉ एए खान ने आश्वस्त किया कि स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से मिली महत्वपूर्ण जानकारियों के बाद, रेलवे से जुड़े सभी परिसरों में मच्छर जनित रोगों की रोकथाम के लिए बड़े पैमाने पर कार्रवाई की जाएगी।
इस अभियान में सहायक मलेरिया अधिकारी प्रभात रंजन सिंह और मलेरिया निरीक्षक सहित कई अन्य अधिकारी भी मौजूद थे। यह पहल गोरखपुर डेंगू रोकथाम के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, जो दो प्रमुख विभागों को एकजुट कर रही है।

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