आईपीएल 2024 (IPL 2024), 16 साल के आईपीएल इतिहास में एक इकलौता सीजन है, जहाँ पर केवल और बल्लेबाज ही दिखाई दे रहा है। एक सवाल बतौर खेल पत्रकार मुझे और हम सब को बतौर दर्शक पूछना चाहिए कि ‘‘क्या यह आईपीएल हमें गेंदबाजी में कोई उभरता खिलाड़ी दे सकता है।

निर्भीक इंडिया (लेखक नवनीत मिश्रा संपादक) – आईपीएल साल दर साल अपनी वह आभा खो रहा है, जिसके लिए आईपीएल को विश्व में पहचाना जाता है। आईपीएल में ऐसा नही है, कि इस साल (IPL 2024) केवल बल्लेबाजों का धौंस चल रहा है, इससे पहले के सीजन में देखने को मिला था, परन्तु उसको कोई इतना आसानी से पीछा कर ले यह नही हुआ था। आईपीएल 2024 (IPL 2024) क्रिकेट के उस सिद्धांत को भूल गया कि यह खेल तभी रोचक होता है, जब खेल के तराजु का पलड़ा दोनो ओर समान रहे।
आईपीएल 2024 (IPL 2024) क्यों हो रहा है, विफल
आप यदि आईपीएल को फॉलो करते है, तो आप के लिए यह समझना कही से भी कोई रॉकेट साइंस नहीं होने वाला है। यदि आपको आईपीएल देखने को नही मिल पा रहा होगा तो जब भी स्कोर कार्ड चेक करते होगें तो देखते होगें कि 20 ओवर में लगभग 260 या 275 रन बन गये और फिर इन रनों का पीछा भी हो गया।
अगल आप ने मैच लाइव नहीं देखा है तो, आप के दिमाग में इसको लेकर कई सवाल उठते होगे कि, 20 ओवर में इतने रन बनें, शायद टीम में बल्लेबाजी बेहतर होगा। दूसरा सवाल उठता होगा यार टीम के गेंदबाज कैसे है जो इतने रन बनावा भी दे रहे और उसकी रक्षा भी नहीं कर पा रहे है, लेकिन क्या आप मात्र स्कोर कार्ड से यह बता सकते है, कि गेंदबाजों को मिलने वाली पस्थितियों को देखा है? क्या टीम के बल्लेबाजो के बल्लेबाजी कौशल को देखा है? क्या एनरिक नोर्किया, पैट कमिंस, मिचेल स्टार्क, भुवनेश्वर कुमार, दीपक चाहर, या खुद बुमराह कितनों का नाम गिवाना पड़ेगा यह खराब गेंदबाज है।
पंजाब किंग्स बनाम केकेआर का मैच देखा। इस मैच में केकेआर ने 20 ओवर में 261 रन बना दिया। इसी मैच के दूसरी पारी में रनों का पीछा करने उतरी पंजाब किंग्स ने यह रन 18.4 ओवर में 262 रन महज 2 विकेट खोकर बना दिया। इस मैच में मात्र 40 ओवर में कुल 523 रन बन गये और इस दौरान दोनो टीमों को मिला कर गिर विकेट की संख्या मात्र 8 ही था। यह एक मात्र मैच नही था। यदि आप आईपीएल 2024 (IPL 2024) के विगत मैच देखेगें तो आप यह पायेंगें कि एक-दो मैच को छोड़ दे तो लगभग सभी मैच का औसत स्कोर ही लगभग 185-190 के बीच रहा है।
आईपीएल 2024 (IPL 2024) में ऑरेंज कैंप विराट कोहली के पास है। विराट ने 430 रनो के साथ इस सूची के टॉप है। जब आप पर्पल कैंप की ओर देखते है, तो यहॉ पर पर्पल कैंप पर दावा जसप्रीत बुमराह का है, जिन्होनें 9 मैचों में 14 विकेट लिए है। अब सवाल यह है, कि यदि आईपीएल में गेंद बल्ले के बीच प्रतियोगिता इतनी असन्तुलित हो जायेगा तो, वह अपना चमक कितना दिन तक मनोरंजक होने वाला है।
जब आप मैच को लाइव देखते है, और आप ने कभी भी सीजन बॉल क्रिकेट खेला है, और क्रिकेट के तकनीक को जानते है, तो यह पाया होगा कि, बल्लेबाज केवल ‘‘हैड एंड आई’’ जिसका अर्थ ‘‘देखों और प्रहार करों’’ की नीति तहत खेल रहे है। वह गेंद देखते है और उससे बल्ले को मिलाने के लिए तेजी से उस पर प्रहार करते है। आप ने गौर किया होगा, बल्लेबाज गेंद को खेलने के लिए अपने पैर नही चलाते है। जब गेंद हल्की से भी सीम या स्वींग होती है, तो वह बेबस दिखाई देते है।
इस आईपीएल में मिचेल स्टार्क को करन शर्मा ने 3 छक्के लगातार मारें। वह मिचेल स्टार्क जिसके सामने विदेशी पिचों पर खेलने में हवाईयाँ उड़ जाती है। उसको बस बल्ला भाज कर छक्के मारे जा रहे है। यही हाल एनरिक नोर्किया का है यही हाल कगिसो रबाडा का है। यह वह है, जो लाल गेंद या जहाँ पिच खेल को बराबर करती है, वहाँ यह बल्लेबाज बचते दिखाई देते है।
गेंदबाजों के इस हालात के जिम्मेदार
- आईपीएल को पूरी तरह से बल्लेबाजों का खेल बनाया जा रहा है। आईपीएल में केवल और केवल बल्लेबाजी को ध्यान में रखकर नियम बनाया जा रहा है।
- भारतीय पिचों को स्लो, बनाया जा रहा है। भारतीय पिचों में उचित मात्रा में पानी नही डाला जाता है। पिचों को एक सड़क के समान मजबूत बनाया जाता है, जिससे गेंद बल्ले पर आयें।
- सफेंद गेंद के भार में कमी भी एक और कारण बताया जाता है, कि जिससे गेंद जहॉ कम स्वींग होती या नहीं होती है, इसके साथ ही साथ जब बल्लेबाज उसको हवा में मारता है, तो वही काफी दूरी को तय करते है। हमें देखने में लगता है, कितना लम्बा छक्का है।
ऐसी स्थिती बनी रही, तो हम केवल ऐसे बल्लेबाज को उत्पन्न करेगें जो, ऐसे स्थिती में बेहतर होगें, लेकिन व वैश्विक परिस्थिती में जायेंगे। जहाँ गेंद स्वींग सींम होगी तो वह केवल अपने प्रदर्शन से निराश करेगें। टीम मैनजमेंट भी कुछ दिन साथ रखेगी, तकनीक सही न करने के बाद उस खिलाड़ी को अनुपयुक्त बता बाहर कर दिया जायेगा।
ऐसे आईपीएल का कोई फायदा नहीं क्योंकि यह आईपीएल कही से भी उत्पादक नही है। ना ही यह एक बल्लेबाज दे पायेंगा जो तकनीक से परिपूर्ण हो। ना ही कोई ऐसा गेंदबाज दे पायेंगा जो अपने स्वींग सींम या स्पिन से विकेट ले सके। बस बचने में लगे रहेगें। टीम इंडिया को भविष्य में इसका काफी नुकसान होगा।
एक समय था जब भारत में कपिल देव से पहले काफी चुने हुए नाम बतौर तेज गेंदबाज थे। तो इस दौरान टीम इंडिया के गेंदबाजी की शुरूवात स्पिनर करते थे। इसमें सुनील गावस्कर भी शामिल थे। सोचिए उस समय ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैड में होता था जब स्पिन मतलब कुछ नहीं था। क्या बीसीसीआई वही करना चाहती है इसका जवाब देना चाहिए।

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