भारतीय रेलवे अपने यात्रियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं और सुरक्षित सफर देने के लिए लगातार अपने बुनियादी ढांचे (Infrastructure) में बड़े बदलाव कर रहा है। इसी क्रम में, पूर्वोत्तर रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर (North Eastern Railway Infrastructure) को और अधिक सुदृढ़, आधुनिक और सुरक्षित बनाने के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक कदम उठाया गया है।

निर्भीक इंडिया (संवाददाता नवनीत मिश्रा)- रेलवे प्रशासन ने कानपुर सेंट्रल और कानपुर पुल (बायां किनारा) के बीच स्थित बेहद महत्वपूर्ण ‘ब्रिज संख्या 110’ पर बड़े इंजीनियरिंग और री-गर्डरिंग कार्य का फैसला लिया है। यह पुल उत्तर भारत के सबसे व्यस्त रेल मार्गों में से एक है।
इस पुराने पुल को आधुनिक और मजबूत बनाने के लिए 1 अप्रैल 2026 से लेकर 14 मई 2026 तक (लगभग 45 दिनों का) एक वृहद ‘ट्रैफिक एवं पावर ब्लॉक’ लिया जा रहा है। इस महा-ब्लॉक के कारण उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और गुजरात से आने-जाने वाली दर्जनों प्रमुख ट्रेनों का परिचालन बुरी तरह प्रभावित होगा।
पूर्वोत्तर रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर (North Eastern Railway Infrastructure): कानपुर सेंट्रल पर मेगा ब्लॉक
रेलवे का यह स्पष्ट मानना है कि वर्तमान की यह असुविधा भविष्य के सुरक्षित और तेज सफर की गारंटी है। इस कार्य के पूरा होने के बाद ट्रेनों का संरक्षित और तीव्रगामी संचालन (Safe and High-Speed Operation) पूरी तरह से सुनिश्चित हो सकेगा।
यात्रियों की सुविधा के लिए रेलवे ने एक विस्तृत एडवाइजरी जारी की है। इसमें ट्रेनों के शॉर्ट टर्मिनेशन/ओरिजिनेशन, नियंत्रण और मार्ग परिवर्तन (रूट डायवर्जन) की पूरी जानकारी दी गई है। आइए इस पूरे मेगा ब्लॉक और इससे होने वाले बदलावों को विस्तार से समझते हैं।
पूर्वोत्तर रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर (North Eastern Railway Infrastructure): इन ट्रेनों का सफर होगा आधा (शॉर्ट टर्मिनेशन)
इस 45 दिन के लंबे मेगा ब्लॉक के दौरान कई प्रमुख ट्रेनों को उनके गंतव्य (Destination) तक जाने की अनुमति नहीं होगी। पूर्वोत्तर रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर (North Eastern Railway Infrastructure) के विकास कार्य को सुचारू रूप से चलाने के लिए इन्हें बीच रास्ते में ही रोक दिया जाएगा (शॉर्ट टर्मिनेट) और वहीं से वापस (शॉर्ट ओरिजिनेशन) चलाया जाएगा।
कासगंज-लखनऊ जंक्शन सवारी गाड़ी: 01 अप्रैल से 13 मई 2026 तक चलने वाली 55346 कासगंज-लखनऊ जं. पैसेंजर ट्रेन अब लखनऊ जंक्शन नहीं जाएगी। यह गाड़ी अपनी यात्रा कानपुर अनवरगंज में ही समाप्त कर लेगी। वापसी में 02 अप्रैल से 14 मई तक 55345 लखनऊ जं.-कासगंज पैसेंजर लखनऊ की बजाय कानपुर अनवरगंज से ही प्रस्थान करेगी।
आगरा फोर्ट-लखनऊ जंक्शन एक्सप्रेस: 02 अप्रैल से 13 मई 2026 तक 12180 आगरा फोर्ट-लखनऊ जं. एक्सप्रेस लखनऊ की जगह कानपुर सेंट्रल में सुबह 10.50 बजे ही यात्रा समाप्त करेगी। वापसी में 12179 एक्सप्रेस (02 अप्रैल से 14 मई) लखनऊ जंक्शन की बजाय कानपुर सेंट्रल से शाम 17.25 बजे चलेगी।
पुणे-लखनऊ जंक्शन एक्सप्रेस: 12103 पुणे-लखनऊ जं. एक्सप्रेस (अप्रैल और मई की निर्धारित तिथियों पर) लखनऊ न जाकर कानपुर सेंट्रल (11.42 बजे) तक ही आएगी। इसी तरह 12104 लखनऊ-पुणे एक्सप्रेस भी लखनऊ की बजाय कानपुर सेंट्रल से शाम 18.00 बजे पुणे के लिए रवाना होगी।
वीरांगना लक्ष्मीबाई जं.-लखनऊ एक्सप्रेस: 11109 वीरांगना लक्ष्मीबाई जं.-लखनऊ जं. एक्सप्रेस (02 अप्रैल से 13 मई) कानपुर सेंट्रल पर 10.25 बजे रुक जाएगी। वापसी में 11110 एक्सप्रेस भी लखनऊ की बजाय कानपुर सेंट्रल से 18.20 बजे प्रस्थान करेगी।
यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे इन ट्रेनों में टिकट बुक करने से पहले अपना नया बोर्डिंग या डेस्टिनेशन स्टेशन (कानपुर सेंट्रल या अनवरगंज) जरूर चेक कर लें, क्योंकि लखनऊ और कानपुर के बीच ये ट्रेनें पूरी तरह से निरस्त रहेंगी।
पूर्वोत्तर रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर (North Eastern Railway Infrastructure): शताब्दी और संपर्क क्रांति जैसी दर्जनों ट्रेनों का रूट डायवर्जन
ब्रिज सं. 110 पर काम के चलते कानपुर-लखनऊ रूट सबसे ज्यादा प्रभावित होगा। इसके कारण दिल्ली, मुंबई और गुजरात से पूर्वांचल और बिहार जाने वाली लंबी दूरी की ट्रेनों के मार्ग में व्यापक परिवर्तन किया गया है। पूर्वोत्तर रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर (North Eastern Railway Infrastructure) की बेहतरी के लिए उठाया गया यह कदम कुछ समय के लिए यात्रियों का सफर थोड़ा लंबा जरूर करेगा।

दिल्ली रूट की ट्रेनों का डायवर्जन:
नई दिल्ली से लखनऊ जंक्शन आने वाली सबसे प्रीमियम ट्रेन 12004 शताब्दी एक्सप्रेस (02 अप्रैल से 13 मई) अपने तय मार्ग (गाज़ियाबाद-कानपुर सेंट्रल) के बजाय गाज़ियाबाद-मुरादाबाद के रास्ते चलेगी। इस कारण यह अलीगढ़, टूण्डला, इटावा और कानपुर सेंट्रल पर नहीं रुकेगी।
बरौनी और दरभंगा से नई दिल्ली जाने वाली विशेष गाड़ियां (02563 और 02569) अब बुढ़वल-लखनऊ-कानपुर की बजाय बुढ़वल-सीतापुर सिटी-शाहजहांपुर-बरेली-मुरादाबाद के रास्ते दिल्ली जाएंगी। ये ट्रेनें ऐशबाग और कानपुर सेंट्रल पर नहीं रुकेंगी। वापसी में (02564 और 02570) भी यही नया मुरादाबाद वाला रूट फॉलो किया जाएगा।
गुजरात और राजस्थान की ट्रेनों का डायवर्जन:
19615 उदयपुर सिटी-कामाख्या एक्सप्रेस कासगंज-कानपुर-लखनऊ के बजाय अब कासगंज-शाहजहांपुर-सीतापुर सिटी-बुढ़वल के रास्ते गोरखपुर जाएगी। यह फर्रुखाबाद, कन्नौज, कानपुर सेंट्रल, लखनऊ और अयोध्या जैसे अहम स्टेशनों पर नहीं जाएगी।
19053 सूरत-मुजफ्फरपुर एक्सप्रेस और 15270 साबरमती-मुजफ्फरपुर एक्सप्रेस अब कानपुर सेंट्रल-लखनऊ रूट को छोड़कर कानपुर सेंट्रल-प्रयागराज जं.-मिर्ज़ापुर-पं. दीन दयाल उपाध्याय जं.-पाटलिपुत्र के रास्ते बिहार (हाजीपुर/सोनपुर) पहुंचेंगी। इससे लखनऊ, अयोध्या, गोंडा और बस्ती के यात्रियों को असुविधा होगी।
09465 अहमदाबाद-दरभंगा विशेष गाड़ी भी लखनऊ रूट छोड़कर कानपुर-प्रयागराज-पाटलिपुत्र के रास्ते चलेगी।
महाराष्ट्र और दक्षिण भारत की ट्रेनों का डायवर्जन:
पूर्वोत्तर रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर (North Eastern Railway Infrastructure) के विकास कार्य का असर मुंबई और बेंगलुरु की ट्रेनों पर भी पड़ेगा।
- 11079 LTT-गोरखपुर एक्सप्रेस, 15066 पनवेल-गोरखपुर एक्सप्रेस, 12598 CSMT-गोरखपुर और 15030 पुणे-गोरखपुर एक्सप्रेस अब कानपुर-लखनऊ-बाराबंकी रूट से नहीं जाएंगी। इन सभी ट्रेनों को कानपुर सेंट्रल-प्रयागराज जं.-मां बेल्हा देवी धाम प्रतापगढ़-अयोध्या कैंट/अयोध्या धाम के रास्ते डायवर्ट किया गया है।
- बेंगलुरु से आने वाली 22534 और 15024 यशवंतपुर-गोरखपुर एक्सप्रेस भी लखनऊ नहीं जाएगी और प्रतापगढ़-अयोध्या के रास्ते गोरखपुर पहुंचेगी।
- 15046 ओखा-गोरखपुर एक्सप्रेस भी कानपुर-प्रयागराज-प्रतापगढ़ होकर गुजरेगी।
- पूर्वोत्तर रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर (North Eastern Railway Infrastructure): भविष्य का मजबूत रोडमैप
- इस 45 दिवसीय मेगा ब्लॉक से यात्रियों को भले ही तात्कालिक परेशानी हो रही हो, लेकिन यह रेलवे के आधुनिकीकरण का एक कड़वा मगर जरूरी घूंट है।
वर्तमान में पूर्वोत्तर रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर (North Eastern Railway Infrastructure) के तहत पूरे ज़ोन में कई महात्वाकांक्षी परियोजनाएं चल रही हैं। इनमें गोंडा कचहरी करनैलगंज नई लाइन (Gonda Kachehri Colonelganj New Line) बिछाने का कार्य जोरों पर है, जो इस पूरे बेल्ट को मुख्य धारा से जोड़ेगा।
इसके साथ ही, सीतापुर प्रयागराज रेल खंड (Sitapur Prayagraj Rail Section) पर पटरियों के दोहरीकरण और विद्युतीकरण का कार्य भी तेज गति से चल रहा है। पुराने और कमजोर ट्रैक को हटाकर उनकी जगह अत्याधुनिक और मजबूत कंक्रीट स्लीपर (Strong Concrete Sleeper) लगाए जा रहे हैं। ये नए स्लीपर भारी से भारी ट्रेनों का वजन आसानी से सह सकते हैं और ट्रेन के डिरेल (पटरी से उतरने) होने का खतरा लगभग खत्म कर देते हैं।
स्टेशनों की कार्यप्रणाली को पूरी तरह से ऑटोमेटिक बनाने के लिए इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग कार्य (Electronic Interlocking Work) युद्ध स्तर पर जारी है। इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग से ट्रेनों को सिग्नल देने की प्रक्रिया मानवीय भूलों से मुक्त हो जाती है, जिससे बालासोर जैसी रेल दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है।
यही कारण है कि रेलवे प्रशासन कानपुर में यह मेगा ब्लॉक ले रहा है। ब्रिज सं. 110 पर नया गर्डर पड़ने और मरम्मत के बाद, इस पुल से गुजरने वाली ट्रेनों की गति सीमा को बढ़ाया जा सकेगा। यह संरक्षित और तीव्रगामी संचालन (Safe and High-Speed Operation) की दिशा में एक बहुत बड़ा मील का पत्थर साबित होगा।
रेलवे प्रशासन ने सभी यात्रियों से यह विनम्र अपील की है कि वे 1 अप्रैल से 14 मई 2026 के बीच यात्रा करने से पहले 139 रेलवे हेल्पलाइन या NTES ऐप पर अपनी ट्रेन का करंट स्टेटस, बदला हुआ रूट और ठहराव स्टेशन अवश्य जांच लें। यह छोटी सी सावधानी आपको सफर के दौरान होने वाली बड़ी परेशानी से बचा सकती है। राष्ट्र निर्माण के इस अहम कार्य में रेलवे ने जनता से सहयोग की अपेक्षा की है।

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Navneet Mishra is a seasoned journalist currently associated with Nirbhik India and its digital portal, nirbhikindia.in. With over six years of experience across print and digital platforms, Navneet specializes in politics, sports, economics, and geopolitics.
A Master’s graduate in Mass Communication from Deen Dayal Upadhyay Gorakhpur University, he is also a dedicated media scholar. His academic research focuses on “the pivotal role of Gorakhpur’s Hindi newspapers during the Indian freedom struggle against the British Crown”. Before joining Nirbhik India, Navneet spent five years at Adarsh Jeevan and gained valuable field experience at Amar Ujala Gorakhpur as training reporter only for 5 days.
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नवनीत मिश्रा वर्तमान में ‘निर्भीक इंडिया’ मीडिया समूह से जुड़े हैं। उन्होंने दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया है। पत्रकारिता के अपने 6 वर्षों के सफर में उन्होंने प्रिंट और डिजिटल दोनों डेस्क पर काम किया है। उनके शोध का विषय ब्रिटिश शासन के खिलाफ गोरखपुर के अखबारों का योगदान रहा है, जो उनकी ऐतिहासिक समझ को दर्शाता है। वे राजनीति, अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय मामलों (Geopolitics) पर निरंतर लिखते रहे हैं। ‘आदर्श जीवन’ दैनिक में 5 साल का कार्यकाल और ‘अमर उजाला’ गोरखपुर में ट्रेनिंग रिपोर्टिंग के तौर पर मात्र 5 दिन काम क्या है उनकी लेखनी को और भी निखारता है।

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