एम्स गोरखपुर में राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा (25 अगस्त – 8 सितंबर 2025) के अवसर पर एक विशेष जागरूकता अभियान चलाया गया। एम्स की कार्यकारी निदेशक एवं सीईओ मेजर जनरल (डॉ.) विभा दत्ता, एसएम (सेवानिवृत्त) के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य नेत्रदान से जुड़ी भ्रांतियों को दूर कर जन-जन तक इसके महत्व को पहुंचाना था।

निर्भीक इंडिया संवाददाता (नवनीत मिश्र)- कार्यक्रम में नेत्र रोग विभाग ने पोस्टर प्रतियोगिता और एमबीबीएस 2023 के छात्रों ने एक प्रभावशाली नाटक प्रस्तुत किया, जिसने सभी का ध्यान आकर्षित किया।छात्रों द्वारा प्रस्तुत नाटक ने कॉर्निया दान से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियों को सरल और प्रभावी ढंग से साझा किया। नाटक के माध्यम से बताया गया कि नेत्रदान मृत्यु के बाद 6 से 8 घंटे के भीतर कर देना चाहिए।
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राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा में कॉर्निया दान पर जागरूकता
इसने इस बात पर भी जोर दिया कि नेत्रदान के लिए उम्र, लिंग, रक्त समूह या धर्म जैसी कोई सीमा नहीं होती। किसी भी व्यक्ति, चाहे उसे मोतियाबिंद हो, चश्मा लगा हो, या वह उच्च रक्तचाप और मधुमेह से पीड़ित हो, वह भी नेत्रदान कर सकता है।
नाटक में यह भी स्पष्ट किया गया कि यह प्रक्रिया बेहद सरल और त्वरित है, जिसमें केवल 15-20 मिनट लगते हैं। यह पूरी तरह से रक्तहीन होती है और दाता के चेहरे पर कोई विकृति नहीं आती। सबसे महत्वपूर्ण संदेश यह था कि नेत्रदान का संकल्प लेने के बाद, अपनी इस इच्छा के बारे में अपने परिवार के सदस्यों को अवश्य बताएं, ताकि वे आपकी इच्छा पूरी कर सकें।
राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा पर विशेषज्ञों ने बताया नेत्रदान का महत्व
कार्यक्रम में मौजूद विशेषज्ञों ने नेत्रदान और कॉर्निया दान की महत्ता पर प्रकाश डाला। नेत्र रोग विभाग के संकाय प्रभारी डॉ. अलका त्रिपाठी ने जोर देकर कहा कि मृतक के परिवार के सदस्यों को बिना देरी किए अस्पताल को सूचित करना चाहिए ताकि कॉर्निया को समय पर दान किया जा सके।
डॉ. नेहा सिंह और डॉ. अमित ने भारत में नेत्रदान की आवश्यकता पर चौंकाने वाले आँकड़े साझा किए। उन्होंने बताया कि हमारे देश में लगभग 11 लाख लोग कॉर्निया प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा कर रहे हैं और हर साल लगभग 25,000 नए मामले सामने आ रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि एक व्यक्ति का नेत्रदान दो दृष्टिहीन व्यक्तियों को आँखों की रोशनी दे सकता है।
डीन अकादमिक प्रो. डॉ. महिमा मित्तल ने लोगों को विभाग में उपलब्ध दान प्रपत्र भरने के लिए प्रोत्साहित किया, ताकि वे इस नेक कार्य में अपना योगदान दे सकें। वहीं, चिकित्सा अधीक्षक प्रो. डॉ. अजय भारती ने नेत्रदान के अलावा अनुसंधान के लिए पूरे शरीर के दान के महत्व पर भी बात की और सभी को इस नेक कार्य में आगे आने के लिए प्रेरित किया।
सम्मान और सामुदायिक पहुँच
कार्यक्रम में पहली कॉर्निया प्रत्यारोपण मरीज़ को भी सम्मानित किया गया। उन्होंने अपने विचार साझा करते हुए बताया कि वह इस प्रक्रिया और इसके परिणामों से बहुत खुश हैं, जिसने उनके जीवन को बदल दिया है। इस पहल से नेत्रदान की सफलता और सकारात्मक परिणाम का एक जीवंत उदाहरण सामने आया।
जागरूकता फैलाने के लिए, पोस्टर प्रतियोगिता भी आयोजित की गई, जिसका मूल्यांकन प्रो. डॉ. अजय भारती और प्रो. डॉ. महिमा मित्तल ने किया। विजेताओं को पुरस्कार भी दिए गए। इसके अतिरिक्त, विभाग की टीम ने ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता बढ़ाने के लिए शिवपुर और डुमरी-खास का सामुदायिक दौरा भी किया, जिससे नेत्रदान पखवाड़ा का संदेश दूर-दराज के लोगों तक भी पहुँचा।
यह आयोजन एम्स गोरखपुर की जन-कल्याण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है और यह उम्मीद जगाता है कि जागरूकता और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से कॉर्निया से जुड़ी दृष्टिहीनता को समाप्त किया जा सकता है।

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