संविधान सभा व बी आर अंबेडकर की ऐतिहासिक चूक
प्रस्तावना – वर्ष 1948 में जब स्वतंत्र भारत का संविधान अपने अंतिम स्वरूप की ओर अग्रसर था, तब संविधान सभा के केंद्रीय कक्ष और बंद कमरों में स्वतंत्र भारत की लोकतांत्रिक संरचना पर ऐतिहासिक बहस चल रही थी। इस गहन चिंतन का एक अत्यंत संवेदनशील विषय यह था कि लोकतांत्रिक भारत में ‘प्रेस’ की भूमिका…
