गोरखपुर में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने और मरीजों को सुरक्षित चिकित्सा सुविधा प्रदान करने के उद्देश्य से स्वास्थ्य महकमा पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। एक ओर जहाँ सरकारी और निजी अस्पतालों के ऑपरेशन थियेटर (ओटी) में संक्रमण से बचाव पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

निर्भीक इंडिया (संवाददाता)- वहीं दूसरी ओर जिले में टीबी मरीज गोद लेने की योजना यूपी (TB Patient Adoption Scheme UP) के तहत भी अभूतपूर्व कार्य हो रहे हैं। स्वास्थ्यकर्मी खुद आगे आकर मरीजों को नया जीवन दे रहे हैं। निर्भीक इंडिया की इस विस्तृत ग्राउंड रिपोर्ट में जानिए कि कैसे स्वास्थ्य विभाग आम जनमानस की सुरक्षा और बेहतर इलाज के लिए कड़े कदम उठा रहा है।
TB Patient Adoption Scheme UP : ऑपरेशन थियेटर में संक्रमण पर जीरो टॉलरेंस
मरीजों के जीवन और उनके स्वास्थ्य भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए गोरखपुर स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई (Gorakhpur Health Department Action) लगातार तेज हो रही है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. राजेश झा ने बृहस्पतिवार को स्वयं मोर्चा संभालते हुए चार अलग-अलग अस्पतालों का औचक निरीक्षण किया।
उन्होंने जिला अस्पताल की आई ओटी (Eye OT), जिला महिला अस्पताल गोरखपुर (District Women’s Hospital Gorakhpur) की गाइनी (Gynae) ओटी और दो निजी अस्पतालों की आई ओटी का सघन जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने ओटी प्रभारियों को अस्पताल संक्रमण नियंत्रण दिशानिर्देश (Hospital Infection Control Guidelines) के कड़ाई से पालन के सख्त निर्देश दिए। स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि गुणवत्तापूर्ण इंतजामों में कोई भी कमी या संक्रमण का कारक मिलने पर संबंधित अस्पताल के खिलाफ कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
TB Patient Adoption Scheme UP : विभागीय मॉनिटरिंग
ऑपरेशन के दौरान किसी भी प्रकार का संक्रमण मरीजों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। इसी गंभीरता को समझते हुए ग्रामीण क्षेत्रों के दर्जनों अस्पतालों में भी अलग-अलग टीमों द्वारा निजी अस्पतालों की ओटी की सघन जांच की जा चुकी है। निरीक्षण के दौरान जहां कहीं भी मानक के विपरीत कमियां मिल रही हैं, उन अस्पतालों को कड़ी चेतावनी दी जा रही है।
सीएमओ ने सरकारी अस्पतालों के प्रभारियों को यह भी निर्देशित किया है कि संक्रमण नियंत्रण के लिए आवश्यक सामग्रियों की यदि कोई कमी है, तो तत्काल सूचना दें ताकि यथाशीघ्र प्रबंध किया जा सके। इस महत्वपूर्ण निरीक्षण अभियान में एसीएमओ डॉ एके चौधरी (ACMO Dr AK Chaudhary) भी सीएमओ के साथ प्रमुखता से मौजूद रहे।
TB Patient Adoption Scheme UP : टीबी मरीजों को मिल रहा नया जीवन
संक्रमण नियंत्रण के इन कड़े कदमों के साथ-साथ जिले में टीबी मुक्त भारत अभियान गोरखपुर (TB Mukt Bharat Abhiyan Gorakhpur) को भी नई ऊर्जा मिल रही है। सीएमओ डॉ. राजेश झा की प्रेरणा से स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी टीबी मरीजों की मदद के लिए स्वयं आगे आ रहे हैं।
इसी उत्कृष्ट श्रृंखला में, बीआरडी मेडिकल कॉलेज में तैनात एसटीएस (STS) अमित नारायण मिश्रा ने एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। उन्होंने अपनी माता स्व. विजेश्वरी देवी की पुण्यतिथि के अवसर पर बृहस्पतिवार को दो टीबी मरीजों को गोद लिया। टीबी मरीज गोद लेने की योजना यूपी (TB Patient Adoption Scheme UP) के अंतर्गत श्री मिश्र अब तक 16 मरीजों को गोद ले चुके हैं, जिनमें से 10 मरीज पूरी तरह से स्वस्थ होकर सामान्य जीवन जी रहे हैं। यह पहल समाज के अन्य वर्गों के लिए भी एक बड़ा और सकारात्मक संदेश है।

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Navneet Mishra is a seasoned journalist currently associated with Nirbhik India and its digital portal, nirbhikindia.in. With over six years of experience across print and digital platforms, Navneet specializes in politics, sports, economics, and geopolitics.
A Master’s graduate in Mass Communication from Deen Dayal Upadhyay Gorakhpur University, he is also a dedicated media scholar. His academic research focuses on “the pivotal role of Gorakhpur’s Hindi newspapers during the Indian freedom struggle against the British Crown”. Before joining Nirbhik India, Navneet spent five years at Adarsh Jeevan and gained valuable field experience at Amar Ujala Gorakhpur as training reporter only for 5 days.
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नवनीत मिश्रा वर्तमान में ‘निर्भीक इंडिया’ मीडिया समूह से जुड़े हैं। उन्होंने दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया है। पत्रकारिता के अपने 6 वर्षों के सफर में उन्होंने प्रिंट और डिजिटल दोनों डेस्क पर काम किया है। उनके शोध का विषय ब्रिटिश शासन के खिलाफ गोरखपुर के अखबारों का योगदान रहा है, जो उनकी ऐतिहासिक समझ को दर्शाता है। वे राजनीति, अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय मामलों (Geopolitics) पर निरंतर लिखते रहे हैं। ‘आदर्श जीवन’ दैनिक में 5 साल का कार्यकाल और ‘अमर उजाला’ गोरखपुर में ट्रेनिंग रिपोर्टिंग के तौर पर मात्र 5 दिन काम क्या है उनकी लेखनी को और भी निखारता है।

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