विश्व पर्यावरण दिवस (World Environment Day) के अवसर पर निर्भीक इंडिया ने एक रिपोर्ट को प्रकाशित और प्रसारित करने हेतु गोरखपुर में पेड़ों की स्थिती रख रखाव को कवर किया गया। इस कवरेज में जो दिखा वह यह कहने के लिए काफी है कि ‘‘क्रांक्रीट का मरूस्थल’’ बनने की ओर गोरखपुर अग्रसर है।

निर्भीक इंडिया (संवाददाता)- निर्भीक इंडिया की ओर से विश्व पर्यावरण दिवस (World Environment Day) पर रिपोर्ट अलग-अलग सड़क मार्गो में कई श्रृखंला में प्रकाशित किया जा रहा है। पहले श्रृखंला में हम गोरखपुर के असुरन चौक सड़क, पिपराइज, और बिछिया को कवर किया।
विश्व पर्यावरण दिवस (World Environment Day): असुरन चौक महराजगंज सड़क (Asuran Chowk Maharajganj Road) पर पेड़ पौधो की स्थिती
इस कवरेज के दौरान ना सिर्फ बड़े व स्वदेशी भारतीय पेड़ जिसमें पाकड़, पीपल और बगरद जैसे और इसके समान ही छायादार और आक्सीजन वाले पेड़ नही दिखे और जो दिखे वह सूखते दिखाई दिये।
निर्भीक इंडिया संवाददाता ने जब गोरखपुर के असुरन चौक पर पेड़ों की स्थिती का जायजा लिया तो पाया कि, यहा बड़े छायादार और आक्सीजन देने वाले भारतीय स्वदेशी पेड़ नही थे।
हाल में ही असुरन चौक से शुरू होने वाले फोरलेने हाइवे का निर्माण किया गया। यह फोरलेन सड़क आगे परतावल, महराजगंज और निचलौल को जोड़ती है। इस सड़क के बीचों बीच डिवाइडर पर खजूर के पेड़ श्रृखलाबद्ध करके लगाया गया है।
जब हमने इस पेड़ की स्थिती का जायजा लिया तो पाया कि, पेड़ की स्थिती खराब थी। कई खजूर के पेड़ सूख चुके थे। इसी दौरान हमने यह भी पाया कि कई पेड़ ऐसे भी थे जिनको उसी डिवाइड में लगाया गया था लेकिन वह भी धीरे-धीरे सूखने लगे थे।
असुरन पिपराईज सड़क (Asuran Pipraiz Road) पर पेड़ पौधे की स्थिती
जैसे हमने चलते हुए असुरन महराजगंज सड़क (Asuran Chowk Maharajganj Road) पर कवरेज किया उसी प्रकार हमारे संवाददाता ने असुरन पिपराईज मार्ग (Asuran Pipraiz Road) की भी कवरेज किया। असुरन महराजगंज मार्ग की तुलना में यहा पर अच्छे छायादार पेड़ दिखाई दिये।
इस मार्ग पर काफी छायादार पेड़ थे। इस पेड़ के नीचे छोटे व्यवसाई अपने व्यवसाय लगा बैठे थे, जो कि असुरन महराजगंज मार्ग (Asuran Chowk Maharajganj Road) पर नही दिखाई दे रहा था। इस क्षेत्र को लेकर आप को बता दें कि यदि जैसा स्थानीय जनता बता रही है उस प्रकार से असुरन महराजगंज की तरह सड़क निर्माण हुआ तो यह भी हरियाली अगले वर्ष विश्व पर्यावरण दिवस पर नही दिखेगा।
पेड़ो के कटान पर लोगो की प्रतिक्रिया
पेड़ो के कटान और सूखते खजूर के पेड़ों पर जब निर्भीक इंडिया संवाददाता ने लोगो की राय जाननी चाही तो उसमें एक युवा ने कहा कि गोरखपुर प्रशासन न तो पानी देता है और न ही देखभाल करता है।
एक बुजुर्ग ने हमसे बात की और कहा कि सरकार पेड़ काट रही है लेकिन सड़क निर्माण के बाद पेड़ नही वापस लगा रही है। उन्होने कहा खजूर के पेड़ से क्या होगा। उन्होने जोड़ा कुदरत के साथ सरकार को खेलवाड़ करना भारी पड़ेगा।
पिपराईज मार्ग पर दुकानदार से बात किया जो कि एक बड़े छायेदार पेड़ के नीचे अपना व्यवसाय लगाये हुए थे। उन्होने कहा कि यह भी पेड़ कट जायेगा आप रोकियें। वही एक और व्यवसायी से बात किया जो कि नीम के पेड़ के नीचे बैठा हुआ था कहा देखिए व पेड पर मार्किग हो चुकी है यह भी काट देंगें।
विश्व पर्यावरण दिवस (World Environment Day) को लेकर हमारी पहली कवरेज श्रृखंला में जो हमे दिखा और कैमरे में कैद हुआ यह देख कर यह कहा जाये कि, गोरखपुर क्रांकीट का मरूस्थल बनने के ओर अग्रसर है। सरकार ने यहा सतत् विकास को सीधा सीधा नजर अंदाज किया है।

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