जिले को जानलेवा टीबी की बीमारी से पूरी तरह से मुक्त करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने एक बेहद व्यापक और ऐतिहासिक कदम उठाया है। शासन के कड़े निर्देशों के क्रम में जिले भर में 100 दिवसीय टीबी मुक्त अभियान (100 Days TB Free Campaign) बहुत ही जोरों-शोरों से शुरू कर दिया गया है।

100 दिवसीय टीबी मुक्त अभियान (100 Days TB Free Campaign) का शंखनाद, स्वास्थ्य विभाग हुआ अलर्ट
इस महा-अभियान को शत-प्रतिशत सफल बनाने के लिए बृहस्पतिवार को सीएमओ डॉ राजेश झा (CMO Dr Rajesh Jha) ने एक अहम और रणनीतिक बैठक की। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग वर्चुअल मीटिंग (Health Department Virtual Meeting) के जरिए जिले के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएचओ) का अभिमुखीकरण कर उन्हें जरूरी दिशा-निर्देश दिए।
यह 100 दिन का स्वास्थ्य अभियान (100 Days Health Campaign) मुख्य रूप से 8 अप्रैल से पूरे जिले में शुरू हो चुका है और आगामी जुलाई माह तक अनवरत चलेगा। इस दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीमें गांव-गांव जाकर घर-घर सर्वे कर रही हैं और संभावित मरीजों की सघन पहचान कर रही हैं।
इस वृहद टीबी रोगियों की खोज अभियान (TB Patients Search Campaign) का मुख्य लक्ष्य उन छिपे हुए मरीजों को खोजना है जो अशिक्षा के कारण अपना इलाज नहीं करा पाते हैं। सही समय पर टीबी के लक्षण और मुफ्त इलाज (TB Symptoms and Free Treatment) की जानकारी देकर समाज में संक्रमण फैलने का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकेगा।
100 दिवसीय टीबी मुक्त अभियान (100 Days TB Free Campaign): आयुष्मान शिविरों में मिलेंगी हाई-टेक सुविधाएं
इस व्यापक अभियान के अंतर्गत ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में विशेष रूप से आयुष्मान आरोग्य शिविर (Ayushman Arogya Shivir) लगाए जा रहे हैं। इन शिविरों का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण जनता को उनके घर के बिल्कुल पास ही उच्च स्तरीय और निःशुल्क स्वास्थ्य सुविधाएं आसानी से प्रदान करना है।
इन शिविरों में आने वाले मरीजों के लिए सबसे बड़ी सुविधा एआई एक्स-रे से टीबी जांच (TB Screening via AI X-Ray) की उपलब्ध कराई जा रही है। इस पोर्टेबल और अत्याधुनिक मशीन के इस्तेमाल से बीमारी की पहचान मिनटों में और बिल्कुल सटीक हो जाती है, जिससे तत्काल इलाज शुरू हो सके।
टीबी की बीमारी के साथ-साथ इन कैंपों में गैर-संचारी रोगों (एनसीडी) की स्क्रीनिंग पर भी विभाग द्वारा विशेष जोर दिया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को आयुष्मान कैंप शुगर बीपी जांच (Ayushman Camp Sugar BP Checkup) की सुविधा बिल्कुल मुफ्त दी जा रही है, जो एक सराहनीय कदम है।
इसके अतिरिक्त, अन्य गंभीर बीमारियों के मरीजों के जांच और आवश्यक परामर्श के लिए मोबाइल मेडिकल यूनिट सेवाएं (Mobile Medical Unit Services) भी एमएमयू (MMU) के जरिए इन शिविरों में प्रदान की जा रही हैं। सरकार का लक्ष्य है कि कोई भी गरीब और जरूरतमंद मरीज उचित इलाज से वंचित न रहे।

100 दिवसीय टीबी मुक्त अभियान (100 Days TB Free Campaign) को सफल बनाने में सीएचओ की अहम भूमिका
बैठक के दौरान सीएमओ ने स्पष्ट किया कि ग्रामीण स्वास्थ्य में सीएचओ की भूमिका (Role of CHO in Rural Health) इस पूरे अभियान में सबसे अधिक महत्वपूर्ण और निर्णायक साबित होने वाली है। उन्होंने सख्त निर्देश दिए कि सीएचओ अपने क्षेत्र में लगने वाले इन आरोग्य शिविरों में अनिवार्य रूप से प्रमुखता से हिस्सा लें।
अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए गए हैं कि वे आशा और एएनएम कार्यकर्ताओं के माध्यम से गांव में समुदाय की ज्यादा से ज्यादा भागीदारी सुनिश्चित कराएं। किसी भी व्यक्ति में बीमारी के संकेत दिखने पर, लक्षणयुक्त मरीजों की बलगम जांच हर हाल में और सर्वोच्च प्राथमिकता पर होनी चाहिए।
इस 100 दिवसीय टीबी मुक्त अभियान (100 Days TB Free Campaign) के बारे में गांव में पहले से ही मुनादी और अन्य माध्यमों से व्यापक प्रचार-प्रसार कराया जाना चाहिए। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि जागरूकता से ही अधिकाधिक लोग इन शिविरों का पूरा लाभ उठाने के लिए स्वयं आगे आएंगे।
सीएमओ ने कहा कि अगर सभी स्वास्थ्य कार्यकर्ता और अधिकारी पूरी निष्ठा से अपना योगदान देंगे, तो गोरखपुर जिले को टीबी मुक्त बनाने की राह बेहद आसान हो जाएगी। इस महत्वपूर्ण अभिमुखीकरण कार्यक्रम में जिले के डीसीपीएम रिपुंजय पांडेय सहित कई वरिष्ठ ब्लॉक स्तरीय अधिकारी भी प्रमुखता से मौजूद रहे।

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Navneet Mishra is a seasoned journalist currently associated with Nirbhik India and its digital portal, nirbhikindia.in. With over six years of experience across print and digital platforms, Navneet specializes in politics, sports, economics, and geopolitics.
A Master’s graduate in Mass Communication from Deen Dayal Upadhyay Gorakhpur University, he is also a dedicated media scholar. His academic research focuses on “the pivotal role of Gorakhpur’s Hindi newspapers during the Indian freedom struggle against the British Crown”. Before joining Nirbhik India, Navneet spent five years at Adarsh Jeevan and gained valuable field experience at Amar Ujala Gorakhpur as training reporter only for 5 days.
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नवनीत मिश्रा वर्तमान में ‘निर्भीक इंडिया’ मीडिया समूह से जुड़े हैं। उन्होंने दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया है। पत्रकारिता के अपने 6 वर्षों के सफर में उन्होंने प्रिंट और डिजिटल दोनों डेस्क पर काम किया है। उनके शोध का विषय ब्रिटिश शासन के खिलाफ गोरखपुर के अखबारों का योगदान रहा है, जो उनकी ऐतिहासिक समझ को दर्शाता है। वे राजनीति, अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय मामलों (Geopolitics) पर निरंतर लिखते रहे हैं। ‘आदर्श जीवन’ दैनिक में 5 साल का कार्यकाल और ‘अमर उजाला’ गोरखपुर में ट्रेनिंग रिपोर्टिंग के तौर पर मात्र 5 दिन काम क्या है उनकी लेखनी को और भी निखारता है।

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