गोरखपुर पुलिस न्यूज़ (Gorakhpur Police News) में आज एक बहुत बड़ी और अहम सफलता दर्ज हुई है। खोराबार पुलिस ने शहर में दहशत का पर्याय बन चुके एक बेहद शातिर सीरियल क्रिमिनल गोरखपुर (Serial Criminal Gorakhpur) को गिरफ्तार किया है। यह अपराधी कोई आम चोर नहीं, बल्कि 1997 से अपराध की दुनिया में (In the World of Crime Since 1997) सक्रिय एक खूंखार पेशेवर नकबजन है।

गोरखपुर ज्वेलरी चोरी (Gorakhpur Jewelry Theft): 16 मुकदमों वाला सीरियल क्रिमिनल गिरफ्तार
इस शातिर अपराधी की गिरफ्तारी से हाल ही में हुई गोरखपुर ज्वेलरी चोरी (Gorakhpur Jewelry Theft) का बड़ा खुलासा हुआ है। यह घटना थाना खोराबार न्यूज़ (Thana Khorabar News) में काफी दिनों से चर्चा का विषय बनी हुई थी, क्योंकि चोर ने बड़ी ही सफाई से एक सर्राफा व्यापारी को लाखों का चूना लगाया था।
खोराबार पुलिस (Khorabar Police) ने इस शातिर हरिशंकर जायसवाल गोरखपुर (Harishankar Jaiswal Gorakhpur) को गिरफ्तार कर उसके पास से चोरी का भारी माल और नकदी बरामद की है। यह खोराबार पुलिस की सफलता (Success of Khorabar Police) का ही परिणाम है कि शहर के कई व्यापारियों ने अब राहत की सांस ली है।
हरिशंकर जायसवाल पर पुलिस रिकॉर्ड में एक-दो नहीं, बल्कि पूरे 16 मुकदमों वाला अपराधी (Criminal with 16 Cases) होने का तमगा लगा है। उसकी इस खोराबार पुलिस गिरफ्तारी (Khorabar Police Arrest) ने गोरखपुर सर्राफा चोरी (Gorakhpur Sarrafa Theft) के उस खौफनाक तरीके को भी उजागर किया है, जिससे वह लगातार पुलिस को चकमा दे रहा था।
गोरखपुर ज्वेलरी चोरी (Gorakhpur Jewelry Theft): कैसे लगाता था दुकान में नकब?
दिनांक 2 अप्रैल 2026 की उस काली रात को वादी की ज्वैलर्स की दुकान में एक बड़ी चोरी हुई। गोरखपुर का शातिर चोर (Vicious Thief of Gorakhpur) हरिशंकर जायसवाल बहुत ही पेशेवर और फिल्मी अंदाज में इस गोरखपुर ज्वेलरी चोरी (Gorakhpur Jewelry Theft) को अंजाम देने पहुंचा था।
कैसे लगाता था दुकान में नकब (How He Burglared the Shop)? इस सवाल का जवाब पुलिस को उसके पास से मिले ‘दो लोहे के आला नकब’ (सेंधमारी के औजार) से मिल गया है। वह रात के अंधेरे में दुकानों की पक्की दीवारों में बहुत ही खामोशी से सेंध लगाकर अंदर घुसता था और चंद मिनटों में ही पूरी दुकान का सफाया कर देता था।
उस रात भी उसने इसी तरीके से सर्राफा दुकान में सेंधमारी कर सोने-चांदी के कीमती जेवरात उड़ा लिए थे। घटना के तुरंत बाद पुलिस ने बीएनएस की धारा 331(4) और 305(ए) के तहत मामला दर्ज कर इस खतरनाक नकबजन की सरगर्मी से तलाश शुरू कर दी थी।

गोरखपुर ज्वेलरी चोरी (Gorakhpur Jewelry Theft): 16 मुकदमों वाला अपराधी और बरामदगी
खोराबार पुलिस ने जब इस शातिर का इतिहास खंगाला तो वे भी हैरान रह गए। हरिशंकर जायसवाल (निवासी रामपुरा बाजार, झंगहा) का पुलिस की फाइलों में 29 सालों से अपराध और पुलिस की लुकाछिपी (Crime and Police Hide and Seek) का लंबा खेल चल रहा था।
1997 में पहली बार उस पर चोरी (धारा 457) और एनडीपीएस एक्ट का मुकदमा दर्ज हुआ था। उसके बाद उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा। उस पर गुंडा एक्ट, आर्म्स एक्ट, अवैध शराब (आबकारी अधिनियम) और कैंट, शाहपुर और झंगहा थानों में चोरी के कुल 16 संगीन मुकदमे दर्ज हैं।
इस अहम गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने उसके पास से भारी मात्रा में चोरी का सोना बरामद (Stolen Gold Recovered) किया है। पुलिस ने उसके कब्जे से 8 जोड़ा सफेद धातु की पायल, 75 जोड़ा बिछिया, 1 पीली धातु की अंगूठी और 1 नथ (पीली धातु) बरामद की है।
साथ ही, चोरी के कुछ जेवरात बेचने से मिली 5,200 रुपये की नकद राशि और वारदात में इस्तेमाल की गई मोटरसाइकिल भी जब्त की गई है। इस बड़ी रिकवरी ने इस गोरखपुर ज्वेलरी चोरी (Gorakhpur Jewelry Theft) मामले को पूरी तरह से सुलझा दिया है और पुलिस अब उसके अन्य साथियों की तलाश कर रही है।

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Navneet Mishra is a seasoned journalist currently associated with Nirbhik India and its digital portal, nirbhikindia.in. With over six years of experience across print and digital platforms, Navneet specializes in politics, sports, economics, and geopolitics.
A Master’s graduate in Mass Communication from Deen Dayal Upadhyay Gorakhpur University, he is also a dedicated media scholar. His academic research focuses on “the pivotal role of Gorakhpur’s Hindi newspapers during the Indian freedom struggle against the British Crown”. Before joining Nirbhik India, Navneet spent five years at Adarsh Jeevan and gained valuable field experience at Amar Ujala Gorakhpur as training reporter only for 5 days.
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नवनीत मिश्रा वर्तमान में ‘निर्भीक इंडिया’ मीडिया समूह से जुड़े हैं। उन्होंने दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया है। पत्रकारिता के अपने 6 वर्षों के सफर में उन्होंने प्रिंट और डिजिटल दोनों डेस्क पर काम किया है। उनके शोध का विषय ब्रिटिश शासन के खिलाफ गोरखपुर के अखबारों का योगदान रहा है, जो उनकी ऐतिहासिक समझ को दर्शाता है। वे राजनीति, अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय मामलों (Geopolitics) पर निरंतर लिखते रहे हैं। ‘आदर्श जीवन’ दैनिक में 5 साल का कार्यकाल और ‘अमर उजाला’ गोरखपुर में ट्रेनिंग रिपोर्टिंग के तौर पर मात्र 5 दिन काम क्या है उनकी लेखनी को और भी निखारता है।

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