दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Delhi Chief Minister Arvind Kejeriwal) को लेकर ड्रामा की कोई कमी नहीं है। हाल ही में उनकी सरकार (AAP Government) ने एक बार फिर विधानसभा में विश्वास मत मांगा. 70 में से 62 विधायकों के साथ मजबूत बहुमत होने के बावजूद, केजरीवाल ने अब तीसरी बार विश्वास मत मांगा है। यह कदम उन आरोपों के बीच आया है कि भाजपा (BJP) ने सरकार गिराने के लिए अपने विधायकों को 25-25 करोड़ रुपये की रिश्वत देने का प्रयास किया है।

इन दावों के बावजूद, सात या 17 विधायकों के दलबदल की स्थिति में भी, केजरीवाल सरकार (Kejeriwal Government) को समर्थन खोने की संभावना से कोई खतरा नहीं है। दिल्ली पुलिस ने केजरीवाल की पार्टी से कथित रिश्वतखोरी के प्रयासों के संबंध में एक औपचारिक शिकायत दर्ज करने का आग्रह किया है, जिसमें विशिष्ट विवरण जैसे पैसे की पेशकश करने वाले व्यक्ति का नाम या संचार के लिए इस्तेमाल किया गया फोन नंबर शामिल हो।
जानिए आप सरकार (AAP Government) के इस कदम के पीछे की पृष्ठभूमि
हालाँकि, अभी तक, कोई सबूत प्रस्तुत नहीं किया गया है, और कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं की गई है। इस बीच, विधानसभा सत्रा के दौरान, बजट चर्चा स्थगित कर दी गई, जिसका ध्यान विश्वास मत की प्रस्तुति पर केंद्रित हो गया। चल रही गाथा दिल्ली के राजनीतिक परिदृश्य के भीतर राजनीतिक तनाव और चालों को रेखांकित करती है, जिसमें केजरीवाल की सरकार एक बार फिर ध्यान के केंद्र में है।
जैसा कि आप को पता होगा कि, दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार (AAP Government) ने दिल्ली को वह अभेद किला बना रखा है, जिसको पीएम मोदी ने न तो 2014 के कथित मोदी लहर व न तो 2019 के मोदी लहर के बाद भी विधानसभा के रूप में विजय के रूप अर्जित कर पाया है। उल्टा लगभग 25 साल से ज्यादा समय से दिल्ली एमसीडी पर राज करने वाले भाजपा को भी आम आदमी पार्टी ने सत्ता से उखाड़ फेंका था।
सबसे बड़ी परेशानी की समस्या आम आदमी पार्टी (AAM AADMI PARTY) व उसके संयोजक अरविंद केजरीवाल (ARVIND KEJERIWAL) के लिए यह बना हुआ है, कि कथित शराब घोटाला को लेकर अभी भी केन्द्रीय ऐजिन्सयाँ आम आदमी पार्टी के पीछे पड़ी हुई है। दिल्ली सरकार में शिक्ष मंत्राी रहे व केजरीवाल के सबसे करीबी रहे मनीष सिसोदिया (MANISH SISODIYA) को पहले ही प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इसी कथित घोटाले में अंदर कर चुकी है। इसके अलावा दिल्ली के पूर्व स्वास्थ्य मंत्राी को भी अंदर कर दिया गया है।
दिल्ली में स्थिती यह है, कि केन्द्रीय ऐजन्सियाँ लगातार नोटिस का बाउंसर मारे जा रही है और अरविंद केजरीवाल केवल टेस्ट मैच के बल्लेबाज की तरह उससे बच रहे है। अभी जो दिल्ली विधानसभा में हुआ उसका काफी अर्थ है, यह न केवल उसी से संबध रखता है, कि दिल्ली सरकार यह दिखानी चाहती है, हमारी सरकार सुरक्षित है वह यह बताना चाहती है, कि आप की जोड़ तोड़ का असर नहीं होगा।
यह कोई छुपा नहीं है, कि दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार केन्द्र की मोदी सरकार को घटकती है, और जब से यह सरकार दिल्ली में सरकार बनाई, तब से लेकर अब तक हमेशा केन्द्र उपराज्यपाल के माध्यम से काम में हस्तक्षेप किया है, और इसकों पिछले साल सुप्रीम कोर्ट (SUPREME COURT) ने अपने सुनवाई में दिल्ली सरकार की याचिका पर उपराज्यपाल व राज्य सरकार के कामों को बाँटा था, जिसको केन्द्र की सरकार ने तुरन्त अध्यादेश लाकर रोक लगा दिया था। यह सभी घटनाक्रम यह बताता है, कि केन्द्र की भाजपा सरकार दिल्ली राज्य की आप सरकार को काम करने के लिए पूर्ण स्वतंत्रा नही छोड़ रही है।
आप को यह यहाँ पर जानना चाहिए, कि दिल्ली एक ऐसी केन्द्रशासित राज्य है, जिसका अपना विधानसभा है और यहाॅ की जनता अपनी विधानसभा वाली सरकार को चुनती है। जब भी कोई राज्य केन्द्रशासित होती है, जिसकी अपनी विधानसभा हो और वहाॅ की जनता द्वारा उस विधानसभा के लिए विधायक चुनती है, तो ऐसे में संविधान की तीन सूर्ची सक्रिय हो जाती है जिसमें राज्य सूची, केन्द्र सूची व समवर्ती सूची। बस यहा विधायिका द्वारा जो भी भी कानून या विधेयक पास किया जाता है, उसमें केन्द्र हस्तक्षेप करता है यह कभी-कभी जानबूझ कर भी होता है, जिसका उदाहरण दिल्ली व दिल्ली बनाम केन्द्र विवाद है।

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