वर्ष 2022 के अंत से ही देश में सेमीकंडक्टर निर्माण व सेमीकंडक्टर हब (Semiconductor Hub) बनाने को लेकर कई खबरों ने हवा पकड़ी, जो ऐसा भी नहीं था कि हवा हवाई ही था। इसको लेकर हमें विकास देखने को मिला जब वर्ष 2023 की शुरूवात में यह खबर आई कि वेदांता (Vedanta) व फाॅक्सकान (Foxconn) मिलकर चिप विनिर्माण हेतु एक सेटअप को स्थापित करेंगी। याद है, जब वेदांता व फाॅक्सकान ने गुजरात सरकार के साथ मिलकर एक चिप विनिर्माण के लिए समझौता की आधिकारिक घोषणा किया तो लगा कि भारत की सेमीकंडक्टर की जरूरत पूरी होगी, हमें भी अब कम लागत में अच्छे लैपटाॅप व कम्प्यूटर हेतु चिप मिलेगा, सस्ते दाम पर ग्राफिक कार्ड मिलेगा रैम के अलावा आटो सेक्टर (Auto Sector) की भी जरूरत घरेलू उत्पादन ही पूर्ण करेगा और फिर निर्यात को देखा जायेगा।

यह सपना पूरा देश देख ही रहा था कि, खबर आती है, कि फाॅक्सकान और वेदांता ने अलग होने का निर्णय ले लिया है। देश में काफी निराशा रही। इसके बाद काफी खबर आई कि पीएम मोदी से नीदलैंड की सबसे बड़ी चिप विनिर्माण कंपनी के सीईओ मिले तो वही यह भी खबर आई कि एनवीडिया के भी मुखिया की पीएम मोदी से मुलाकाता हुई,
कहने को 2023 केवल इसी प्रकार के खबरों से ही भरा रहा परन्तु इस सभी पृष्ठभूमि को सुनने के बाद आप को लगता है, कि कुछ बेहतर 2024 भारतीय चिप विनिर्माण में होने वाला है तो ऐसा नही भारत की सेमींकंडक्टर हब (Semiconductor Hub) बनने की हवा में खुद यूएस की सूचना प्रौद्योगिकी और इनोवेशन फाउंडेशन (ITIF) ने एक रिपोर्ट के माध्यम से निकाली है, और ऐसे प्रयोजित खबरों की भी हवा निकाल दिया है।
यूएस की ऐजन्सी ने बताया भारत के सेमीकंडक्टर हब (Semiconductor Hub) बनने की सच्चाई
सूचना प्रौद्योगिकी और इनोवेशन फाउंडेशन (ITIF) की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 2029 तक 28-नैनोमीटर चिप्स का उत्पादन करने वाली अधिकतम पांच फैक्ट्रियां स्थापित होने की उम्मीद है। यह संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन में प्रगति के विपरीत है, जहां क्रमशः तीन-नैनोमीटर और पांच-नैनोमीटर चिप्स का उत्पादन चल रहा है। भारत को सेमीकंडक्टर महाशक्ति के रूप में स्थापित करने की आकांक्षा को एटीआईएफ जैसे प्रतिष्ठित थिंक टैंक से संदेह का सामना करना पड़ रहा है।
भारत सरकार की प्रतिबद्धता के बावजूद, सेमीकंडक्टर क्षेत्र में उतरने वाली कंपनियों को सब्सिडी के लिए 10 बिलियन डॉलर के पर्याप्त आवंटन के बावजूद, सेमीकंडक्टर विनिर्माण की प्रतिक्रिया धीमी बनी हुई है। सरकार की योजना चिप निर्माण सुविधाएं स्थापित करने वाली विदेशी कंपनियों के शुरुआती निवेश का दो-तिहाई हिस्सा इन कंपनियों को मिलने वाले सभी मुनाफे से कवर करने की है। वर्तमान में, ऐसे कारखाने स्थापित करने के लिए 18 प्रस्ताव प्रस्तुत किए गए हैं, फिर भी आईटीआईएफ की रिपोर्ट महत्वपूर्ण प्रगति हासिल करने की चुनौती को रेखांकित करती है।
सेमीकंडक्टर विकास का वैश्विक परिदृश्य तीव्र प्रतिस्पर्धा से चिह्नित है, जिसमें अमेरिका, चीन, यूरोप, जापान और ताइवान में अनुसंधान और उत्पादन में पर्याप्त निवेश हो रहा है। इस पृष्ठभूमि में, आईटीआईएफ ने चिंता व्यक्त की है कि भारत के प्रयासों पर ग्रहण लग सकता है। सेमीकंडक्टर मूल्य श्रृंखला में एक उल्लेखनीय स्थिति सुरक्षित करने के लिए, आईटीआईएफ लगातार निवेश नीतियों, नियामक स्थिरता, एक अनुकूल कारोबारी माहौल और अनिश्चितता पैदा करने वाले कार्यों से बचने की आवश्यकता पर जोर देता है।
सेमीकंडक्टर प्रमुखता का सार चिप डिजाइन में अभूतपूर्व नवाचारों में निहित है। जबकि चिप निर्माण का महत्व है, अंतिम नियंत्राण बौद्धिक संपदा अधिकार रखने वाली कंपनियों के पास रहता है। चिप डिजाइन के लिए अत्याधुनिक अनुसंधान और अनुकूल बाजार स्थितियों के साथ-साथ पर्याप्त प्रतिभा और पूंजी निवेश की आवश्यकता होती है।
भारत सरकार जो लाॅलीपाॅप इन चिप कंपनी को दिखाकर चीप हरकते करते हुए जो करना चाह उसका हकीकत यहीं है, कि यह इस बात पर विचार करने के लिए प्रेरित करता है कि क्या भारत ने इन महत्वपूर्ण क्षेत्रों में एक मजबूत आधार तैयार किया है। इस तरह के जमीनी कार्य के बिना, सब्सिडी के माध्यम से कंपनियों को प्रोत्साहित करना बंजर मिट्टी के बीच पेड़ लगाने के समान हो सकता है – एक ऐसा प्रयास जो चुनौतियों से भरा है।
भारत सरकार के सामने यह महत्वपूर्ण सवाल है कि क्या उसकी रणनीतियाँ सेमीकंडक्टर उद्योग की जटिलताओं और मांगों के अनुरूप हैं। स्वदेशी नवाचार, अनुसंधान क्षमताओं और दीर्घकालिक विकास के लिए अनुकूल नियामक ढांचे जैसे बुनियादी कारकों को संबोधित किए बिना केवल सब्सिडी की पेशकश पर्याप्त नहीं हो सकती है। सेमीकंडक्टर क्षेत्र में सतत प्रगति के लिए विनिर्माण क्षमताओं और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्रा दोनों को शामिल करते हुए एक समग्र दृष्टिकोण की आवश्यकता है।
अब आप को समझ में आया कि यह मोदी सरकार ने चिप निर्माण के लिए जो जमीनी तैयारी उदाहरण के रूप में कच्चे माॅल का आयात करना, ऐसे स्किल लेबर जो इस कार्य को लेकर को लेकर पहले से प्रशिक्षिण प्राप्त किया हो। कहने को तो इस सब्सिडी की चीनी की खुशबू समझ कर चिप कंपनी चींटी के समान ही आ रही है, परन्तु उनको यह समझ में आ जा रहा है, कि चीनी के रूप में यह करैला है।
सवाल उठता है, क्यों वेदांता और फाॅक्सकाॅन ने अपने हाथ पीछे खीचें, अभी तक दोनो ने अलग होकर भी कितने यूनिट का निर्माण किया और कितने चिप यूनिट बाजार में आये और आप हम ने उसका उपयोग किया है। आज भी आप यदि अपने कम्प्यूटर के समान के लिए अपने नजदीकी इलेक्ट्राॅनिक शाॅप जायें आप को वह सामान मेक इन इंडिया ही मिलेगा।

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