उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में सनसनीखेज राजकुमार चौहान हत्याकांड में पुलिस को एक बेहद बड़ी और ऐतिहासिक कामयाबी मिली है। पुलिस ने इस जघन्य हत्याकांड के मुख्य सूत्रधार और कुख्यात हथियार तस्कर मनीष यादव (Arms Smuggler Manish Yadav) को उसके एक अन्य साथी के साथ गिरफ्तार कर लिया है।

निर्भीक इंडिया (संवाददाता नवनीत मिश्रा)- चिलुआताल थाना पुलिस और एसओजी/स्वॉट टीम के इस शानदार संयुक्त ऑपरेशन ने पूरे पूर्वांचल के अपराध जगत में हड़कंप मचा दिया है। इस गिरफ्तारी के साथ ही 17 मार्च 2026 को हुए इस खौफनाक और बहुचर्चित हत्याकांड की पूरी खूनी साजिश का पर्दाफाश हो गया है।
हथियार तस्कर मनीष यादव (Arms Smuggler Manish Yadav) गिरफ्तार, गोरखपुर मर्डर का पर्दाफाश
पुलिस जांच में यह पूरी तरह से स्पष्ट हो गया है कि इस निर्मम हत्या के पीछे एक बहुत बड़ा आपराधिक सिंडिकेट काम कर रहा था। पुलिस की इस त्वरित और सख्त कार्रवाई से न केवल हत्यारों बल्कि उन्हें हथियार मुहैया कराने वाले आकाओं के चेहरों से भी नकाब उतर गया है।
गिरफ्तार किए गए दोनों शातिर आरोपियों के पास से पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल किए गए अवैध हथियार, जिंदा कारतूस और अन्य महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य बरामद किए हैं। इस बड़ी सफलता के बाद पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की जड़ों को मटियामेट करने में जुट गई है।
हथियार तस्कर मनीष यादव (Arms Smuggler Manish Yadav) और हरियाणा STF कनेक्शन
इस हत्याकांड की विवेचना के दौरान पुलिस को सबसे बड़ा और चौंकाने वाला सुराग तब मिला, जब हत्या में इस्तेमाल हुई पिस्तौल की असली कहानी सामने आई। पुलिस की गहन जांच में यह साबित हुआ कि यह घातक हथियार कुख्यात हथियार तस्कर मनीष यादव (Arms Smuggler Manish Yadav) ने ही शूटरों को उपलब्ध कराया था।
मनीष यादव (पुत्र सदानन्द यादव, निवासी बरगदवां) कोई मामूली अपराधी नहीं है, बल्कि उसका एक बहुत बड़ा और खौफनाक आपराधिक इतिहास रहा है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, उसका सीधा हरियाणा STF कनेक्शन (Haryana STF Connection) रहा है, जो उसके अंतरराज्यीय हथियार सिंडिकेट का भंडाफोड़ करता है।
कुछ समय पूर्व ही हरियाणा पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने मनीष को अवैध हथियारों की बड़ी तस्करी के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेजा था। कुरुक्षेत्र (हरियाणा) के शाहाबाद थाने में उसके खिलाफ आर्म्स एक्ट की गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज है, जिससे उसके बड़े नेटवर्क की पुष्टि होती है।
गोरखपुर पुलिस ने इस शातिर अपराधी के पास से .32 बोर की एक अवैध पिस्तौल, मैगजीन, दो जिंदा कारतूस और एक मोबाइल फोन बरामद किया है। जेल से छूटने के बाद भी वह गोरखपुर में बेखौफ होकर अवैध हथियारों की तस्करी का काला कारोबार चला रहा था।
डम्फर चालक दोस्ती (Dumper Driver Friendship) से रची गई खूनी साजिश
पुलिस की विस्तृत पूछताछ में एक और बेहद हैरान कर देने वाली कहानी सामने आई है। इस हत्याकांड के मुख्य शूटर राज चौहान (उर्फ निरहू), विपिन यादव और हथियार छिपाने वाले सचिन यादव के बीच एक बहुत ही गहरी और पुरानी डम्फर चालक दोस्ती (Dumper Driver Friendship) थी।
ये तीनों आरोपी लंबे समय से अंकित यादव नाम के एक व्यक्ति का डम्फर (ट्रक) चलाने का काम करते थे। इसी डम्फर की स्टेयरिंग पर साथ बैठते-बैठते इनकी दोस्ती गहरी हुई और धीरे-धीरे ये सभी एक बड़े और खतरनाक आपराधिक सिंडिकेट का हिस्सा बन गए।
जब राज चौहान और विपिन यादव ने राजकुमार चौहान की हत्या की खौफनाक साजिश रची, तो उन्होंने अपने इन्ही पुराने दोस्तों का सहारा लिया। हत्या को अंजाम देने के बाद पुलिस से बचने के लिए उन्होंने खून से सने हथियारों को छिपाने की अहम जिम्मेदारी अपने डम्फर साथी सचिन यादव को सौंप दी।
सचिन यादव (निवासी लक्षीपुर यादव टोला, गोरखनाथ) ने अपने दोस्तों को बचाने के लिए उस असलहे को छिपा दिया। लेकिन पुलिस की सख्ती के आगे वह टूट गया और उसकी सटीक निशानदेही पर ही पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त वह खौफनाक हथियार और कारतूस अंततः बरामद कर लिए।
अवैध असलहा और चाकू (Illegal Weapons and Knife): हत्या का खौफनाक मंजर
दिनांक 17 मार्च की अलसुबह जब राजकुमार चौहान अपने घर से निकले थे, तब उन्हें इस खौफनाक मौत का कोई अंदाजा नहीं था। शूटरों ने न केवल उन पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाईं, बल्कि उनकी निर्मम तरीके से हत्या करने के लिए अवैध असलहा और चाकू (Illegal Weapons and Knife) दोनों का क्रूरता से इस्तेमाल किया।
गिरफ्तार आरोपी सचिन यादव के पास से पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल की गई .32 बोर की पिस्तौल, मैगजीन और दो जिंदा कारतूस बरामद किए हैं। इसके साथ ही वह खौफनाक आलाकत्ल (चाकू) भी बरामद हो गया है, जिससे मृतक के शरीर पर कई गहरे और जानलेवा वार किए गए थे।
इस दोहरे हमले (गोली और चाकू) से यह पूरी तरह स्पष्ट हो जाता है कि आरोपी किसी भी कीमत पर राजकुमार चौहान को जिंदा नहीं छोड़ना चाहते थे। हथियार तस्कर मनीष यादव (Arms Smuggler Manish Yadav) द्वारा दी गई इस पिस्तौल ने चंद मिनटों में ही एक हंसते-खेलते परिवार को हमेशा के लिए उजाड़ दिया।
पुलिस अब इन बरामद हथियारों को फोरेंसिक और बैलिस्टिक जांच के लिए अत्याधुनिक लैब में भेज रही है। इस वैज्ञानिक रिपोर्ट से कोर्ट में यह पूरी तरह से साबित हो जाएगा कि मृतक के शरीर से निकली गोलियां इसी पिस्तौल से दागी गई थीं, जिससे आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा मिल सकेगी।
पुलिस की वैज्ञानिक जांच: सीसीटीवी और सीडीआर अवलोकन (CCTV and CDR Observation)
शुरुआत में यह हत्या का मामला पुलिस के लिए एक बहुत बड़ी और उलझी हुई ‘ब्लाइंड मर्डर मिस्ट्री’ लग रहा था। मृतक के परिजनों ने दीपक गौड़, धर्मदेव चौहान सहित 8 लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज कराई थी, लेकिन पुलिस ने जल्दबाजी में किसी बेगुनाह को नहीं पकड़ा।
असली कातिलों तक पहुंचने के लिए पुलिस ने तकनीकी सर्विलांस का बेहतरीन इस्तेमाल किया। पुलिस टीमों ने घटनास्थल के आस-पास लगे दर्जनों कैमरों का सीसीटीवी और सीडीआर अवलोकन (CCTV and CDR Observation) बेहद बारीकी और वैज्ञानिक तरीके से किया।
इसी तकनीकी जांच के दौरान पुलिस को असली शूटरों (राज चौहान और विपिन यादव) की लोकेशन वारदात के समय घटनास्थल पर मिल गई। कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) खंगालने पर इन शूटरों का संपर्क सीधे तौर पर हथियार तस्कर मनीष यादव (Arms Smuggler Manish Yadav) और सचिन यादव से जुड़ता हुआ पाया गया।
इस अचूक और पुख्ता वैज्ञानिक साक्ष्य के आधार पर ही पुलिस ने सबसे पहले 17 और 21 मार्च को मुख्य शूटरों सहित 8 लोगों को जेल भेजा। अब 26 मार्च को इस पूरी साजिश की अहम कड़ियों (मनीष और सचिन) को भी गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे पहुंचा दिया गया है।

बीआरडी मेडिकल कॉलेज (BRD Medical College) में टूटी थीं सांसें
इस दर्दनाक घटना की शुरुआत 17 मार्च की सुबह 6:15 बजे हुई थी, जब पुलिस को गोलीबारी की पहली सूचना मिली। गंभीर रूप से लहूलुहान और खून से लथपथ राजकुमार चौहान को स्थानीय लोगों की मदद से तुरंत इलाज के लिए पास के अस्पताल ले जाया गया।
हालत अत्यधिक नाजुक होने पर डॉक्टरों ने उन्हें तत्काल बीआरडी मेडिकल कॉलेज (BRD Medical College) के ट्रॉमा सेंटर के लिए रेफर कर दिया। वहां वरिष्ठ डॉक्टरों की टीम ने उनकी जान बचाने का हर संभव और अथक प्रयास किया।
लेकिन गोलियों और चाकू के गहरे घावों के कारण उनके शरीर से बहुत अधिक खून बह चुका था। अंततः बीआरडी मेडिकल कॉलेज (BRD Medical College) में इलाज के दौरान ही उन्होंने दम तोड़ दिया, जिससे पूरे बरगदवा इलाके में मातम और भारी दहशत फैल गई।
परिजनों के चीत्कार और आक्रोश के बीच पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर वीडियोग्राफी के साथ पोस्टमार्टम कराया। इस हत्याकांड ने पूरे शहर की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए थे, लेकिन पुलिस के इस त्वरित खुलासे ने आम जनता का विश्वास फिर से पुलिस प्रशासन में कायम कर दिया है।
भारतीय न्याय संहिता (BNS) और साजिशकर्ता की गिरफ्तारी (Arrest of Conspirator)
गोरखपुर पुलिस ने इस मामले में अपराधियों के खिलाफ नए और सख्त कानूनों के तहत कड़ी कार्रवाई की है। आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(2), 61(2), 191(2), 191(3), 303(2) और 238 के तहत हत्या, आपराधिक साजिश और साक्ष्य मिटाने के अत्यंत गंभीर मुकदमे दर्ज किए गए हैं।
इसके अलावा अवैध हथियारों की बरामदगी पर 3/25 और 4/25 आर्म्स एक्ट के तहत भी अलग से सख्त कार्रवाई की जा रही है। साजिशकर्ता की गिरफ्तारी (Arrest of Conspirator) के रूप में मनीष यादव का पकड़ा जाना पुलिस की सबसे बड़ी और अहम रणनीतिक जीत मानी जा रही है।
एसएसपी गोरखपुर ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी अपराध में हथियारों की सप्लाई करने वालों को मुख्य हत्यारे के समान ही कठोर सजा दिलाई जाएगी। हथियार तस्कर मनीष यादव (Arms Smuggler Manish Yadav) जैसे अपराधियों का पकड़ा जाना शहर को अपराध मुक्त बनाने की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम है।
पुलिस अब मनीष यादव के पूरे मोबाइल डेटा और नेटवर्क की विस्तृत जांच कर रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि उसने गोरखपुर और आस-पास के किन-किन अन्य अपराधियों को अवैध हथियार बेचे हैं, ताकि भविष्य में होने वाले ऐसे किसी भी खौफनाक अपराध को समय रहते रोका जा सके।

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Navneet Mishra is a seasoned journalist currently associated with Nirbhik India and its digital portal, nirbhikindia.in. With over six years of experience across print and digital platforms, Navneet specializes in politics, sports, economics, and geopolitics.
A Master’s graduate in Mass Communication from Deen Dayal Upadhyay Gorakhpur University, he is also a dedicated media scholar. His academic research focuses on “the pivotal role of Gorakhpur’s Hindi newspapers during the Indian freedom struggle against the British Crown”. Before joining Nirbhik India, Navneet spent five years at Adarsh Jeevan and gained valuable field experience at Amar Ujala Gorakhpur as training reporter only for 5 days.
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नवनीत मिश्रा वर्तमान में ‘निर्भीक इंडिया’ मीडिया समूह से जुड़े हैं। उन्होंने दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया है। पत्रकारिता के अपने 6 वर्षों के सफर में उन्होंने प्रिंट और डिजिटल दोनों डेस्क पर काम किया है। उनके शोध का विषय ब्रिटिश शासन के खिलाफ गोरखपुर के अखबारों का योगदान रहा है, जो उनकी ऐतिहासिक समझ को दर्शाता है। वे राजनीति, अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय मामलों (Geopolitics) पर निरंतर लिखते रहे हैं। ‘आदर्श जीवन’ दैनिक में 5 साल का कार्यकाल और ‘अमर उजाला’ गोरखपुर में ट्रेनिंग रिपोर्टिंग के तौर पर मात्र 5 दिन काम क्या है उनकी लेखनी को और भी निखारता है।

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