परिचय – गोरखपुर की धरती पर गुरुवार को वह राजनीतिक नाटक देखने को मिला, जो बॉलीवुड या भोजपुरी सिनेमा की किसी भी ब्लॉकबस्टर फिल्म के क्लाइमेक्स को भी मात दे दे। मंच पूरी तरह से सजा हुआ था, सूबे के तेजतर्रार मुखिया योगी आदित्यनाथ विराजमान थे, और उनके ठीक बगल में मुस्कान बिखेरते हुए खड़े थे ‘जिंदगी झंडवा’ फेम गोरखपुर सांसद रवि किशन (Gorakhpur MP Ravi Kishan)।

अवसर था सहजनवा आईटी पार्क (Sahjanwa IT park) के भव्य उद्घाटन का, लेकिन मुख्यमंत्री ने इस कार्यक्रम को कुछ इस तरह से मोड़ा कि आईटी पार्क के साथ-साथ उन्होंने अपने ही ‘रील वाले’ सांसद के सामान्य ज्ञान का भी सार्वजनिक रूप से ‘लोकार्पण’ कर दिया।
यह कोई साधारण राजनीतिक भाषण नहीं था, बल्कि यह उस कड़वे सच का पर्दाफाश था जिसे जनता अक्सर दबी जुबान में बोलती है। वह सांसद, जो कल तक भोजपुरी फिल्मों के रंगीन सेटों पर ठुमके लगाते हुए छोटे-मोटे किरदार निभाया करते थे, आज उनके हाथ में उस शहर की कमान है जिसका इतिहास और राजनीतिक कद पूरे देश में गूंजता है।
लेकिन विडंबना देखिए, जिन माननीय को अपने ही संसदीय क्षेत्र के विकास कार्यों और उस पर हुए खर्च का ककहरा तक नहीं पता, वे संसद भवन में जाकर जनता की आवाज क्या ही उठाते होंगे? शायद वहां भी वे किसी नए ‘एंगल’ से रील बनाने की जुगत में ही लगे रहते होंगे। सहजनवा गोरखपुर न्यूज़ (Sahjanwa Gorakhpur News) के इस सबसे चर्चित एपिसोड ने यह साबित कर दिया है कि अभिनय की दुनिया से राजनीति में आना एक बात है, लेकिन जमीनी हकीकत को समझना बिल्कुल अलग।
सहजनवा आईटी पार्क (Sahjanwa IT park) के बहाने रवि किशन का सार्वजनिक ‘लोकार्पण’
कार्यक्रम के दौरान जब विकास कार्यों की चर्चा शुरू हुई, तो मुख्यमंत्री ने सरेआम चुटकी लेते हुए भरे मंच से उस बात का खुलासा किया जिसने सांसद जी के ‘ज्ञान’ की कलई खोल दी। योगी जी ने माइक पर आते ही तंज कसते हुए बताया कि हमारे रवि किशन जी को लग रहा था कि गोरखपुर के विकास में शायद 5000 करोड़ रुपये खर्च हुए होंगे।
अब बेचारे सांसद जी को कौन यह अर्थशास्त्र समझाए कि फिल्मों का बजट चंद करोड़ों में सिमट कर डिब्बे में बंद हो जाता है, लेकिन एक पूरे शहर के कायाकल्प का बजट किसी फिल्म की ‘रबड़’ वाली स्क्रिप्ट की तरह नहीं खिंचता।
मुख्यमंत्री ने उन्हें टोकते हुए और आईना दिखाते हुए साफ किया कि सांसद जी, आप बिल्कुल गलत बोल रहे हैं। पिछले 9-10 सालों में सिर्फ गोरखपुर जिले में एक लाख करोड़ का बजट (One Lakh Crore Budget) खर्च किया जा चुका है और विकास के ऐतिहासिक काम हुए हैं।
यह सुनकर वहां मौजूद जनता भी यह सोचकर अपना सिर पीट रही होगी कि जिस जनप्रतिनिधि को 5 हजार करोड़ और 1 लाख करोड़ के बीच का अंतर ही नहीं पता, वह उनके हकों की लड़ाई कैसे लड़ेगा?
सांसद का अज्ञान और योगी आदित्यनाथ का तंज (Yogi Adityanath Taunt)
इस पूरे घटनाक्रम ने यूपी की राजनीति (UP Politics) में एक नया अध्याय जोड़ दिया है, जहाँ ‘सेलिब्रिटी कल्चर’ की असलियत जनता के सामने आ गई है। इस मंच से उभरे 5 सबसे तीखे और कड़वे सच इस प्रकार हैं:
आंकड़ों में ‘जीरो’ सांसद: 5000 करोड़ के अनुमान ने यह साबित कर दिया कि रवि किशन केवल कैमरे के सामने डायलॉग बोलने में माहिर हैं, प्रशासनिक फाइलों और विकास के आंकड़ों से उनका दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं है।
सार्वजनिक फजीहत: अपनी ही पार्टी के मुख्यमंत्री द्वारा भरे मंच पर अज्ञानता के लिए टोका जाना, किसी भी राजनेता के लिए सबसे बड़ी शर्मिंदगी का विषय है।
विदेश प्रेम का पर्दाफाश: मंच से यह स्पष्ट हो गया कि यदि वैश्विक हालात ठीक होते, तो सांसद महोदय गोरखपुर की धूल फांकने के बजाय विदेश में छुट्टियां मना रहे होते।
सिनेमा बनाम हकीकत: सांसद जी अभी भी गोरखपुर के विकास को किसी फिल्म के ‘लो-बजट सेट’ की तरह ही आंक रहे हैं।
जनता का मोहभंग: इस घटना ने उन मतदाताओं को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है जो केवल चेहरे की चमक देखकर अपना कीमती वोट दे देते हैं।

दुबई की गर्मी और सहजनवा आईटी पार्क (Sahjanwa IT park) का ‘मजबूरी’ वाला प्यार
योगी आदित्यनाथ का तंज (Yogi Adityanath Taunt) केवल बजट के आंकड़ों तक ही सीमित नहीं रहा। उन्होंने रवि किशन के ‘ग्लोबल’ और विदेशी प्रेम पर भी एक ऐसा जोरदार व्यंग्य बाण छोड़ा, जिसने भीड़ को ठहाके लगाने पर मजबूर कर दिया।
मुख्यमंत्री ने मुस्कुराते हुए कहा कि अगर आज दुनिया में (पश्चिम एशिया में) युद्ध न चल रहा होता, तो हो सकता था कि हमारे सांसद महोदय इस वक्त दुबई की गर्मी में मौज काट रहे होते। लेकिन चूंकि वहां हालात खराब हैं, मिसाइलें उड़ रही हैं, तो उन्होंने सोचा कि चलो भाई, ‘मजबूरी’ में ही सही, चलकर सहजनवा की धूल ही फांक लेते हैं और सहजनवा आईटी पार्क (Sahjanwa IT park) का दर्शन कर लेते हैं।
जरा गहराई से सोचिए! सूबे का मुख्यमंत्री खुद इस बात को स्वीकार कर रहा है और मंच से बता रहा है कि उनके अपने सांसद का दिल तो असल में विदेश की चकाचौंध में धड़कता है। वह तो अंतरराष्ट्रीय युद्ध और वैश्विक संकट की ‘मेहरबानी’ है कि वे मजबूरी में गोरखपुर की धरती पर ‘दर्शन’ देने चले आए हैं।
यह कोई हल्का मजाक नहीं है, बल्कि एक बहुत बड़ा और शर्मनाक खुलासा है कि हमारे चुने हुए जनप्रतिनिधियों के लिए अपनी उस गरीब और भोली जनता से ज्यादा जरूरी ‘दुबई’ का हवाई टिकट है, जिसने उन्हें चुनकर संसद के उस पवित्र मंदिर में भेजा है।
‘राष्ट्रभक्ति’ का नया लिटमस टेस्ट: गैस सिलेंडर और पेट्रोल की लाइन (Gas Cylinder and Petrol Line)
एक तरफ मंच पर यह राजनीतिक कॉमेडी चल रही थी, तो दूसरी तरफ मुख्यमंत्री ने युद्ध का डर दिखाकर आम जनता को भी ‘राष्ट्रभक्ति’ का एक बिल्कुल नया और अजीबोगरीब पाठ पढ़ा दिया।
सहजनवा आईटी पार्क (Sahjanwa IT park) के उसी मंच से, विश्व में चल रहे तनाव (ईरान-अमेरिका युद्ध) का हवाला देते हुए, योगी जी ने देश में गैस सिलेंडर और पेट्रोल की लाइन (Gas Cylinder and Petrol Line) को सीधे तौर पर ‘देशभक्ति’ के तराजू पर तौल दिया।
सीएम का तर्क था कि यदि आप घबराकर गैस या पेट्रोल पंप पर लाइन लगाते हैं, तो अव्यवस्था फैलेगी और ऐसे में आपकी देशभक्ति और राष्ट्रभक्ति पर लोग संदेह करेंगे। गजब का राजनीतिक गणित है यह! आम आदमी की रसोई में चूल्हा बुझने को हो, वैश्विक युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित हो रही हो, महंगाई का नंगा नाच चल रहा हो, और डरी हुई जनता अपने परिवार का पेट पालने के लिए एक सिलेंडर के लिए लाइन में खड़ी हो जाए, तो वह अचानक ‘संदेह के घेरे’ में आ जाती है? उसे अपनी राष्ट्रभक्ति का सर्टिफिकेट देना पड़ेगा?
लेकिन, जो सांसद युद्ध के डर से अपनी दुबई की ट्रिप कैंसिल करके ‘मजबूरी’ में सहजनवा आ जाए, उसे मंच पर खड़ा करके ‘माननीय सांसद जी’ कहा जाता है। यह कैसा दोहरा मापदंड है? एक तरफ हमारा पड़ोसी देश चीन युद्ध की आहट पाते ही महीनों पहले से क्रूड ऑयल और एलपीजी का विशाल भंडार कर लेता है ताकि उसकी जनता को तकलीफ न हो, और हमारे यहां सरकार अपनी जनता को ही यह सलाह दे रही है कि लाइन में लगोगे तो तुम्हारी ‘राष्ट्रभक्ति’ पर सवाल उठेंगे!
सहजनवा आईटी पार्क (Sahjanwa IT park) के साये में यूपी की राजनीति (UP Politics) का कड़वा सच
जब सरकार मंच से यह भारी-भरकम दावा करती है कि उसने गोरखपुर जैसे शहर में एक लाख करोड़ का बजट (One Lakh Crore Budget) निवेश किया है, एम्स (AIIMS) बनाया है, और फर्टिलाइजर कारखाना चालू किया है, तो यह विकास की एक सुखद तस्वीर पेश करता है।
लेकिन इसी तस्वीर का दूसरा और स्याह पहलू यह है कि इतनी भारी-भरकम धनराशि खर्च करने और यूपी की राजनीति (UP Politics) में खुद को विकास का सबसे बड़ा मॉडल बताने के बाद भी, एक अदद गैस सिलेंडर के लिए इस प्रदेश की जनता को ‘देशभक्ति’ का सर्टिफिकेट क्यों जेब में लेकर घूमना पड़ रहा है?
यदि सरकार की नीतियां इतनी ही पारदर्शी और दूरदर्शी हैं, तो ऊर्जा संकट का खौफ जनता के मन में क्यों है? क्या एक लाख करोड़ के विकास का मतलब केवल बड़ी-बड़ी इमारतें खड़ी करना है, जबकि आम आदमी आज भी अपनी मूलभूत जरूरतों के लिए ‘गद्दार’ कहलाने के खौफ में जी रहा है?
सांसद रवि किशन जैसे लोगों का काम था कि वे संसद में खड़े होकर सरकार से पूछें कि आपातकाल के लिए हमारा तेल भंडार (Strategic Oil Reserve) चीन की तरह सुरक्षित क्यों नहीं है? लेकिन जिन्हें यह न पता हो कि उनके क्षेत्र का बजट क्या है, वे अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर क्या ही खाक बोलेंगे!
निष्कर्ष: सहजनवा आईटी पार्क (Sahjanwa IT) की दिखावटी चमक और हकीकत का खौफनाक अंधेरा
गोरखपुर में विकास हुआ है, सहजनवा आईटी पार्क (Sahjanwa IT) बना है, यह निस्संदेह सराहनीय और स्वागत योग्य कदम है। लेकिन इस उद्घाटन समारोह का सबसे बड़ा हासिल यह रहा कि मुख्यमंत्री ने अनजाने में ही सही, अपने सांसद और अपनी व्यवस्था को पूरी तरह से ‘एक्सपोज’ कर दिया है।
रवि किशन जैसे फिल्मी कलाकारों को राजनीति के अखाड़े में लाकर राजनीतिक पार्टियों ने जनता का मनोरंजन तो खूब किया है, लेकिन जब बात ठोस प्रशासनिक फैसलों, आंकड़ों और जनता के हकों की आती है, तो वे आज भी एक बड़े ‘जीरो’ (शून्य) ही साबित हुए हैं।
सांसद जी को शायद अभी भी यही लगता है कि गोरखपुर और पूरा उत्तर प्रदेश किसी भोजपुरी फिल्म का सेट है, जो कम बजट में रंग-रोगन करके तैयार हो गया है और शूटिंग खत्म होते ही वे वापस दुबई की फ्लाइट पकड़ लेंगे। उन्हें क्या पता कि इन ‘एक लाख करोड़’ के विशाल दावों और आईटी पार्कों की चकाचौंध के बीच, उत्तर प्रदेश की गरीब जनता आज भी ईंधन और गैस के लिए ‘राष्ट्रभक्ति’ की खौफनाक परीक्षा दे रही है।
‘निर्भीक इंडिया’ अपने पाठकों से केवल इतना कहना चाहता है कि अगली बार जब रवि किशन कैमरे के सामने आकर जोर से ‘हर-हर महादेव’ या ‘जिंदगी झंडवा’ कहें, तो समझ जाइएगा कि वे वास्तव में उस आम आदमी की जिंदगी की बात कर रहे हैं, जो भारी-भरकम विकास के दावों के बावजूद सिर्फ इसलिए सिलेंडर की लाइन में खड़े होने से डर रहा है कि कहीं सरकार उसे ‘गद्दार’ या ‘देशद्रोही’ घोषित न कर दे।
लेख - नवनीत मिश्र
पत्रकार व मीडिया शोधार्थी

निर्भीक इंडिया (NIRBHIK INDIA) एक समाचार पत्र नही अपितु 245 साल से भी लम्बे समय से चल रहे पत्रकारिता की विचारधारा है, जो हमेशा लोकतंत्र के चारो स्तम्भ को मान्यता देने एवं जनता सर्वोपरि की विचारों का प्रतिनिधित्वकत्र्ता है। आप सभी हमारे साथ जुड़े अपने तन, मन व धन से हमें ताकत दें जिससे कि हम आप (जनता) के लिए आप (जनता) के द्वारा, आप (जनता) के आदेशों पर केन्द्र से सवाल करते हुए एक पूर्ण लोकतंत्र बना सकें।
Navneet Mishra is a seasoned journalist currently associated with Nirbhik India and its digital portal, nirbhikindia.in. With over six years of experience across print and digital platforms, Navneet specializes in politics, sports, economics, and geopolitics.
A Master’s graduate in Mass Communication from Deen Dayal Upadhyay Gorakhpur University, he is also a dedicated media scholar. His academic research focuses on “the pivotal role of Gorakhpur’s Hindi newspapers during the Indian freedom struggle against the British Crown”. Before joining Nirbhik India, Navneet spent five years at Adarsh Jeevan and gained valuable field experience at Amar Ujala Gorakhpur as training reporter only for 5 days.
———————————————————————————-
नवनीत मिश्रा वर्तमान में ‘निर्भीक इंडिया’ मीडिया समूह से जुड़े हैं। उन्होंने दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया है। पत्रकारिता के अपने 6 वर्षों के सफर में उन्होंने प्रिंट और डिजिटल दोनों डेस्क पर काम किया है। उनके शोध का विषय ब्रिटिश शासन के खिलाफ गोरखपुर के अखबारों का योगदान रहा है, जो उनकी ऐतिहासिक समझ को दर्शाता है। वे राजनीति, अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय मामलों (Geopolitics) पर निरंतर लिखते रहे हैं। ‘आदर्श जीवन’ दैनिक में 5 साल का कार्यकाल और ‘अमर उजाला’ गोरखपुर में ट्रेनिंग रिपोर्टिंग के तौर पर मात्र 5 दिन काम क्या है उनकी लेखनी को और भी निखारता है।

You must be logged in to post a comment.