बिजली निजीकरण के विरोध में गोरखपुर बिजली कर्मचारी समेत पूरे प्रदेश में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के आह्वान पर बिजली कर्मियों का आंदोलन लगातार जारी है । समिति ने आरोप लगाया है कि निजीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए प्रबंधन द्वारा कर्मचारियों पर बड़े पैमाने पर उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियाँ की जा रही हैं, जिससे कर्मचारियों में भारी गुस्सा व्याप्त है। संघर्ष समिति ने वेतन रोकने और मनमाने तबादलों को इन कार्रवाइयों की पराकाष्ठा बताया है।

निर्भीक इंडिया संवाददाता (नवनीत मिश्र)- आलम यह है कि बिजली निजीकरण को लेकर आंदोलन 276वें दिन भी जारी है। प्रदेश में बिजली व्यवस्था भी को काफी उत्तम नही चल रही है ट्रांफार्मर जलने के मामले मिल रहे है इस बीच सूबे कि योगी सरकार बिजली कर्मचारियो के आंदोलन को कान मे तेल डाल कर नजरंदाज कर रही है। आंदोलन दौरान बिजली संघर्ष समिति की ओर से काफी गंभीर आरोप भी लगाए गए है लेखिन योगी सरकार चुप्पी साध बैठी है।
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बिजली निजीकरण के विरोधियो का हो रहा है दमन
संघर्ष समिति ने एक बेहद गंभीर आरोप लगाया है कि बिजली निजीकरण का विरोध करने वाले हजारों बिजली कर्मचारियों को पिछले तीन माह से वेतन नहीं दिया गया है। समिति के पदाधिकारियों, जिनमें सीबी उपाध्याय, इस्माइल खान, पुष्पेन्द्र सिंह, जीवेश नन्दन और चंद्रजीत यादव जैसे नाम शामिल हैं, ने बताया कि ‘फेसियल अटेंडेंस’ के नाम पर कई हजार कर्मचारियों का जून और जुलाई का वेतन अभी तक रुका हुआ है।
अगस्त का महीना भी समाप्त हो रहा है और यदि यह स्थिति बनी रहती है तो यह एक अमानवीय और गंभीर उत्पीड़नात्मक कार्रवाई होगी। पदाधिकारियों ने कहा कि वेतन न मिलने के बावजूद ये कर्मचारी अपनी ड्यूटी कर रहे हैं, जो उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है, फिर भी उन्हें वेतन से वंचित रखना अन्याय है।
बिजली कर्मचारियों का आंदोलन केवल वेतन को लेकर ही नहीं है, बल्कि यह प्रबंधन द्वारा की गई कई अन्य कार्रवाइयों का भी परिणाम है। समिति के अनुसार, निजीकरण के नाम पर मई माह में हजारों संविदा कर्मचारियों को बड़े पैमाने पर नौकरी से निकाल दिया गया था। इनमें 55 वर्ष की आयु के नाम पर निकाले गए और ‘डाउनसाइजिंग’ के तहत हटाए गए कर्मी भी शामिल हैं। समिति ने चेतावनी दी है कि संविदा कर्मियों को हटाए जाने से प्रदेश की बिजली व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
इसके अतिरिक्त, संघर्ष समिति ने आरोप लगाया है कि हजारों कर्मचारियों को सर्वोच्च न्यायालय की गाइडलाइन के विपरीत दूरस्थ स्थानों पर स्थानांतरित कर दिया गया है। यह भी कहा गया कि महिला कर्मियों को सिर्फ इसलिए दूर भेजा गया क्योंकि वे कार्यालय समय के बाद होने वाली बैठकों में शामिल हो रही थीं। प्रबंधन निजीकरण के बाद निजी घरानों को लाभ पहुँचाने के लिए कर्मचारियों और पेंशनरों के घरों पर जबरदस्ती स्मार्ट मीटर भी लगा रहा है, ताकि उन्हें मिल रही रियायती बिजली सुविधा समाप्त की जा सके।
बिजली निजीकरण के विरोधियो ने कहा : मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा आंदोलन
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया है कि प्रबंधन पिछले नौ महीनों से चले आ रहे आंदोलन से खीझकर दमन पर उतर आया है। इन उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों के बावजूद, कर्मचारियों का मनोबल टूटा नहीं है। संघर्ष समिति ने दोहराया है कि उनका यह निजीकरण के विरोध में प्रदर्शन तब तक जारी रहेगा जब तक कि निजीकरण का निर्णय पूरी तरह से निरस्त नहीं कर दिया जाता और प्रबंधन द्वारा की गई समस्त उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयों को वापस नहीं लिया जाता।
आज 276वें दिन, प्रदेश भर में वाराणसी, आगरा, मेरठ, कानपुर, गोरखपुर, मिर्जापुर, आजमगढ़, बस्ती, अलीगढ़, मथुरा, झांसी, बांदा, बरेली, अयोध्या सहित 30 से अधिक जनपदों और परियोजनाओं पर बिजली कर्मियों ने व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी रखा। यह आंदोलन इस बात का संकेत है कि कर्मचारी अपने अधिकारों और सार्वजनिक क्षेत्र की बिजली व्यवस्था को बचाने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं।

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