डीडीयू गोरखपुर से ताज़ा खबर (DDU Gorakhpur se Taaza Khabar) यह है कि दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय कथाकथित डीडीयू जागरूकता अभियान (DDU Awareness Campaign) से अब अब शिक्षा का मंदिर कम और सरकार की आधिकारिक पीआर एजेंसी ज्यादा नजर आने लगा है। यहाँ हर दिन पठन-पाठन छोड़कर कोई न कोई नया सरकारी इवेंट आयोजित किया जा रहा है।

डीडीयू जागरूकता अभियान (DDU Awareness Campaign)
ताज़ा हास्यास्पद मामला नारी शक्ति वंदन अधिनियम (Nari Shakti Vandan Adhiniyam) के प्रचार-प्रसार का है। डीडीयू के मुख्य द्वार पर आयोजित यह डीडीयू जागरूकता अभियान (DDU Awareness Campaign) छात्राओं की वास्तविक भलाई से कहीं ज्यादा, मोदी और योगी सरकार के कार्यों का महिमामंडन करने वाला विज्ञापन प्रतीत हुआ।
सबसे दिलचस्प बात यह है कि महिला आरक्षण बिल 2026 (Women Reservation Bill 2026) की आड़ में हो रहे इस सियासी प्रचार की अगुवाई कोई और नहीं, बल्कि गोरखपुर विश्वविद्यालय की कुलपति (Gorakhpur University VC) स्वयं करती दिखीं। एक अकादमिक प्रमुख का राजनीतिक प्रचारक बन जाना अपने आप में बेहद हास्यास्पद और शिक्षा जगत के लिए चिंतनीय है।
कैंपस की जमीनी हकीकत यह है कि डीडीयू गोरखपुर में छात्राएं (Female Students in DDU Gorakhpur) साफ शौचालयों, सुरक्षित माहौल और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए तरस रही हैं। लेकिन प्रशासन उनकी इन समस्याओं को अनसुना कर, उन्हें महज एक ‘सरकारी भीड़’ और डीडीयू जागरूकता अभियान (DDU Awareness Campaign) का मोहरा बनाने में जुटा हुआ है।
डीडीयू जागरूकता अभियान (DDU Awareness Campaign) और खोखली डीडीयू मानव श्रृंखला (DDU Human Chain)
इस शानदार ‘इवेंट मैनेजमेंट’ के दौरान परिसर में एक डीडीयू मानव श्रृंखला (DDU Human Chain) बनाकर एकता का बड़ा और भ्रामक दिखावा किया गया। प्रो पूनम टंडन डीडीयू (Prof Poonam Tandon DDU) के स्पष्ट निर्देशों पर शिक्षकों और कर्मचारियों ने हाथ में हाथ डालकर अपनी ‘सरकारी वफादारी’ का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।
रैली के दौरान परिसर में नारी शक्ति राष्ट्र की शक्ति नारा (Nari Shakti Rashtra Ki Shakti Slogan) खूब गूंजा, लेकिन इसका कोई जमीनी असर नहीं दिखा। यह डीडीयू जागरूकता अभियान (DDU Awareness Campaign) यह बताने में पूरी तरह विफल रहा कि क्लासरूम की जर्जर छतों के नीचे बैठकर पढ़ने वाली छात्राओं का इन खोखले नारों से क्या भला होने वाला है।
इस पूरे भव्य सियासी ‘शो’ को सफल बनाने और भीड़ जुटाने की अहम जिम्मेदारी नोडल अधिकारी डीडीयू प्रो दिव्या रानी सिंह (DDU Prof Divya Rani Singh) ने निभाई। उनके साथ-साथ विश्वविद्यालय के तमाम वरिष्ठ प्राध्यापक अपना मूल शैक्षणिक कार्य छोड़कर एक इवेंट मैनेजर की भूमिका में नजर आए।
मंच से महिला अधिकारों के प्रति जागरूकता (Awareness for Women Rights) पर बड़े-बड़े और किताबी भाषण दिए गए। ऐसा लग रहा था मानो प्रोफेसरों ने मंच पर खड़े होकर नारी शक्ति पर निबंध (Essay on Nari Shakti) रटकर सुना दिया हो, जिसका छात्राओं के असल सशक्तिकरण और रोजगार से दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं था।

डीडीयू जागरूकता अभियान (DDU Awareness Campaign) और 18 अप्रैल की गोरखपुर स्कूटी रैली (Gorakhpur Scooty Rally) का पीआर स्टंट
गोरखपुर यूनिवर्सिटी न्यूज़ (Gorakhpur University News) में अब सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि सरकार को खुश करने का यह अंतहीन सिलसिला यहीं नहीं रुकने वाला है। प्रशासन का अगला बड़ा पीआर स्टंट गोरखपुर स्कूटी रैली 18 अप्रैल (Gorakhpur Scooty Rally 18 April) को प्रातः 7 बजे आयोजित होने जा रहा है।
इस गोरखपुर स्कूटी रैली (Gorakhpur Scooty Rally) के जरिए डीडीयू जागरूकता अभियान (DDU Awareness Campaign) के नाम पर सरकार का विज्ञापन अब शहर की सड़कों पर उतारा जाएगा। यह छात्राओं को शैक्षणिक माहौल से दूर कर, राजनीतिक रैलियों का हिस्सा बनाने की एक स्पष्ट और सोची-समझी साजिश मालूम पड़ती है।
इस पूरे ढोंग के बीच सबसे बड़ा और तीखा सवाल यह है कि जिस कानून का अभी धरातल पर कोई अता-पता ही नहीं, उसका डीडीयू में यह जश्न कैसा? कोई भी यह पूछने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है कि आखिर महिला आरक्षण बिल लागू कब होगा (Women Reservation Bill Applicable Date)? क्या 2029 में या 2034 के चुनाव से पहले?
कुल मिलाकर, यह डीडीयू जागरूकता अभियान (DDU Awareness Campaign) केवल सरकार के चुनावी एजेंडे को कैंपस में सेट करने का एक सुंदर मुखौटा भर है। बेहतर होगा कि डीडीयू प्रशासन अब शिक्षा का ढोंग छोड़कर, खुलेआम राजनीति और इवेंट मैनेजमेंट का कोई नया ‘डिप्लोमा कोर्स’ शुरू कर दे।

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