दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय (डीडीयू) इन दिनों एक विदेशी रैंकिंग का जमकर ढिंढोरा पीट रहा है। प्रशासन का दावा है कि डीडीयू गोरखपुर रैंकिंग 2026 (DDU Gorakhpur Ranking 2026) में विश्वविद्यालय ने एक ऐतिहासिक और अभूतपूर्व छलांग लगाई है।


निर्भीक इंडिया (संवाददाता नवनीत मिश्रा)- कुलाधिपति (Chancellor Anandiben Patel UP) के तथाकथित ‘दूरदर्शी मार्गदर्शन’ का हवाला देते हुए पीआर एजेंसियां काफी सक्रिय हैं। बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं कि यह सफलता कैंपस में चल रहे उत्कृष्ट रिसर्च और इनोवेशन (Research and Innovation DDUGU) का सीधा नतीजा है।
DDU Gorakhpur Ranking 2026 : कागजी दावों और हकीकत का अंतर
आधिकारिक आंकड़ों की बाजीगरी देखें तो दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर यूनिवर्सिटी रैंक (Deen Dayal Upadhyaya Gorakhpur University rank) में भारी सुधार दिखाया गया है। भारत के 519 संस्थानों में समग्र रैंक 2025 के 322वें स्थान से उछलकर 159 पर आ गई है।
इसी तरह शोध रैंक 234 से 183, नवाचार रैंक 402 से 240 और सामाजिक प्रभाव रैंक 142 से 129 हो गई है। लेकिन, डीडीयू गोरखपुर रैंकिंग 2026 (DDU Gorakhpur Ranking 2026) का यह चमकदार गुब्बारा कैंपस की जमीनी और कड़वी हकीकत से कोसों दूर है।
जिस कैंपस में पत्रकारिता जैसे महत्वपूर्ण विभाग की छत से पानी टपक रहा हो और छात्र आंदोलन कर रहे हों, वहां इस ‘विदेशी रैंकिंग’ का जश्न मनाना एक भद्दा मजाक है। यह छात्रों के जले पर नमक छिड़कने जैसा काम है।
SCImago Institutions Rankings SIR 2026: बिना कैंपस देखे तय होती है गुणवत्ता?
विश्वविद्यालय जिस SCImago Institutions Rankings SIR 2026 की सूची पर इतरा रहा है, उसकी कार्यप्रणाली अपने आप में एक बहुत बड़ा धोखा है। यह रैंकिंग स्पेन स्थित एक शोध संगठन ‘SCImago Research Group’ द्वारा 2009 से जारी की जाती है।
इस विदेशी संस्था के लोग कभी डीडीयू कैंपस का मुआयना (Campus visit) करने नहीं आते। डीडीयू गोरखपुर रैंकिंग 2026 (DDU Gorakhpur Ranking 2026) का आधार कोई जमीनी सर्वे नहीं, बल्कि एल्सेवियर (Scopus) डेटाबेस से निकाले गए डिजिटल आंकड़े मात्र हैं।
इस रैंकिंग के तीन मुख्य स्तंभ हैं—शोध प्रदर्शन (50%), नवाचार (30%) और सामाजिक प्रभाव (20%)। सबसे हास्यास्पद यह है कि ‘सामाजिक प्रभाव’ का आकलन वेब विजिबिलिटी और मीडिया में उल्लेख (Media Mentions) के आधार पर होता है।
हम सभी अच्छी तरह जानते हैं कि पीआर (PR) एजेंसियों को पैसा देकर कोई भी संस्था अपनी वेब विजिबिलिटी और मीडिया कवरेज बढ़ा सकती है। क्या इंटरनेट पर पैसे से खरीदी गई इसी चमक को असली Research and Innovation DDUGU मान लिया गया है?
रैंकिंग तय करने वालों ने छात्रों से कोई सीधा फीडबैक तक नहीं लिया। बिना क्लासरूम देखे ही दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर यूनिवर्सिटी रैंक (Deen Dayal Upadhyaya Gorakhpur University rank) तय कर दी गई।
यह रैंकिंग ‘वेब आकार’ से सुविधाओं का अंदाजा लगाती है। यह सरासर छात्रों के भविष्य के साथ एक डिजिटल खिलवाड़ है। स्पेन में बैठकर एल्गोरिदम के जरिए गोरखपुर के छात्रों का दर्द नहीं समझा जा सकता।

DDU Gorakhpur Ranking 2026 और रोते हुए छात्र
प्रशासन कुछ खास विषयों जैसे पर्यावरण विज्ञान (Environmental Science rank 16 India) और पृथ्वी एवं ग्रहीय विज्ञान (Earth and Planetary Science rank 38) में मिली रैंकिंग का भी खूब बखान कर रहा है। लेकिन उन्हें अपने ही कैंपस का ‘प्रदूषित प्रशासनिक पर्यावरण’ नजर नहीं आता।
जब डीडीयू गोरखपुर रैंकिंग 2026 (DDU Gorakhpur Ranking 2026) का जश्न मनाया जा रहा था, तब पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के छात्र अपनी जर्जर कक्षाओं में बैठकर आंसू बहा रहे थे। छात्रों की कक्षाएं खंडहर में तब्दील हो चुकी हैं।




पत्रकारिता के छात्रों की मांगें बेहद स्पष्ट और मार्मिक हैं। उनकी कक्षाओं की छत से पानी टपकता है, प्लास्टर टूट रहे हैं, पंखे जले हुए हैं और डेस्क टूटे पड़े हैं।
क्या SCImago Institutions Rankings SIR 2026 के स्पेनिश विशेषज्ञों के डेटाबेस में इन टूटी दीवारों और सीलन का कोई कॉलम था? निश्चित रूप से नहीं।
कुलाधिपति (Chancellor Anandiben Patel UP) को शायद यह नहीं पता कि जिस विभाग को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ बनाना है, उसे डीडीयू में मीडिया लैब के नाम पर फर्जी इंस्टाग्राम फोटो दिखाकर बेवकूफ बनाया जा रहा है।
छात्रों ने मांग की है कि वर्तमान में एनरोल सभी छात्र-छात्राओं की आधी ट्यूशन फीस वापस की जाए। साथ ही मीडिया लैब का आज ही शिलान्यास हो और लिखित में उद्घाटन की तारीख दी जाए।
अगर Research and Innovation DDUGU इतना ही शानदार है, तो छात्र अपनी बुनियादी सुविधाओं के लिए सड़कों पर क्यों हैं? विदेशी कागजों पर नंबर वन बनने से असलियत नहीं छिप सकती।
निष्कर्षतः, डीडीयू गोरखपुर रैंकिंग 2026 (DDU Gorakhpur Ranking 2026) केवल पीआर स्टंट्स, एल्गोरिदम और डिजिटल बाजीगरी का नतीजा है। जब तक डीडीयू अपने ही छात्रों से किए गए वादे पूरे नहीं करता, यह विदेशी रैंकिंग पूरी तरह से अर्थहीन है।

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Navneet Mishra is a seasoned journalist currently associated with Nirbhik India and its digital portal, nirbhikindia.in. With over six years of experience across print and digital platforms, Navneet specializes in politics, sports, economics, and geopolitics.
A Master’s graduate in Mass Communication from Deen Dayal Upadhyay Gorakhpur University, he is also a dedicated media scholar. His academic research focuses on “the pivotal role of Gorakhpur’s Hindi newspapers during the Indian freedom struggle against the British Crown”. Before joining Nirbhik India, Navneet spent five years at Adarsh Jeevan and gained valuable field experience at Amar Ujala Gorakhpur as training reporter only for 5 days.
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नवनीत मिश्रा वर्तमान में ‘निर्भीक इंडिया’ मीडिया समूह से जुड़े हैं। उन्होंने दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया है। पत्रकारिता के अपने 6 वर्षों के सफर में उन्होंने प्रिंट और डिजिटल दोनों डेस्क पर काम किया है। उनके शोध का विषय ब्रिटिश शासन के खिलाफ गोरखपुर के अखबारों का योगदान रहा है, जो उनकी ऐतिहासिक समझ को दर्शाता है। वे राजनीति, अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय मामलों (Geopolitics) पर निरंतर लिखते रहे हैं। ‘आदर्श जीवन’ दैनिक में 5 साल का कार्यकाल और ‘अमर उजाला’ गोरखपुर में ट्रेनिंग रिपोर्टिंग के तौर पर मात्र 5 दिन काम क्या है उनकी लेखनी को और भी निखारता है।

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