गोरखपुर पुलिस ने झूठी एफआईआर का पर्दाफाश करते हुए एक चौंकाने वाले मामले का खुलासा किया है। जिसमे बेलीपार थाना क्षेत्र में गोली लगने से घायल हुए एक व्यक्ति ने खुद को कर्ज से बचाने के लिए अपने ही मित्र के साथ मिलकर झूठी कहानी रची थी।

निर्भीक इंडिया संवाददाता (नवनीत मिश्र)- गोरखपुर पुलिस की जांच में यह सामने आया कि उस व्यक्ति ने गोली मारने की झूठी एफआईआर किसी और के नहीं, बल्कि स्वयं को गोली मारकर घायल करने के बाद किया था। इस झूठी शिकायत के बाद, बेलीपार पुलिस ने शिकायतकर्ता और उसके साथी को गिरफ्तार कर लिया है।
झूठी एफआईआर का कैसे खोला राज़?
घटना 29 अगस्त, 2025 की है, जब राहुल गौतम नामक व्यक्ति ने बेलीपार थाने में सूचना दी कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने उसे गाली देते हुए जान से मारने की नीयत से पिस्टल से फायर कर दिया। उसने बताया कि गोली उसके कंधे पर लगी है और वह गंभीर रूप से घायल हो गया है। इस सूचना के आधार पर, पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 109, 352 के तहत मुकदमा दर्ज किया और जांच शुरू की।
पुलिस टीम, जिसमें थानाध्यक्ष विशाल कुमार सिंह और उप-निरीक्षक विनय कुमार सिंह शामिल थे, ने मामले की विवेचना शुरू की। शुरुआती जांच में ही पुलिस को शक हुआ। गहन पूछताछ और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर यह खुलासा हुआ कि राहुल गौतम कर्ज से बुरी तरह परेशान था और इसी से बचने के लिए उसने एक साजिश रची। उसने अपने मित्र अनूप पांडे के साथ मिलकर यह योजना बनाई कि वह खुद को गोली मारकर घायल कर लेगा और पुलिस को झूठी कहानी झूठी एफआईआर दर्ज करवाया ताकि उसे आर्थिक सहायता या सहानुभूति मिल सके।
इस जांच के बाद, पुलिस ने दोनों अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया और उनसे वह अवैध पिस्टल भी बरामद की जिसका इस्तेमाल इस घटना में हुआ था।

झूठी एफआईआर से खुला मुख्य आरोपी का गंभीर आपराधिक इतिहास
गिरफ्तार किए गए आरोपियों में से एक, राहुल गौतम, पुत्र अनिल गौतम निवासी कानपुर, का आपराधिक इतिहास बेहद लंबा और गंभीर है। उसके खिलाफ कानपुर के विभिन्न थानों, जैसे नवाबगंज और काकादेव में कई संगीन मुकदमे दर्ज हैं। यह दिखाता है कि वह एक पेशेवर अपराधी है और यह पहली बार नहीं है जब वह कानून के साथ खिलवाड़ कर रहा था।
लूट और डकैती: राहुल गौतम पर कानपुर में लूट (धारा 392) और डकैती (धारा 395, 397) के कई मामले दर्ज हैं। ये मामले उसकी हिंसक और आपराधिक प्रवृत्ति को दर्शाते हैं।
- हत्या का प्रयास: उस पर हत्या के प्रयास (धारा 307) का भी मुकदमा दर्ज है।
- गैंगस्टर एक्ट: वह उत्तर प्रदेश गिरोहबंद समाज विरोधी क्रियाकलाप अधिनियम, 1986 (गैंगस्टर एक्ट) के तहत भी एक बार वांछित रहा है।
- अन्य अपराध: इसके अलावा, उसके खिलाफ सड़क दुर्घटना (धारा 279, 337, 338) और धोखाधड़ी के मामले भी दर्ज हैं।
उसका आपराधिक रिकॉर्ड यह साबित करता है कि वह न केवल झूठ बोल रहा था, बल्कि कानून व्यवस्था के लिए एक गंभीर खतरा भी है। उसके साथी अनूप पांडे पर भी इस साजिश में शामिल होने का मुकदमा दर्ज किया गया है।
बरामदगी और कानूनी कार्यवाही
पुलिस ने गिरफ्तार अभियुक्तों के पास से 01 अवैध पिस्टल, 02 जिंदा कारतूस और 01 खाली कारतूस (32 बोर) बरामद किया है। इस बरामदगी ने पुलिस के खुलासे को और मजबूत किया है।
इस पूरे प्रकरण के बाद, पुलिस ने मुकदमे में दर्ज पुरानी धारा 109, 352 भारतीय न्याय संहिता को हटाकर आर्म्स एक्ट की धारा 3/25/27 को जोड़ा है। यह कानूनी बदलाव दर्शाता है कि पुलिस ने घटना की सही प्रकृति को पहचान लिया है। दोनों अभियुक्तों को गिरफ्तार कर आगे की कानूनी कार्यवाही की जा रही है।
बाँसगांव क्षेत्र के क्षेत्राधिकारी के पर्यवेक्षण में, पुलिस की इस कार्रवाई ने यह संदेश दिया है कि झूठी एफआईआर करना और कानून को गुमराह करने की कोशिश करना एक गंभीर अपराध है और इससे सख्ती से निपटा जाएगा। यह घटना आम जनता के लिए भी एक सबक है कि किसी भी प्रकार की परेशानी से बचने के लिए झूठ का सहारा न लें।

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