परिचय – महाराष्ट्र की राजनीति और विवादों का चोली-दामन का साथ रहा है। लेकिन इस बार का भूचाल किसी विचारधारा या राजनीतिक सिद्धांत के पतन से नहीं, बल्कि एक ऐसे घिनौने ‘बेडरूम स्कैंडल’ से निकला है, जिसने नैतिकता और तथाकथित ‘नारीवाद’ के सारे मुखौटे एक झटके में नोच फेंके हैं।

महाराष्ट्र महिला आयोग (Maharashtra Women’s Commission) : जब महिलाओं की ‘रक्षक’ ही बन जाए भक्षक की ‘परम भक्त’
जिस महाराष्ट्र महिला आयोग (Maharashtra Women’s Commission) को आधी आबादी की सबसे मजबूत ढाल और न्याय का सर्वोच्च मंदिर बनना था, उसकी पूर्व अध्यक्ष रूपाली चाकणकर खुद एक ऐसे ढोंगी बाबा के दरबार में छाता पकड़े और ‘पाद्य-पूजन’ (पैर धोती हुई) करती नजर आईं, जो बंद कमरों में महिलाओं की अस्मत का सरेआम कत्ल कर रहा था।

यह कोई साधारण घटना नहीं है; यह उस संस्थागत पाखंड का सबसे क्रूर उदाहरण है जहाँ एक तरफ पुरुषों को बिना किसी ठोस सबूत के ‘महिला हिंसा’ के नाम पर तुरंत कटघरे में खड़ा कर दिया जाता है, और दूसरी तरफ उसी आयोग की मुखिया एक बलात्कारी की ‘विट्ठल’ मानकर पूजा करती है।
नासिक के इस ‘कैप्टन’ अशोक खरात की गिरफ्तारी और उसके मोबाइल/पेन ड्राइव से मिले 58 अश्लील वीडियो ने न केवल उस ढोंगी की असलियत उजागर की है, बल्कि सत्ता के गलियारों में पनप रही उस ‘अंधी भक्ति’ पर भी करारा तमाचा जड़ा है, जिसके नशे में संवैधानिक पदों की गरिमा को भी दांव पर लगा दिया गया। ‘निर्भीक इंडिया’ की इस तीखी और बेबाक लेख में आइए पर्दा उठाते हैं महिला आयोग अध्यक्ष विवाद (Women’s Commission Chairperson Controversy) के इस पूरे ‘बाबा-भक्त’ सिंडिकेट से।
जब एमबीए (MBA) की डिग्री अंधविश्वास और पाखंड के आगे नतमस्तक हो गई

सोशल मीडिया पर वायरल हुई उन तस्वीरों ने महाराष्ट्र की जनता का खून खौला कर रख दिया है। तस्वीरों में स्पष्ट दिख रहा है कि उच्च शिक्षित (MBA) रूपाली चाकणकर, जो टीवी डिबेट्स में अपनी बेबाकी और आधुनिक नारीवाद का झंडा बुलंद करती थीं, वे एक कथित ढोंगी बाबा अशोक खरात के पैर धो रही हैं। इसे महज़ ‘श्रद्धा’ कहकर पल्ला नहीं झाड़ा जा सकता। यह सीधे तौर पर उस संवैधानिक पद का सबसे वीभत्स अपमान है जो महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए बनाया गया है।
जिस महिला को महिलाओं के शोषण के खिलाफ आवाज़ उठानी थी, वह खुद एक ऐसे शख्स के सामने नतमस्तक थी जिसके तार ब्लैकमेलिंग, नशीली दवाओं और यौन शोषण के एक खौफनाक कॉकटेल से जुड़े हुए थे। क्या शिक्षा और संवैधानिक पद का गुरूर एक ‘हवसी कैप्टन’ के चरणों में इतना बौना हो जाता है?
58 खौफनाक वीडियो और ‘स्यूडो-फेमिनिज्म’ का पर्दाफाश
इस पूरे प्रकरण ने केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि एक पूरे सिस्टम की पोल खोल दी है। इस घटनाक्रम से उभरने वाले 5 सबसे महत्वपूर्ण और चुभने वाले बिंदु इस प्रकार हैं:
वीडियो की गवाही: अशोक खरात वायरल वीडियो (Ashok Kharat Viral Video) का मामला केवल बलात्कार तक सीमित नहीं है। पेन ड्राइव में कैद 58 वीडियो उन कथाकथित बेबस महिलाओं की कथाकथित चीखों की गवाही दे रहे हैं, जिन्हें शायद महाराष्ट्र महिला आयोग (Maharashtra Women’s Commission) तक पहुँचने से पहले ही डरा-धमका कर दबा दिया गया।
हम यह उन महिलाओ को पीड़ित नहीं बता सकते क्योंकि जैसा की आप के निगाहों में भी कई बार क्लिप आए होंगे जिसमे महिलाए खुद हवसी अशोक खैरात के लिए खुद को प्रस्तुत कर रही है। इसकी व्याख्या हम अगले लेख में करेंगे कैसे महिला यह पीड़ित नहीं है।
धमकी और सत्ता का दुरुपयोग: सबसे गंभीर आरोप यह है कि रूपाली चाकणकर ने अपने पद का रसूख दिखाते हुए एक पत्रकार को खरात के खिलाफ बोलने पर धमकाया भी था। यानी रक्षक खुद अपराधी को बचाने की ‘सुपारी’ ले चुका था।
पुरुषों के खिलाफ दोहरा मापदंड: जो संस्था छोटी-छोटी बातों पर पुरुषों को नीचा दिखाने और उन्हें समाज में जन्मजात अपराधी सिद्ध करने का एक भी मौका नहीं छोड़ती, उसकी मुखिया खुद एक खूंखार अपराधी की चरण वंदना कर रही थी।
सिट (SIT) का शिकंजा: जैसे-जैसे सिट जांच महाराष्ट्र पुलिस (SIT Investigation Maharashtra Police) आगे बढ़ रही है, इस बाबा के दरबार से जुड़े कई सफेदपोशों के नाम सामने आने की आशंका गहराती जा रही है।
राजनीतिक डैमेज कंट्रोल: देवेंद्र फडणवीस का सख्त रुख (Devendra Fadnavis Strict Action) देखने के बाद ही इस्तीफा आया, जो यह साबित करता है कि नैतिकता के आधार पर नहीं, बल्कि राजनीतिक दबाव में पद छोड़ा गया।
एनसीपी (अजित पवार गुट) की मजबूरी और इस्तीफे का ‘ड्रामा’
यह विवाद केवल एक महिला तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने पूरी एनसीपी अजित पवार गुट (NCP Ajit Pawar Faction) की किरकिरी कर दी है। 20 मार्च 2026 को रूपाली चाकणकर ने यह कहते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया कि वे ‘व्यक्तिगत कारणों’ से यह फैसला ले रही हैं। लेकिन क्या महाराष्ट्र की जनता इतनी मूर्ख है जो इस ‘व्यक्तिगत कारण’ के पीछे की राजनीतिक मजबूरी को न समझ सके?
क्या यह इस्तीफा उन 58 महिलाओं के साथ हुए कथाकथित बलात्कार के दाग धो सकता है? राज्य के गृह मंत्री और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का सख्त रुख (Devendra Fadnavis Strict Action) ही वह असली कारण था जिसके चलते रूपाली को अपना पद छोड़ना पड़ा। लेकिन यहाँ सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि एक ‘रेपिस्ट बाबा’ की सेवा करने वाली, उसके लिए छाता पकड़ने वाली महिला को इतने संवेदनशील पद (आयोग अध्यक्ष) पर बिठाया ही क्यों गया था? क्या यह ‘संवैधानिक पद’ उस पाद्य-पूजन और अंधभक्ति का राजनीतिक ‘इनाम’ था?
पुरुषों का ‘चरित्र हनन’ करने वाला अड्डा
रूपाली चाकणकर का यह ‘पाद्य-पूजन’ प्रकरण महाराष्ट्र महिला आयोग (Maharashtra Women’s Commission) के साथ-साथ पूरे देश में चल रहे राज्य महिला आयोगों की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा और गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
आज के दौर में ये संस्थाएं अक्सर पुरुषों को प्रताड़ित करने और ‘फेमिनिज्म’ (नारीवाद) के नाम पर एकतरफा, पूर्वाग्रह से ग्रसित कार्रवाई करने का जरिया बन गई हैं। अगर किसी पुरुष के खिलाफ कोई भी झूठी शिकायत आती है, तो आयोग तुरंत मीडिया में उसे ‘राक्षस’ घोषित कर देता है। लेकिन व्यंग्य तो देखिए! रूपाली जी, जो दूसरों को चरित्र का सर्टिफिकेट बांटती थीं, वे खुद कह रही हैं कि उन्हें खरात के ‘दूसरे पक्ष’ (काले कारनामों) का पता नहीं था।
महोदया, आप महाराष्ट्र महिला आयोग (Maharashtra Women’s Commission) की अध्यक्ष थीं! आपका तो काम ही ‘पक्ष’ और ‘विपक्ष’ की तह तक जाना, जांच करना और सच्चाई बाहर लाना था। अगर आपके पास इतनी सी भी समझ या खुफिया जानकारी नहीं थी कि आप अपने ‘गुरु’ की हकीकत को पहचान सकें, तो आप महाराष्ट्र की लाखों बेसहारा महिलाओं के दर्द और उनकी छिपी हुई पीड़ा को क्या खाक समझती होंगी? आपका यह बयान आपकी मासूमियत नहीं, बल्कि आपकी घोर अयोग्यता और पाखंड का सबसे बड़ा सबूत है।

‘बाबा-बेटी’ के खेल में पिसता आम आदमी
इस महिला आयोग अध्यक्ष विवाद (Women’s Commission Chairperson Controversy) ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि सत्ता के नशे में चूर नेता अक्सर खुद को कानून और नैतिकता से ऊपर समझने लगते हैं। जब एक आम आदमी किसी अपराध में फंसता है, तो पुलिस और आयोग उसे नोच खाने को दौड़ते हैं। लेकिन जब अशोक खरात वायरल वीडियो (Ashok Kharat Viral Video) सामने आता है, तो ‘भक्त’ नेता उसे बचाने या उससे दूरी बनाने के ‘पीआर स्टंट’ (PR Stunt) में लग जाते हैं।
सिट जांच महाराष्ट्र पुलिस (SIT Investigation Maharashtra Police) से अब यह उम्मीद की जा रही है कि वह इस ढोंगी बाबा के साथ-साथ उन सभी ‘सफेदपोशों’ की भी जांच करे, जिन्होंने अपनी राजनीतिक और प्रशासनिक ताक़त का इस्तेमाल इस ‘हवसी कैप्टन’ को बचाने या उसे संरक्षण देने के लिए किया था।
निष्कर्ष: ‘स्यूडो-फेमिनिज्म’ की मौत और आगे की राह
रूपाली चाकणकर का इस्तीफा महज़ एक राजनीतिक घटनाक्रम नहीं है; यह उस ‘सुडो-फेमिनिज्म’ (छद्म नारीवाद) की सबसे बड़ी हार और मौत है, जो समाज के हर पुरुष को जन्म से ही अपराधी मानता है, लेकिन खुद अपराधियों की शरण में जाकर उनके पैर धोता है। महाराष्ट्र की जनता अब इस ‘बाबा-बेटी’ के खेल को बहुत अच्छी तरह समझ चुकी है।
महाराष्ट्र महिला आयोग (Maharashtra Women’s Commission) जैसे पवित्र और संवेदनशील पद पर बैठने वाले व्यक्ति का चरित्र, उसकी समझ और उसकी निष्पक्षता शीशे की तरह साफ होनी चाहिए। सत्ता की हवस में अंधविश्वास का सहारा लेने वाली और एक रेपिस्ट के लिए छाता पकड़ने वाली ऐसी ‘दिखावे की राजनीति’ को अब हमेशा के लिए घर बैठना ही चाहिए।
‘निर्भीक इंडिया’ को उम्मीद है कि एनसीपी अजित पवार गुट (NCP Ajit Pawar Faction) और महाराष्ट्र सरकार अब सबक सीखेगी। आशा है कि अगली बार महिला आयोग की कमान किसी ऐसी शख्सियत के हाथ में सौंपी जाएगी जो वास्तव में महिलाओं का दर्द समझेगी, न कि किसी ढोंगी, हवसी बाबा की ‘चरण वंदना’ करके इस पद को कलंकित करेगी।
मै अपने निबंध लेख के मधायम से एक बात साफ करना चाहता हूँ की उन कथाकथित 58 विडियो जिसकी झलकिया आज कल हमारे सामने आ ही जाती है सोश्ल मीडिया पर उसमे आप को भी पता है की यह वो महिलाए पीड़िता नहीं है क्योंकि विडियो में जबर्दस्ती नहीं दिखाई देती है। मै अपने लेख के अगले संस्करण के मधायम से यह बताऊँगा की कैसे महिलाओं को पीड़िता बता कर उनके अंधभक्ति को छुपा दिया जाता है।
लेख - नवनीत मिश्रा
पत्रकार व मीडिया शोधार्थी
एमएजेएमसी

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Navneet Mishra is a seasoned journalist currently associated with Nirbhik India and its digital portal, nirbhikindia.in. With over six years of experience across print and digital platforms, Navneet specializes in politics, sports, economics, and geopolitics.
A Master’s graduate in Mass Communication from Deen Dayal Upadhyay Gorakhpur University, he is also a dedicated media scholar. His academic research focuses on “the pivotal role of Gorakhpur’s Hindi newspapers during the Indian freedom struggle against the British Crown”. Before joining Nirbhik India, Navneet spent five years at Adarsh Jeevan and gained valuable field experience at Amar Ujala Gorakhpur as training reporter only for 5 days.
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नवनीत मिश्रा वर्तमान में ‘निर्भीक इंडिया’ मीडिया समूह से जुड़े हैं। उन्होंने दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया है। पत्रकारिता के अपने 6 वर्षों के सफर में उन्होंने प्रिंट और डिजिटल दोनों डेस्क पर काम किया है। उनके शोध का विषय ब्रिटिश शासन के खिलाफ गोरखपुर के अखबारों का योगदान रहा है, जो उनकी ऐतिहासिक समझ को दर्शाता है। वे राजनीति, अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय मामलों (Geopolitics) पर निरंतर लिखते रहे हैं। ‘आदर्श जीवन’ दैनिक में 5 साल का कार्यकाल और ‘अमर उजाला’ गोरखपुर में ट्रेनिंग रिपोर्टिंग के तौर पर मात्र 5 दिन काम क्या है उनकी लेखनी को और भी निखारता है।

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