40 लाख की चरस तस्करी (charas smuggling): 2 अरेस्ट
गोरखपुर: उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में मादक पदार्थों और अवैध नशे के काले कारोबार पर नकेल कसने के लिए पुलिस प्रशासन लगातार सख्त अभियान चला रहा है। इसी कड़ी में, गोरखपुर पुलिस (Gorakhpur police) और एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स ने चरस तस्करी (charas smuggling) के एक बड़े सिंडिकेट पर गहरी चोट की है।

मुखबिर की सटीक सूचना पर चेकिंग (checking) के दौरान संयुक्त पुलिस टीम ने 40 लाख रुपये कीमत की 13 किलो 85 ग्राम अवैध चरस के साथ दो शातिर तस्करों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई मादक पदार्थों की सप्लाई चेन (supply chain) को तोड़ने की दिशा में एक बड़ी सफलता मानी जा रही है।
चौरी चौरा में चरस तस्करी (charas smuggling) का खुलासा
पुलिस अधीक्षक उत्तरी के मार्गदर्शन और क्षेत्राधिकारी चौरी चौरा (Chauri Chaura) के निकट पर्यवेक्षण में इस बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया गया। आधिकारिक विवरण के अनुसार, प्रभारी निरीक्षक चौरी चौरा के नेतृत्व में एन्टी थेफ्ट सेल (Anti-Theft Cell), एएनटीएफ गोरखपुर जोन (ANTF Gorakhpur Zone) और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीमों ने इलाके में सघन चेकिंग अभियान (checking campaign) चला रखा था।
इसी दौरान एक संदिग्ध मोटरसाइकिल (motorcycle) पर सवार दो लोगों को रोककर जब कड़ाई से उनकी तलाशी ली गई, तो उनके पास से भारी मात्रा में मादक पदार्थ (narcotics) बरामद हुआ।
पकड़े गए तस्करों की पहचान रंजीत विश्वकर्मा (पुत्र विश्वामित्र विश्वकर्मा, निवासी चोरभरिया बकुची मिश्र मगरहा, थाना खुखुन्दू, जनपद देवरिया) और किशन मदेशिया (पुत्र शिवचन्द मदेशिया, निवासी धनौती खुर्द, थाना कोतवाली, जनपद देवरिया) के रूप में हुई है। इन अपराधियों के खिलाफ चौरी चौरा थाने में मु.अ.सं. 351/2026 के तहत एनडीपीएस एक्ट (NDPS Act) की सख्त धारा 8/20/29/60 के अंतर्गत गंभीर मुकदमा (FIR) पंजीकृत कर लिया गया है।
पकड़े गए तस्करों का आपराधिक इतिहास (criminal history)
पुलिस की गहन जांच (police investigation) में यह तथ्य सामने आया है कि चरस तस्करी (charas smuggling) में पकड़े गए दोनों अभियुक्तों का पुराना और संगीन आपराधिक इतिहास (criminal history) रहा है। ये पहले भी विभिन्न गंभीर मामलों में पुलिस के रडार पर रहे हैं।
- रंजीत विश्वकर्मा का रिकॉर्ड: इसके खिलाफ थाना भटनी, जनपद देवरिया में मु.अ.सं. 171/2025 (धारा 125(A), 125(B), 137(2), 281, 351(3), 352, 70(2) बीएनएस) तथा मु.अ.सं. 160/2026 (धारा 137(2) बीएनएस) के तहत मुकदमे पूर्व से दर्ज हैं।
- किशन मदेशिया का रिकॉर्ड: इस अभियुक्त के खिलाफ थाना हाटा, जनपद कुशीनगर में मु.अ.सं. 908/2024 (धारा 303(2) बीएनएस) के तहत आपराधिक मामला (criminal case) दर्ज है।
मौके से क्या-क्या हुई बरामदगी? (recovery details)
इस संयुक्त सर्च ऑपरेशन (search operation) में पुलिस टीम ने अभियुक्तों के कब्जे से न केवल मादक पदार्थ बरामद किया, बल्कि अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य भी जब्त किए हैं, जो नेटवर्क के वित्तीय लेनदेन (financial links) का खुलासा कर सकते हैं:
- 13 किलो 85 ग्राम अवैध चरस (Charas): जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार (international market) में अनुमानित कीमत लगभग 40 लाख रुपये आंकी गई है।
- 01 मोटरसाइकिल: जिसका इस्तेमाल मादक पदार्थों की सुरक्षित डिलीवरी (drugs delivery) के लिए किया जा रहा था।
- 02 एंड्राइड मोबाइल फोन (mobile phones): जिनका उपयोग सप्लायरों और खरीदारों से संपर्क करने के लिए होता था।
- 01 एटीएम कार्ड (ATM card): जिससे बैंक लेनदेन की जांच की जाएगी।
- 1385 रुपये नकद (cash)।
एनडीपीएस एक्ट (NDPS Act) क्या है और इसमें सजा? (People Also Search For)
सर्च इंजन पर आम नागरिक अक्सर यह खोजते हैं कि चरस तस्करी (charas smuggling) और ड्रग्स (drugs) के मामलों में भारत में कौन सा कानून लागू होता है। भारत में मादक पदार्थों की रोकथाम के लिए नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट (NDPS Act), 1985 लागू है।
- धारा 8/20/29/60: इस कानून के तहत किसी भी प्रतिबंधित मादक पदार्थ का उत्पादन, भंडारण, बिक्री या परिवहन करना एक गैर-जमानती (non-bailable) और अत्यंत गंभीर अपराध है।
- कठोर सजा: वाणिज्यिक मात्रा (Commercial Quantity) में मादक पदार्थ पकड़े जाने पर अदालत दोषी को 10 से 20 साल तक के कठोर कारावास (rigorous imprisonment) और 1 से 2 लाख रुपये तक के भारी जुर्माने की सजा सुना सकती है।
गोरखपुर-नेपाल सीमा और ड्रग्स सिंडिकेट (drugs syndicate) (People Also Search For)
इंटरनेट पर यह भी सर्च (search) किया जाता है कि पूर्वांचल के जिलों में ड्रग्स की सप्लाई कहां से होती है। नेपाल (Nepal) और बिहार (Bihar) की सीमा से सटे होने के कारण गोरखपुर और आस-पास के जिले अवैध नशे के तस्करों के लिए एक प्रमुख ट्रांजिट रूट (transit route) का काम करते हैं।
यही कारण है कि एएनटीएफ (ANTF) और स्थानीय पुलिस लगातार सीमावर्ती क्षेत्रों में चरस तस्करी (charas smuggling) को रोकने के लिए अपने खुफिया तंत्र (intelligence network) को मजबूत कर रही है, ताकि युवा पीढ़ी को नशे के जाल से बचाया जा सके।
गिरफ्तारी करने वाली संयुक्त पुलिस टीम (joint police team)
इस बड़े अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स सिंडिकेट (drugs syndicate) का भंडाफोड़ करने में कई पुलिस अधिकारियों का सराहनीय योगदान रहा। गिरफ्तारी करने वाली संयुक्त टीम (joint team) में निम्नलिखित पुलिसकर्मी शामिल थे:
- निरीक्षक सुनील कुमार राय (प्रभारी, एन्टी थेफ्ट सेल गोरखपुर)
- उ.नि. रमेश राम (थाना प्रभारी, एएनटीएफ गोरखपुर जोन)
- उ.नि. ओमं प्रकाश सिंह (थाना चौरी चौरा, जनपद गोरखपुर)
- हे.कां. शशिकान्त राय (एएनटीएफ)
- हे.कां. दिव्यशंकर राय (एएनटीएफ)
- कां. रजनीश पाल (एएनटीएफ)
- हे.कां. मो. मोहसीन खान (एन्टी थेफ्ट सेल)
- हे.कां. धर्मेन्द्र नाथ तिवारी (एन्टी थेफ्ट सेल)
- हे.कां. मिथिलेश बहादुर सिंह (एन्टी थेफ्ट सेल)
- हे.कां. कमलेश कुमार (एन्टी थेफ्ट सेल)
- कां. भूपेन्द्र यादव (एन्टी थेफ्ट सेल)
वर्तमान में दोनों गिरफ्तार अभियुक्तों के खिलाफ अग्रिम विधिक कार्यवाही (legal proceedings) पूरी करते हुए उन्हें न्यायालय (court) के समक्ष पेश किया जा रहा है। गोरखपुर पुलिस (Gorakhpur police) अब इन तस्करों के बैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंकेज (backward and forward linkages) की तलाश कर रही है ताकि इस गिरोह के सरगना तक पहुंचा जा सके।

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Navneet Mishra is a seasoned journalist currently associated with Nirbhik India and its digital portal, nirbhikindia.in. With over six years of experience across print and digital platforms, Navneet specializes in politics, sports, economics, and geopolitics.
A Master’s graduate in Mass Communication from Deen Dayal Upadhyay Gorakhpur University, he is also a dedicated media scholar. His academic research focuses on “the pivotal role of Gorakhpur’s Hindi newspapers during the Indian freedom struggle against the British Crown”. Before joining Nirbhik India, Navneet spent five years at Adarsh Jeevan and gained valuable field experience at Amar Ujala Gorakhpur as training reporter only for 5 days.
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नवनीत मिश्रा वर्तमान में ‘निर्भीक इंडिया’ मीडिया समूह से जुड़े हैं। उन्होंने दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया है। पत्रकारिता के अपने 6 वर्षों के सफर में उन्होंने प्रिंट और डिजिटल दोनों डेस्क पर काम किया है। उनके शोध का विषय ब्रिटिश शासन के खिलाफ गोरखपुर के अखबारों का योगदान रहा है, जो उनकी ऐतिहासिक समझ को दर्शाता है। वे राजनीति, अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय मामलों (Geopolitics) पर निरंतर लिखते रहे हैं। ‘आदर्श जीवन’ दैनिक में 5 साल का कार्यकाल और ‘अमर उजाला’ गोरखपुर में ट्रेनिंग रिपोर्टिंग के तौर पर मात्र 5 दिन काम क्या है उनकी लेखनी को और भी निखारता है।

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