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गैर-इरादतन हत्या (culpable homicide) में 2 गिरफ्तार

गोरखपुर: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जनपद में पुलिस प्रशासन ने आपराधिक मामलों पर सख्त रुख अपनाते हुए एक गंभीर और दुखद घटनाक्रम में त्वरित विधिक कार्रवाई की है। जिले की गीडा पुलिस (GIDA police) ने इलाज में लापरवाही बरतने, मारपीट करने और पीड़ित की मौत होने के बाद गैर-इरादतन हत्या (culpable homicide) के मुकदमे में वांछित दो मुख्य अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया है।

गैर-इरादतन हत्या (culpable homicide) केस : शराब का सेवन, स्कूटी दुर्घटना और इलाज से इनकार
गैर-इरादतन हत्या (culpable homicide) में 2 गिरफ्तार

पकड़े गए दोनों आरोपी रिश्ते में पिता-पुत्र हैं, जिन्होंने सड़क दुर्घटना में घायल अपने साथी का इलाज कराने के बजाय उसके साथ बदसलूकी और मारपीट की थी। इलाज के दौरान पीड़ित की मृत्यु हो जाने पर पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता की गंभीर धाराओं की बढ़ोतरी करते हुए दोनों अभियुक्तों को सलाखों के पीछे भेज दिया है।

गैर-इरादतन हत्या (culpable homicide) केस : शराब का सेवन, स्कूटी दुर्घटना और इलाज से इनकार

पुलिस द्वारा जारी की गई आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति और गीडा थाने में दर्ज प्राथमिकी (FIR) के विस्तृत विवरण के अनुसार, यह पूरा घटनाक्रम 4 अगस्त 2026 को शुरू हुआ था। वादी मुकदमा (विश्वजीत) अपने परिचित अभियुक्तों के साथ वाहन का टायर खरीदने के उद्देश्य से गोरखपुर शहर में आए हुए थे। यात्रा के दौरान अभियुक्तों ने स्वयं शराब का सेवन किया और वादी को भी अत्यधिक शराब पिला दी।

शहर से वापस लौटते समय, शराब के नशे और अनियंत्रित गति के कारण उनकी स्कूटी अचानक दुर्घटनाग्रस्त होकर सड़क पर गिर गई। इस हादसे में वादी मुकदमा के पैर में गंभीर चोट आ गई। दुर्घटना के तुरंत बाद आरोपी सचिन ने घायल को सांत्वना दी और उसका समुचित इलाज करवाने का आश्वासन दिया।

अगले दिन, 5 अगस्त 2026 को चोट की गंभीरता को देखते हुए वादी इलाज कराने के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) पिपरौली पहुंचे। वहां प्राथमिक जांच के बाद डॉक्टरों ने पीड़ित की नाजुक स्थिति को देखते हुए उसे बेहतर चिकित्सा सुविधाओं के लिए जिला अस्पताल गोरखपुर के लिए रेफर कर दिया।

जब पीड़ित ने इलाज का खर्च उठाने और मदद के लिए आरोपी सचिन से संपर्क किया, तो आरोपी का रवैया पूरी तरह बदल गया। आरोपी सचिन और उसके पिता रमेश सिंह ने पीड़ित विश्वजीत की मदद करने के बजाय उसे भद्दी-भद्दी गालियां दीं। दोनों ने उसे जान से मारने की गंभीर धमकी देते हुए शारीरिक रूप से मारपीट की और उसे मौके से भगा दिया।

गैर-इरादतन हत्या (culpable homicide) में अस्पताल में इलाज के दौरान मृत्यु और मुकदमों में धाराओं की बढ़ोतरी

मारपीट और धमकियों से हताश होकर पीड़ित परिवार ने किसी तरह 8 अगस्त 2026 को उसे नेशनल अस्पताल गोरखपुर में भर्ती कराया, जहां उसकी स्थिति चिंताजनक बनी हुई थी। इलाज के दौरान जब पीड़ित पक्ष ने पुनः चिकित्सा खर्च में सहयोग मांगने के लिए आरोपियों से गुहार लगाई, तो अभियुक्तों ने एक बार फिर उनके साथ अभद्रता की, गालियां दीं और जान से मारने की धमकी देकर भगा दिया। इस अमानवीय व्यवहार से परेशान होकर पीड़ित पक्ष ने स्थानीय थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिस पर पुलिस ने तत्काल संबंधित धाराओं में केस दर्ज किया।

दुर्भाग्यवश, 10 अगस्त 2026 को अस्पताल में सघन इलाज के दौरान पीड़ित विश्वजीत की दर्दनाक मृत्यु हो गई। मौत की सूचना मिलते ही गीडा थाने की पुलिस ने त्वरित साक्ष्य संकलन किया और पूर्व में दर्ज मुकदमे में गंभीर धाराओं की बढ़ोतरी की। मामले में गैर-इरादतन हत्या (culpable homicide) यानी धारा 105 और समूह द्वारा अपराध को अंजाम देने की धारा 3(5) बीएनएस (BNS) को शामिल किया गया।

गैर-इरादतन हत्या (culpable homicide) क्या है और बीएनएस में क्या प्रावधान हैं? (People Also Search For)

इंटरनेट और कानून संबंधी मंचों पर आम लोग अक्सर यह खोजते हैं कि हत्या (Murder) और गैर-इरादतन हत्या (culpable homicide) में क्या मुख्य अंतर होता है और नए भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत इसमें कितनी सजा का प्रावधान है।

कानूनी और विधिक जानकारों के अनुसार:

  • परिभाषा: जब किसी व्यक्ति की ऐसी शारीरिक चोट या कृत्य के कारण मृत्यु हो जाती है, जिसमें आरोपी की मंशा सीधे तौर पर जान से मारने की न रही हो, लेकिन उसे इस बात का ज्ञान (Knowledge) होता है कि उसकी लापरवाही, मारपीट या इलाज न कराने से पीड़ित की जान जा सकती है, तो इसे आपराधिक मानव वध या गैर-इरादतन हत्या की श्रेणी में रखा जाता है।
  • धारा 105 बीएनएस: नए कानून में धारा 105 गैर-इरादतन हत्या के लिए दंड का प्रावधान करती है। इसके तहत दोषी साबित होने पर आरोपी को 10 वर्ष तक के कठोर कारावास या आजीवन कारावास और भारी जुर्माने की सजा दी जा सकती है।
आरोपी पिता-पुत्र की गिरफ्तारी और पुलिस टीम

गंभीर धाराओं के जुड़ने के बाद, पुलिस अधीक्षक उत्तरी के मार्गदर्शन, क्षेत्राधिकारी गीडा के पर्यवेक्षण और प्रभारी निरीक्षक गीडा के कुशल नेतृत्व में एक विशेष पुलिस टीम का गठन किया गया। निरीक्षक अपराध अवधेश तिवारी ने पुलिस टीम के साथ सघन चेकिंग अभियान चलाकर नामजद दोनों अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया।

पकड़े गए अभियुक्तों का विवरण इस प्रकार है:

  • सचिन सिंह (पुत्र रमेश सिंह) — निवासी उसका मल्हीपुर, थाना गीडा, जनपद गोरखपुर।
  • रमेश सिंह (पुत्र स्व. राम सुन्दर सिंह) — निवासी उसका मल्हीपुर, थाना गीडा, जनपद गोरखपुर।

इस सफल गिरफ्तारी में प्रभारी निरीक्षक अश्वनी पांडेय, निरीक्षक अपराध अवधेश तिवारी और वरिष्ठ उप-निरीक्षक (SSI) सुदामा सिंह यादव की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

गीडा पुलिस ने दोनों आरोपियों को मु.अ.सं. 385/26 के तहत धारा 115(2) (चोट पहुंचाना), 352 (अपमान), 351(3) (आपराधिक धमकी), 105 (गैर-इरादतन हत्या) और 3(5) बीएनएस के तहत अदालत में पेश कर जेल भेजने की विधिक कार्रवाई पूरी कर ली है। गोरखपुर पुलिस प्रशासन ने इस कार्रवाई के जरिए संदेश दिया है कि आपराधिक लापरवाही और हिंसा करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

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Navneet Mishra

Navneet Mishra is a seasoned journalist currently associated with Nirbhik India and its digital portal, nirbhikindia.in. With over six years of experience across print and digital platforms, Navneet specializes in politics, sports, economics, and geopolitics.
A Master’s graduate in Mass Communication from Deen Dayal Upadhyay Gorakhpur University, he is also a dedicated media scholar. His academic research focuses on “the pivotal role of Gorakhpur’s Hindi newspapers during the Indian freedom struggle against the British Crown”. Before joining Nirbhik India, Navneet spent five years at Adarsh Jeevan and gained valuable field experience at Amar Ujala Gorakhpur as training reporter only for 5 days.
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नवनीत मिश्रा वर्तमान में ‘निर्भीक इंडिया’ मीडिया समूह से जुड़े हैं। उन्होंने दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया है। पत्रकारिता के अपने 6 वर्षों के सफर में उन्होंने प्रिंट और डिजिटल दोनों डेस्क पर काम किया है। उनके शोध का विषय ब्रिटिश शासन के खिलाफ गोरखपुर के अखबारों का योगदान रहा है, जो उनकी ऐतिहासिक समझ को दर्शाता है। वे राजनीति, अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय मामलों (Geopolitics) पर निरंतर लिखते रहे हैं। ‘आदर्श जीवन’ दैनिक में 5 साल का कार्यकाल और ‘अमर उजाला’ गोरखपुर में ट्रेनिंग रिपोर्टिंग के तौर पर मात्र 5 दिन काम क्या है उनकी लेखनी को और भी निखारता है।

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Navneet Mishra is a seasoned journalist currently associated with Nirbhik India and its digital portal, nirbhikindia.in. With over six years of experience across print and digital platforms, Navneet specializes in politics, sports, economics, and geopolitics. A Master’s graduate in Mass Communication from Deen Dayal Upadhyay Gorakhpur University, he is also a dedicated media scholar. His academic research focuses on "the pivotal role of Gorakhpur’s Hindi newspapers during the Indian freedom struggle against the British Crown". Before joining Nirbhik India, Navneet spent five years at Adarsh Jeevan and gained valuable field experience at Amar Ujala Gorakhpur as training reporter only for 5 days. ---------------------------------------------------------------------------------- नवनीत मिश्रा वर्तमान में 'निर्भीक इंडिया' मीडिया समूह से जुड़े हैं। उन्होंने दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया है। पत्रकारिता के अपने 6 वर्षों के सफर में उन्होंने प्रिंट और डिजिटल दोनों डेस्क पर काम किया है। उनके शोध का विषय ब्रिटिश शासन के खिलाफ गोरखपुर के अखबारों का योगदान रहा है, जो उनकी ऐतिहासिक समझ को दर्शाता है। वे राजनीति, अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय मामलों (Geopolitics) पर निरंतर लिखते रहे हैं। 'आदर्श जीवन' दैनिक में 5 साल का कार्यकाल और 'अमर उजाला' गोरखपुर में ट्रेनिंग रिपोर्टिंग के तौर पर मात्र 5 दिन काम क्या है उनकी लेखनी को और भी निखारता है।

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