DDU Exam Pattern का पंचनामा, विवि प्रशासन खुद भ्रमित
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय (DDU Gorakhpur) द्वारा हाल ही में जारी की गई प्रेस विज्ञप्ति की ‘निर्भीक इंडिया’ (Nirbhik India) के लिए सरकारी विज्ञप्ति समीक्षक नवनीत मिश्रा (Navneet Mishra) द्वारा गहन समीक्षा और ‘पंचनामा’ किया गया है।

प्रशासन द्वारा जारी इस विज्ञप्ति में कहा गया है कि स्नातक (प्रथम, तृतीय और पंचम सेमेस्टर) के डीडीयू परीक्षा पैटर्न (DDU Exam Pattern) पर “अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।”
लेकिन जब हम इस ‘स्पष्टीकरण’ की परतों को खोलते हैं, तो पता चलता है कि यह कोई सामान्य सूचना नहीं, बल्कि पूर्व कुलपति प्रो. पूनम टंडन (Prof. Poonam Tandon) के तीन वर्षीय कार्यकाल (सितंबर 2023 से सितंबर 2026) के दौरान लिए गए अव्यावहारिक फैसलों और छात्रों के भारी विरोध के बाद लिया गया एक डरा हुआ ‘प्रशासनिक यू-टर्न’ (U-Turn) है। आइए, आसान भाषा में समझते हैं कि डीडीयू परीक्षा पैटर्न (DDU Exam Pattern) को लेकर यह पूरा भ्रम क्यों और कैसे फैला।
DDU Exam Pattern : ओएमआर (OMR) से वर्णनात्मक (Descriptive) का ‘तुगलकी फरमान’
पूर्व कुलपति प्रो. पूनम टंडन के कार्यकाल में डीडीयू की वेबसाइट से लेकर परीक्षा प्रणाली तक को एक ‘प्रयोगशाला’ बना दिया गया था। इसी क्रम में, विश्वविद्यालय परीक्षा समिति ने अचानक एक फरमान जारी किया कि स्नातक (UG) और परास्नातक (PG) की मुख्य परीक्षाओं का डीडीयू परीक्षा पैटर्न (DDU Exam Pattern) अब ओएमआर (बहुविकल्पीय/MCQ) आधारित नहीं होगा, बल्कि उसे पुरानी वर्णनात्मक (Descriptive/लिखित) शैली में वापस लाया जाएगा।
प्रशासन का तर्क था कि ओएमआर (OMR) पैटर्न से छात्र केवल ‘रटने’ और ‘तुक्का मारने’ की ओर प्रवृत्त हो रहे हैं। यह बात सैद्धांतिक रूप से अच्छी लग सकती है, लेकिन इसे बीच सत्र में लागू करने का तरीका पूरी तरह से तानाशाही और अव्यावहारिक था।
छात्रों का आक्रोश: पंचम सेमेस्टर का दर्द और डीडीयू (DDU Gorakhpur) प्रशासन
इस नए डीडीयू परीक्षा पैटर्न (DDU Exam Pattern) का सबसे ज्यादा खामियाजा पंचम (5th) सेमेस्टर के छात्रों को भुगतना था। जिन छात्रों ने अपने शुरुआती चार सेमेस्टर (प्रथम, द्वितीय, तृतीय, चतुर्थ) ओएमआर पैटर्न (OMR Exams) पर पास किए थे, उन पर अचानक अंतिम वर्ष में डिस्क्रिप्टिव परीक्षा (Descriptive Exam) थोप दी गई।
आम जनता के लिए इसे एक सरल उदाहरण से समझें:
मान लीजिए, आप एक रेस दौड़ रहे हैं। आपने आधी रेस 100 मीटर स्प्रिंट (तेज़ दौड़) के नियमों से दौड़ ली है। लेकिन जब फिनिश लाइन सामने आती है, तो अंपायर अचानक कहता है कि “अब तुम्हें मैराथन (लंबी दौड़) के नियमों से दौड़ना होगा!” ज़ाहिर है, आपके पैरों में छाले पड़ जाएंगे और आप गिर पड़ेंगे।
यही स्थिति पंचम सेमेस्टर के छात्रों की हुई। उनका तर्क बिल्कुल जायज़ था कि यदि डीडीयू परीक्षा पैटर्न (DDU Exam Pattern) बदलना ही है, तो इसे केवल प्रथम सेमेस्टर के नए छात्रों पर लागू किया जाए। इसी बात को लेकर छात्रों ने प्रशासनिक भवन का घेराव किया और उग्र आंदोलन किया। नतीजतन, प्रशासन को बैकफुट पर आना पड़ा और यह प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहना पड़ा कि “अभी कोई निर्णय नहीं हुआ है।”
जनसंचार (Mass Communication) जैसे व्यावहारिक पाठ्यक्रमों की ‘आत्मा’ पर प्रहार
प्रो. टंडन के कार्यकाल में डीडीयू परीक्षा पैटर्न (DDU Exam Pattern) के साथ-साथ ‘प्रैक्टिकल’ (Practical) परीक्षाओं को भी बर्बाद करने का प्रयास किया गया।
एक सरल उदाहरण से समझें:
जनसंचार (Mass Communication) या पत्रकारिता एक ऐसा विषय है जो किताबों से नहीं, बल्कि फील्ड में कैमरा पकड़कर, लोगों से बात करके और माइक पर रिपोर्टिंग करके सीखा जाता है। यदि कोई आपको तैरना (Swimming) सिखाने के लिए पानी में उतारने के बजाय, क्लासरूम में बिठाकर सिर्फ ‘तैरने के फायदे’ लिखवाए, तो क्या आप तैराक बनेंगे? बिल्कुल नहीं।
डीडीयू प्रशासन ने ठीक यही किया। प्रो. टंडन ने अपने कार्यकाल के महज एक साल बाद ही परास्नातक (PG) स्तर से कई अनिवार्य प्रैक्टिकल (व्यावहारिक कार्य) हटा दिए और उनका मूल्यांकन भी लिखित और आंतरिक परीक्षाओं (Internal Exams) के भरोसे छोड़ दिया। एक पत्रकार या शोधकर्ता का मूल्यांकन आप केवल एक कागज के पन्ने पर रटे-रटाए उत्तरों से कैसे कर सकते हैं?
सुधार या सिर्फ दिखावा? प्रो. पूनम टंडन के कड़े फैसले
हालांकि, इस ‘पंचनामे’ में हमें निष्पक्ष (Unbiased) रहते हुए प्रो. पूनम टंडन के कुछ अच्छे फैसलों का भी ज़िक्र करना चाहिए:
फर्जीवाड़े पर रोक: संबद्ध कॉलेजों में मनमाने ढंग से प्रैक्टिकल नंबर बांटने की प्रथा पर रोक लगाने के लिए उन्होंने बाह्य परीक्षकों के लिए 30-40 सेकंड का ‘लाइव वीडियो अपलोड’ अनिवार्य किया था।
- पाठ्यक्रमों का बोझ कम करना: स्नातक स्तर पर मुख्य प्रश्नपत्रों की संख्या 6-7 से घटाकर 3 कर दी गई थी।
- लेकिन, इन तकनीकी सुधारों की सारी चमक नए डीडीयू परीक्षा पैटर्न (DDU Exam Pattern) की जिद और नीतिगत अस्थिरता के नीचे दबकर रह गई।
लोग यह भी पूछते हैं (People Also Ask – PAA): डीडीयू परीक्षा पैटर्न (DDU Exam Pattern)
प्रश्न: क्या डीडीयू परीक्षा पैटर्न (DDU Exam Pattern) पूरी तरह बदल गया है?
विश्लेषण: नहीं। प्रशासन ने ओएमआर (OMR) से डिस्क्रिप्टिव पैटर्न पर जाने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन छात्रों के भारी विरोध के कारण वर्तमान में इसे लागू नहीं किया गया है। डीडीयू (DDU Gorakhpur) की हालिया विज्ञप्ति के अनुसार, अभी भी पुरानी व्यवस्था ही लागू है।
प्रश्न: डीडीयू ने अपनी प्रेस विज्ञप्ति में क्या स्पष्टीकरण दिया है?
विश्लेषण: डीडीयू प्रशासन ने अपनी विज्ञप्ति में कहा है कि जब तक आधिकारिक वेबसाइट पर डीडीयू परीक्षा पैटर्न (DDU Exam Pattern) को लेकर कोई सूचना न आए, तब तक अखबारों की खबरों को भ्रामक माना जाए। दरअसल, यह विज्ञप्ति छात्रों के आंदोलन के बाद प्रशासन के ‘बैकफुट’ पर जाने का आधिकारिक सबूत है।
प्रश्न: क्या माइनर (Minor) विषयों का डीडीयू परीक्षा पैटर्न (DDU Exam Pattern) भी बदलेगा?
विश्लेषण: नहीं, स्नातक और परास्नातक स्तर पर सभी माइनर, वोकेशनल और को-करिकुलर विषयों के लिए बहुविकल्पीय (OMR) पैटर्न को ही स्थायी रूप से सुरक्षित रखा गया है।
निष्कर्ष: संवादहीनता का शिकार होती उच्च शिक्षा
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की यह प्रेस विज्ञप्ति महज एक सफाई नहीं है, बल्कि यह साबित करती है कि बंद कमरों में लिए गए तानाशाही फैसले कभी भी छात्रों का भला नहीं कर सकते। शिक्षा में सुधार जरूरी है, लेकिन वह थोपा नहीं जाना चाहिए।
जब तक डीडीयू परीक्षा पैटर्न (DDU Exam Pattern) को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों और शिक्षकों के साथ खुला संवाद नहीं करेगा, तब तक डीडीयू (DDU Gorakhpur) में इसी तरह का भ्रम और आंदोलन पनपता रहेगा।
सरकारी विज्ञप्ति समीक्षक - नवनीत मिश्र
पत्रकार व मीडिया शोधार्थी
जनसंचार व मीडिया अध्ययन में मास्टर

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Navneet Mishra is a seasoned journalist currently associated with Nirbhik India and its digital portal, nirbhikindia.in. With over six years of experience across print and digital platforms, Navneet specializes in politics, sports, economics, and geopolitics.
A Master’s graduate in Mass Communication from Deen Dayal Upadhyay Gorakhpur University, he is also a dedicated media scholar. His academic research focuses on “the pivotal role of Gorakhpur’s Hindi newspapers during the Indian freedom struggle against the British Crown”. Before joining Nirbhik India, Navneet spent five years at Adarsh Jeevan and gained valuable field experience at Amar Ujala Gorakhpur as training reporter only for 5 days.
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नवनीत मिश्रा वर्तमान में ‘निर्भीक इंडिया’ मीडिया समूह से जुड़े हैं। उन्होंने दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया है। पत्रकारिता के अपने 6 वर्षों के सफर में उन्होंने प्रिंट और डिजिटल दोनों डेस्क पर काम किया है। उनके शोध का विषय ब्रिटिश शासन के खिलाफ गोरखपुर के अखबारों का योगदान रहा है, जो उनकी ऐतिहासिक समझ को दर्शाता है। वे राजनीति, अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय मामलों (Geopolitics) पर निरंतर लिखते रहे हैं। ‘आदर्श जीवन’ दैनिक में 5 साल का कार्यकाल और ‘अमर उजाला’ गोरखपुर में ट्रेनिंग रिपोर्टिंग के तौर पर मात्र 5 दिन काम क्या है उनकी लेखनी को और भी निखारता है।

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