गुरूवार, सितम्बर 10, 2026
गोरखपुर समाचारउत्तर प्रदेश

DDU new VC KP Singh : लेकिन क्या सुधरेगा डीडीयू का ढर्रा?

गोरखपुर: दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय (DDU Gorakhpur University) के नए कुलपति प्रो. केपी सिंह (DDU new VC KP Singh) ने कार्यभार संभालने के बाद बुधवार को विश्वविद्यालय के अधिष्ठाताओं, विभागाध्यक्षों और निदेशकों के साथ अपनी पहली अहम बैठक की। बैठक में उन्होंने अकादमिक उत्कृष्टता (academic excellence), गुणवत्तापूर्ण शोध और बेहतर कार्य-संस्कृति पर जोर दिया।

डीडीयू के नए कुलपति प्रो. केपी सिंह (DDU new VC Prof KP Singh) का ऐलान: “I am not VC, I am a facilitator”
DDU new VC KP Singh लेकिन क्या सुधरेगा डीडीयू का ढर्रा

लेकिन, इस बैठक के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या प्रो. पूनम टंडन के कार्यकाल से चले आ रहे विवादित ढर्रे और प्रशासनिक खामियों से डीडीयू को मुक्ति मिलेगी? क्या मास कम्युनिकेशन जैसे कई विभागों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव अब दूर होगा?

डीडीयू के नए कुलपति प्रो. केपी सिंह (DDU new VC KP Singh) का ऐलान: “I am not VC, I am a facilitator”

प्रशासनिक भवन के कमेटी हॉल में आयोजित इस बैठक में डीडीयू के नए कुलपति प्रो. केपी सिंह (DDU new VC Prof KP Singh) ने एक अलग और सकारात्मक टोन सेट करने की कोशिश की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “I am not VC, I am a teacher. I am for the teacher.”

प्रो. सिंह ने आश्वस्त किया कि उनकी प्राथमिकता प्रशासनिक औपचारिकताओं में उलझने से ज्यादा, विश्वविद्यालय में एक मजबूत अकादमिक और शोध का वातावरण तैयार करना है। उन्होंने घोषणा की कि वे शिक्षकों और डीडीयू परिवार के लिए 24×7 उपलब्ध रहेंगे। यदि कोई पुराना नियम या व्यवस्था अकादमिक प्रगति में बाधक बन रही है, तो उसमें तत्काल आवश्यक बदलाव किए जाएंगे।

क्या हैं डीडीयू के नए कुलपति प्रो. केपी सिंह (DDU new VC Prof KP Singh) की चुनौतियां? (People Also Search For)

गोरखपुर के लोग अक्सर सर्च करते हैं कि डीडीयू में बार-बार विवाद क्यों होते हैं और नए कुलपति के सामने क्या प्रमुख चुनौतियां हैं। पूर्व कुलपति प्रो. पूनम टंडन के कार्यकाल में डीडीयू कई विवादों से घिरा रहा। चाहे वह छात्रों का आंदोलन हो, परीक्षाओं में अनियमितताएं हों, या शिक्षकों और प्रशासन के बीच तालमेल का अभाव हो।

इसके अलावा, जनसंचार एवं पत्रकारिता (Mass Communication and Journalism) जैसे कई महत्वपूर्ण विभागों में आज भी पूर्ण व्यवस्था और बुनियादी ढांचे का अभाव है।

नए कुलपति प्रो. केपी सिंह ने बैठक में कहा कि “गोरखपुर को पूरा देश देख रहा है, इसलिए हमारी जिम्मेदारी बढ़ जाती है।” उन्होंने प्रत्येक विभाग को अपनी वर्तमान स्थिति, कमियों और उपलब्धियों (strength and requirements) का स्व-मूल्यांकन कर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।

अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह ‘स्व-मूल्यांकन’ केवल कागजों तक सीमित रहता है या वास्तव में पत्रकारिता जैसे विभागों में संसाधनों का सूखा खत्म होता है।

इंटरडिसिप्लिनरी रिसर्च (Interdisciplinary Research) और कंसल्टेंसी पर जोर

प्रो. केपी सिंह ने अकादमिक सीमाओं को तोड़कर काम करने की वकालत की। उन्होंने कहा कि उन्हें तब विशेष प्रसन्नता होगी जब हिंदी और केमिस्ट्री, मैनेजमेंट और फिजिक्स जैसे अलग-अलग विषयों के शिक्षक मिलकर संयुक्त शोध (Joint Research) एवं प्रकाशन करेंगे। उन्होंने शिक्षकों को व्यक्तिगत संबंधों से ऊपर उठकर संस्थागत हित में काम करने और अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों से अकादमिक संपर्क बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया।

साथ ही, विश्वविद्यालय को इंडस्ट्री, कंसल्टेंसी (Consultancy) और प्रोजेक्ट आधारित गतिविधियों से मजबूती से जोड़ने का आह्वान किया गया है।

शोधार्थियों के लिए साप्ताहिक बैठक और युवाओं से संवाद (People Also Search For)

डीडीयू के छात्र अक्सर पूछते हैं कि रिसर्च की गुणवत्ता सुधारने के लिए प्रशासन क्या कर रहा है। इसे ध्यान में रखते हुए, डीडीयू के नए कुलपति प्रो. केपी सिंह (DDU new VC Prof KP Singh) ने निर्देश दिया है कि प्रत्येक विभाग में शोधार्थियों (Research Scholars) के साथ साप्ताहिक रिसर्च मीटिंग आयोजित की जाए।

उन्होंने शिक्षकों को कड़ा संदेश देते हुए कहा, “हम सभी युवाओं के लिए जिम्मेदार हैं। उनके प्रश्नों का जवाब संवेदनशीलता के साथ देना और निरंतर संवाद बनाए रखना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए।”

कुलपति का यह विजन निश्चित रूप से आशाजनक है। लेकिन, डीडीयू के इतिहास को देखते हुए, असली परीक्षा इस बात में होगी कि ये निर्देश फाइलों से बाहर निकलकर धरातल पर कैसे लागू होते हैं, और क्या यह डीडीयू को विवादों के दलदल से निकालकर सचमुच ‘राष्ट्रीय स्तर का उत्कृष्ट अकादमिक संस्थान’ बना पाएगा।

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Navneet Mishra

Navneet Mishra is a seasoned journalist currently associated with Nirbhik India and its digital portal, nirbhikindia.in. With over six years of experience across print and digital platforms, Navneet specializes in politics, sports, economics, and geopolitics.
A Master’s graduate in Mass Communication from Deen Dayal Upadhyay Gorakhpur University, he is also a dedicated media scholar. His academic research focuses on “the pivotal role of Gorakhpur’s Hindi newspapers during the Indian freedom struggle against the British Crown”. Before joining Nirbhik India, Navneet spent five years at Adarsh Jeevan and gained valuable field experience at Amar Ujala Gorakhpur as training reporter only for 5 days.
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नवनीत मिश्रा वर्तमान में ‘निर्भीक इंडिया’ मीडिया समूह से जुड़े हैं। उन्होंने दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया है। पत्रकारिता के अपने 6 वर्षों के सफर में उन्होंने प्रिंट और डिजिटल दोनों डेस्क पर काम किया है। उनके शोध का विषय ब्रिटिश शासन के खिलाफ गोरखपुर के अखबारों का योगदान रहा है, जो उनकी ऐतिहासिक समझ को दर्शाता है। वे राजनीति, अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय मामलों (Geopolitics) पर निरंतर लिखते रहे हैं। ‘आदर्श जीवन’ दैनिक में 5 साल का कार्यकाल और ‘अमर उजाला’ गोरखपुर में ट्रेनिंग रिपोर्टिंग के तौर पर मात्र 5 दिन काम क्या है उनकी लेखनी को और भी निखारता है।

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Navneet Mishra is a seasoned journalist currently associated with Nirbhik India and its digital portal, nirbhikindia.in. With over six years of experience across print and digital platforms, Navneet specializes in politics, sports, economics, and geopolitics. A Master’s graduate in Mass Communication from Deen Dayal Upadhyay Gorakhpur University, he is also a dedicated media scholar. His academic research focuses on "the pivotal role of Gorakhpur’s Hindi newspapers during the Indian freedom struggle against the British Crown". Before joining Nirbhik India, Navneet spent five years at Adarsh Jeevan and gained valuable field experience at Amar Ujala Gorakhpur as training reporter only for 5 days. ---------------------------------------------------------------------------------- नवनीत मिश्रा वर्तमान में 'निर्भीक इंडिया' मीडिया समूह से जुड़े हैं। उन्होंने दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया है। पत्रकारिता के अपने 6 वर्षों के सफर में उन्होंने प्रिंट और डिजिटल दोनों डेस्क पर काम किया है। उनके शोध का विषय ब्रिटिश शासन के खिलाफ गोरखपुर के अखबारों का योगदान रहा है, जो उनकी ऐतिहासिक समझ को दर्शाता है। वे राजनीति, अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय मामलों (Geopolitics) पर निरंतर लिखते रहे हैं। 'आदर्श जीवन' दैनिक में 5 साल का कार्यकाल और 'अमर उजाला' गोरखपुर में ट्रेनिंग रिपोर्टिंग के तौर पर मात्र 5 दिन काम क्या है उनकी लेखनी को और भी निखारता है।

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