बलरामपुरउत्तर प्रदेश

उद्यमिता एवं नवाचार (Entrepreneurship Innovation) पर आयोजन

बलरामपुर (निर्भीक इंडिया ब्यूरो): उद्यमिता एवं नवाचार (Entrepreneurship Innovation) को बढ़ावा देने और ग्रामीण व कस्बाई युवाओं में आत्मनिर्भरता की नई अलख जगाने के उद्देश्य से माँ पाटेश्वरी विश्वविद्यालय में ‘सेवा संकल्प माह’ के अंतर्गत एक दिवसीय जिलास्तरीय सेमिनार (District Level Seminar) एवं बिजनेस आइडिया प्रेजेंटेशन का भव्य आयोजन संपन्न हुआ।

उद्यमिता एवं नवाचार (Entrepreneurship Innovation): एमपीपी इंटर कॉलेज और विश्वविद्यालय टीम ने मारी बाजी
उद्यमिता एवं नवाचार (Entrepreneurship Innovation) पर आयोजन

विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित इस ज्ञानोत्सव में जनपद के विभिन्न विद्यालयों, डिग्री कॉलेजों और तकनीकी शिक्षण संस्थानों के छात्र-छात्राओं ने अपनी मौलिक सोच, तकनीकी कौशल और स्थानीय संसाधनों पर आधारित भविष्योन्मुखी व्यावसायिक मॉडल प्रस्तुत किए।

निर्भीक इंडिया (Nirbhik India) की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रतियोगिता में स्कूली और उच्च शिक्षण दोनों वर्गों के बीच जबर्दस्त बौद्धिक मुकाबला देखने को मिला। अंतरमहाविद्यालयीय (इंटर कॉलेज) वर्ग में नवाचारी सोच का लोहा मनवाते हुए एमपीपी इंटर कॉलेज (MPP Inter College Balrampur) ने प्रथम स्थान पर कब्जा जमाया।

वहीं राजकीय बालिका इंटर कॉलेज (GGIC) उतरौला ने दूसरा और बलरामपुर बालिका इंटर कॉलेज ने तीसरा स्थान प्राप्त किया। दूसरी तरफ विश्वविद्यालय एवं उच्च तकनीकी कॉलेज संवर्ग में माँ पाटेश्वरी विश्वविद्यालय की टीम चैंपियन बनी, जबकि गवर्नमेंट पॉलिटेक्निक घुघुलपुर को द्वितीय तथा डीडीयू-जीकेवाई पॉलिटेक्निक कॉलेज को तृतीय स्थान से संतोष करना पड़ा।

उद्यमिता एवं नवाचार (Entrepreneurship Innovation): एमपीपी इंटर कॉलेज और विश्वविद्यालय टीम ने मारी बाजी

जनपद बलरामपुर के युवा अब केवल परंपरागत नौकरियों के पीछे भागने के बजाय खुद रोजगार प्रदाता (Job Creator) बनने की दिशा में सोचने लगे हैं। विश्वविद्यालय के वाणिज्य संकाय (School of Commerce) के मुख्य समन्वयक डॉ. धर्मेंद्र कुमार और सह-समन्वयक अनिमा तिवारी के कुशल संयोजन में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों की सुप्त प्रतिभा को मंच प्रदान करना और उनके अभिनव प्रयोगों को व्यावहारिक स्टार्टअप में बदलना था।

प्रतियोगिता के परिणाम घोषित होते ही विश्वविद्यालय सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा:

स्कूल एवं इंटर कॉलेज वर्ग:
  • प्रथम पुरस्कार (विजेता): एमपीपी इंटर कॉलेज, बलरामपुर (नवीन तकनीक और छात्र मार्गदर्शन का प्रभावी मॉडल)।
  • द्वितीय पुरस्कार (उपविजेता): जीजीआईसी (GGIC), उतरौला (पर्यावरण और कृषि अपशिष्ट प्रबंधन मॉडल)।
  • तृतीय पुरस्कार: बलरामपुर बालिका इंटर कॉलेज (पुष्प पुनर्चक्रण आधारित सामाजिक उद्यमिता)।
विश्वविद्यालय, डिग्री कॉलेज एवं पॉलिटेक्निक संवर्ग:
  • प्रथम पुरस्कार (विजेता): माँ पाटेश्वरी विश्वविद्यालय की टीम (खाद्य एवं आतिथ्य सेवा क्षेत्र में ‘स्ट्रीट बाइट’ प्रोजेक्ट)।
  • द्वितीय पुरस्कार (उपविजेता): राजकीय पॉलिटेक्निक घुघुलपुर (‘ऑयलसेतु’ तकनीकी परियोजना)।
  • तृतीय पुरस्कार: डीडीयू-जीकेवाई पॉलिटेक्निक कॉलेज (‘नेचर केयर’ पर्यावरण सुरक्षा पहल)।

उद्यमिता एवं नवाचार (Entrepreneurship Innovation) में ‘स्ट्रीट बाइट’ और ‘मिट्टी से ठंडक’ मॉडल

निर्भीक इंडिया (Nirbhik India) की टीम ने प्रदर्शनी में शामिल विद्यार्थियों के प्रोजेक्ट्स का बारीकी से अध्ययन किया। छात्रों के मॉडल किसी बड़ी मल्टीनेशनल कंपनी के महंगे प्रोजेक्ट्स से प्रेरित नहीं थे, बल्कि वे तराई क्षेत्र की रोजमर्रा की समस्याओं के बेहद सस्ते, पर्यावरण-अनुकूल और व्यावहारिक समाधान पेश कर रहे थे:

  • ‘स्ट्रीट बाइट’ (Street Byte) – फूड सेक्टर में नया प्रयोग: विश्वविद्यालय की विजेता टीम ने स्ट्रीट फूड वेंडर्स के काम को हाइजीनिक, डिजिटल और संगठित बनाने के लिए ‘स्ट्रीट बाइट’ मॉडल प्रस्तुत किया। इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य स्थानीय रेहड़ी-पटरी वालों को आधुनिक पैकेजिंग, डिजिटल भुगतान और गुणवत्ता मानकों से जोड़कर एक ब्रांडेड फूड चेन के रूप में विकसित करना है, जिससे कम लागत में हजारों युवाओं को रोजगार मिल सके।
  • ‘मिट्टी से ठंडक’ – बिना बिजली का प्राकृतिक फ्रिज: एमडीके बालिका इंटर कॉलेज की छात्राओं ने पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा संकट को ध्यान में रखते हुए पारंपरिक कुम्हारी कला और आधुनिक थर्मोडायनामिक्स के सिद्धांत पर ‘मिट्टी से ठंडक’ मॉडल तैयार किया। यह उपकरण बिना बिजली के वाष्पीकरण (Evaporation) तकनीक से सब्जियों, फलों और दवाओं को लंबे समय तक ताजा रखने में सक्षम है। ग्रामीण अंचलों में जहां बिजली कटौती आम समस्या है, वहां यह मॉडल बेहद क्रांतिकारी साबित हो सकता है।
  • पारंपरिक हस्तशिल्प और कला से आजीविका: अखिलेश्वर तिवारी गर्ल्स इंटर कॉलेज, तुलसीपुर की छात्राओं ने थारू जनजाति और तराई की समृद्ध पारंपरिक कला, कढ़ाई और हस्तशिल्प को आधुनिक ई-कॉमर्स बाजार से जोड़ने का जीवंत खाका पेश किया। छात्राओं ने दिखाया कि कैसे घर बैठे ग्रामीण महिलाएं अपने हुनर से आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकती हैं।

उद्यमिता एवं नवाचार (Entrepreneurship Innovation): धार्मिक अपशिष्ट से ‘पुष्पा पुनर्जन्म’ और ‘खेत अवशेष बैंक’

अपशिष्ट प्रबंधन (Waste Management) और प्रदूषण नियंत्रण को लेकर छात्राओं द्वारा पेश किए गए विचार सेमिनार के सबसे बड़े आकर्षण का केंद्र रहे:

  • ‘पुष्पा पुनर्जन्म’ – आस्था के फूलों का सम्मानजनक उपयोग: बलरामपुर बालिका इंटर कॉलेज की छात्राओं ने शक्तिपीठ देवीपाटन मंदिर समेत जिले के प्रमुख धार्मिक स्थलों से निकलने वाले क्विंटलों प्रयुक्त फूलों के प्रबंधन के लिए ‘पुष्पा पुनर्जन्म’ परियोजना पेश की। इन फूलों को नदियों में बहाकर जल प्रदूषित करने के बजाय उनसे प्राकृतिक अगरबत्ती, धूपबत्ती, जैविक खाद और हर्बल गुलाल बनाने का पूरा व्यावसायिक ढांचा प्रदर्शित किया गया।
  • ‘खेत अवशेष बैंक’ और ‘इको-धन’ – पराली का समाधान: जीजीआईसी उतरौला की छात्राओं ने उत्तर भारत की सबसे ज्वलंत समस्या ‘पराली दहन’ का स्थानीय समाधान निकाला। उन्होंने ‘खेत अवशेष बैंक’ (Crop Residue Bank) तथा ‘इको-धन एवं वेस्ट टू वेल्थ’ मॉडल के तहत दिखाया कि कैसे धान और गन्ने की सूखी पत्तियों को एकत्र कर उनसे बायोमास ब्रिकेट्स (ईंधन), पैकेजिंग गत्ते और जैविक कम्पोस्ट तैयार किया जा सकता है। यह मॉडल किसानों को पराली जलाने से रोकने के साथ ही उनकी अतिरिक्त आय का जरिया भी बन सकता है।

उद्यमिता एवं नवाचार (Entrepreneurship Innovation) में ‘ऑयलसेतु’ और गतिज ऊर्जा से बिजली बनाने का प्रयोग

तकनीकी शिक्षण संस्थानों के छात्रों ने इंजीनियरिंग और दैनिक विज्ञान के अनूठे प्रयोगों से विशेषज्ञों को प्रभावित किया:

  • ‘ऑयलसेतु’ (OilSetu) – प्रयुक्त तेल का सुरक्षित प्रबंधन: गवर्नमेंट पॉलिटेक्निक घुघुलपुर के छात्रों ने ‘ऑयलसेतु’ प्रोजेक्ट प्रदर्शित किया। इसके तहत होटलों और घरों से निकलने वाले जले हुए खाद्य तेल (Used Cooking Oil) को एकत्र कर उसे बायोडीजल और साबुन उद्योग के लिए आपूर्ति करने का लॉजिस्टिक नेटवर्क तैयार किया गया है। यह मॉडल स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों की सुरक्षा करता है।
  • गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy) से बिजली उत्पादन: डीएवी इंटर कॉलेज के विद्यार्थियों ने सड़कों के स्पीड ब्रेकर और फुटपाथों पर चलने वाले लोगों के दबाव से बिजली उत्पन्न करने का ‘पीजोइलेक्ट्रिक एवं काइनेटिक’ मॉडल प्रस्तुत किया।
  • ‘नेचर केयर’ और युवा मार्गदर्शन: डीडीयू-जीकेवाई पॉलिटेक्निक की टीम ने ‘नेचर केयर’ के जरिए रासायनिक उर्वरकों के दुष्प्रभाव से मिट्टी को बचाने का संदेश दिया। वहीं एमएलके पीजी कॉलेज, बसंत लाल इंटर कॉलेज और एमपीपी इंटर कॉलेज के छात्रों ने आधुनिक सूचना प्रौद्योगिकी और डिजिटल मेंटरशिप पर अपने विचार रखे। एमडीके इंटर कॉलेज, डीडीयू-जीकेवाई पॉलिटेक्निक और जीजीआईसी उतरौला की शिक्षिकाओं ने भी सक्रिय भागीदारी निभाते हुए छात्राओं का मार्गदर्शन किया।

नवाचार और स्टार्टअप से ही साकार होगा आत्मनिर्भर भारत

कार्यक्रम में तकनीकी और सामाजिक क्षेत्र की कई जानी-मानी हस्तियों ने ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यम से शिरकत कर विद्यार्थियों का हौसला बढ़ाया। अविष्कार फाउंडेशन (Avishkar Foundation) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) विपुल कुमार और लीजा ने अमेरिका/बेंगलुरु से वर्चुअल माध्यम से जुड़ते हुए कहा कि आज की दुनिया में नवाचार केवल डिग्री से नहीं, बल्कि समस्याओं को हल करने की जिज्ञासा से पैदा होता है। उन्होंने बलरामपुर के विद्यार्थियों के मॉडल्स की भूरी-भूरी प्रशंसा की और चयनित परियोजनाओं को मेंटरशिप व सीड फंडिंग दिलाने में सहयोग का आश्वासन दिया।

समारोह में रोहित साहू, देवव्रत, आयुष सिंह, अरुण कुमार सोनी, वरुण कुमार सिंह, रजत सिंह और आराधना मिश्रा समेत कई गणमान्य अतिथियों ने उपस्थित रहकर छात्रों के मॉडल्स का मूल्यांकन किया और उन्हें स्टार्टअप शुरू करने के व्यावहारिक टिप्स दिए। इस पूरे आयोजन को सफल बनाने में सूर्य मणि एजुकेशन ट्रस्ट (Suryamani Education Trust) की समर्पित टीम ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

समापन सत्र में विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा सभी प्रतिभागी छात्र-छात्राओं और विजेता टीमों को प्रमाण-पत्र व स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया। वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि स्थानीय संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग और स्वरोजगार के नए अवसर ही विकसित भारत और आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश की मजबूत नींव बनेंगे।

जिलास्तरीय नवाचार प्रतियोगिता परिणाम चार्ट

पाठकों और विद्यार्थियों की सुविधा के लिए इस सेमिनार के सभी विजेताओं और प्रमुख परियोजनाओं का संक्षिप्त विवरण नीचे तालिका में दिया गया है:

वर्ग / श्रेणीस्थानसंस्थान का नामप्रमुख प्रोजेक्ट / विचार
इंटर कॉलेज संवर्गप्रथम (विजेता)एमपीपी इंटर कॉलेज, बलरामपुरडिजिटल तकनीक, नवाचार व विद्यार्थी मार्गदर्शन
इंटर कॉलेज संवर्गद्वितीय (उपविजेता)जीजीआईसी (GGIC), उतरौला‘खेत अवशेष बैंक’ व ‘वेस्ट टू वेल्थ’
इंटर कॉलेज संवर्गतृतीयबलरामपुर बालिका इंटर कॉलेज‘पुष्पा पुनर्जन्म’ (मंदिरों के फूलों का पुनर्चक्रण)
विश्वविद्यालय / पॉलिटेक्निकप्रथम (विजेता)माँ पाटेश्वरी विश्वविद्यालय‘स्ट्रीट बाइट’ (हाइजीनिक फूड सर्विस स्टार्टअप)
विश्वविद्यालय / पॉलिटेक्निकद्वितीय (उपविजेता)गवर्नमेंट पॉलिटेक्निक घुघुलपुर‘ऑयलसेतु’ (प्रयुक्त खाद्य तेल प्रबंधन)
विश्वविद्यालय / पॉलिटेक्निकतृतीयडीडीयू-जीकेवाई पॉलिटेक्निक कॉलेज‘नेचर केयर’ (पर्यावरण व प्राकृतिक संसाधन संरक्षण)
विशेष उल्लेखनवाचारी मॉडलएमडीके बालिका इंटर कॉलेज‘मिट्टी से ठंडक’ (प्राकृतिक शीतलन प्रणाली)
विशेष उल्लेखआजीविका मॉडलअखिलेश्वर तिवारी गर्ल्स इंटर कॉलेज, तुलसीपुरपारंपरिक हस्तशिल्प और कला से रोजगार

युवा और छात्र अक्सर क्या पूछ रहे हैं? (People Also Ask)

प्र. 1: माँ पाटेश्वरी विश्वविद्यालय में आयोजित जिलास्तरीय सेमिनार का मुख्य विषय क्या था?

उत्तर: सेमिनार का मुख्य विषय “आर्थिक उद्यमिता एवं नवाचार” (Economic Entrepreneurship Innovation) था, जिसे ‘सेवा संकल्प माह’ के अंतर्गत आयोजित किया गया था।

प्र. 2: अंतर-महाविद्यालयीय वर्ग में किस कॉलेज ने प्रथम स्थान हासिल किया?

उत्तर: इंटर कॉलेज वर्ग में एमपीपी इंटर कॉलेज, बलरामपुर ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। जीजीआईसी उतरौला दूसरे और बलरामपुर बालिका इंटर कॉलेज तीसरे स्थान पर रहे।

प्र. 3: उच्च शिक्षण व तकनीकी संवर्ग में कौन-सी टीमें विजेता बनीं?

उत्तर: विश्वविद्यालय एवं पॉलिटेक्निक संवर्ग में माँ पाटेश्वरी विश्वविद्यालय की टीम ने पहला, गवर्नमेंट पॉलिटेक्निक घुघुलपुर ने दूसरा तथा डीडीयू-जीकेवाई पॉलिटेक्निक ने तीसरा स्थान प्राप्त किया।

प्र. 4: छात्रों द्वारा प्रस्तुत ‘पुष्पा पुनर्जन्म’ और ‘खेत अवशेष बैंक’ प्रोजेक्ट्स क्या हैं?

उत्तर: ‘पुष्पा पुनर्जन्म’ धार्मिक स्थलों पर चढ़ने वाले फूलों से अगरबत्ती व जैविक उत्पाद बनाने का प्रोजेक्ट है, जबकि ‘खेत अवशेष बैंक’ पराली और कृषि अपशिष्ट से बायोमास ईंधन व कम्पोस्ट बनाने का मॉडल है।

उद्यमिता एवं नवाचार (Entrepreneurship Innovation) का यह आयोजन साबित करता है कि बलरामपुर और देवीपाटन मंडल के युवाओं में प्रतिभा और उद्यमशीलता की कोई कमी नहीं है। सही मार्गदर्शन और सरकारी प्रोत्साहन मिलने पर ये छात्र आने वाले समय में देश के अग्रणी स्टार्टअप फाउंडर्स बन सकते हैं। निर्भीक इंडिया (Nirbhik India) युवाओं की इसी सकारात्मक सोच और विकासोन्मुख पहल को हमेशा प्रमुखता से मंच प्रदान करता रहेगा।

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