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गोरखपुर फटाफट (Gorakhpur Fatafat): 11 अगस्त

निर्भीक इंडिया के आज के गोरखपुर फटाफट बुलेटिन में पढ़िए आबकारी विभाग की अवैध शराब पर बड़ी कार्रवाई, रेल यात्रियों के लिए नई सौगात और पुलिस महकमे में हुए अहम फेरबदल की खबरें। इसके अलावा विश्वविद्यालय की शैक्षिक उपलब्धि और शहर भर में तिरंगा यात्रा की धूम भी आज की खास सुर्खियां हैं।

गोरखपुर फटाफट (Gorakhpur Fatafat) : गोरखपुर आबकारी विभाग (Gorakhpur Excise Department) की छापेमारी
गोरखपुर फटाफट (Gorakhpur Fatafat) 11 अगस्त

गोरखपुर फटाफट (Gorakhpur Fatafat) : गोरखपुर आबकारी विभाग (Gorakhpur Excise Department) की छापेमारी

गोरखपुर में अवैध शराब के खिलाफ प्रशासन सख्त हो गया है। गोरखपुर आबकारी विभाग (Gorakhpur Excise Department) के निर्देश पर 10 अगस्त की सुबह कैम्पियरगंज और राजघाट थाना क्षेत्र के अंतर्गत सघन छापेमारी अभियान चलाया गया। चकराआयुल गांव में दबिश देकर टीम ने 75 लीटर कच्ची शराब बरामद की है और मौके पर आबकारी अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। इसके साथ ही कई सरकारी शराब की दुकानों का औचक निरीक्षण भी किया गया। इस कार्रवाई से इलाके में शराब माफियाओं में हड़कंप है। जनता के स्वास्थ्य और सुरक्षा को देखते हुए यह कदम बेहद अहम है, जिससे नशे के अवैध कारोबार पर लगाम लगेगी।

गोरखपुर फटाफट (Gorakhpur Fatafat) : पूर्वोत्तर रेलवे (North Eastern Railway) की नई सौगात

रेल यात्रियों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर है। पूर्वोत्तर रेलवे (North Eastern Railway) प्रशासन ने यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए लोकमान्य तिलक टर्मिनस-बलिया-लोकमान्य तिलक टर्मिनस एक्सप्रेस (11071/11072) को करीमुद्दीनपुर स्टेशन पर दो मिनट का प्रायोगिक ठहराव देने का निर्णय लिया है। यह सुविधा 16 अगस्त 2026 से लागू होगी। अब मुंबई या बलिया जाने वाले स्थानीय निवासियों को करीमुद्दीनपुर स्टेशन पर ही यह ट्रेन मिल सकेगी। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि क्षेत्र के व्यापार और आवागमन को भी नई गति मिलेगी। रेलवे का यह फैसला त्योहारी सीजन में आम जनता के लिए काफी फायदेमंद साबित होगा।

रेलवे राजभाषा विभाग (Railway Official Language Department) की प्रतियोगिता

गोरखपुर रेलवे प्रेक्षागृह में रेलवे राजभाषा विभाग (Railway Official Language Department) के तत्वावधान में ‘क्षेत्रीय रेलवे हिन्दी नाटक प्रतियोगिता-2026’ का शानदार आयोजन किया गया। उप मुख्य राजभाषा अधिकारी मनोज मिश्रा ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस सांस्कृतिक महाकुंभ में वाराणसी मंडल ने ‘शतरंज के खिलाड़ी’ नाटक से प्रथम स्थान हासिल किया, जबकि गोरखपुर मुख्यालय और लखनऊ मंडल क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे। नाटकों के जरिए महिला सशक्तिकरण, सोशल मीडिया के दुष्प्रभाव और पारिवारिक मूल्यों पर गहरा संदेश दिया गया। इस आयोजन का सीधा असर कर्मचारियों और स्थानीय जनता की सांस्कृतिक चेतना पर पड़ेगा, जिससे समाज में कला और साहित्य को बढ़ावा मिलेगा।

दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय (DDU Gorakhpur University) की उपलब्धि

शिक्षा के क्षेत्र में गोरखपुर का नाम एक बार फिर रोशन हुआ है। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय (DDU Gorakhpur University) के भौतिक विज्ञान विभाग के होनहार छात्र आलोक कुमार का चयन प्रतिष्ठित राष्ट्रीय ‘डीएसटी इंस्पायर फेलोशिप’ के लिए हुआ है। आलोक अब खगोल भौतिकी (एस्ट्रोफिजिक्स) जैसे जटिल विषय में शोध कार्य करेंगे। उनकी इस सफलता से न केवल विश्वविद्यालय बल्कि पूरे पूर्वांचल में खुशी की लहर है। यह फेलोशिप स्थानीय युवाओं और छात्रों के लिए एक बड़ी प्रेरणा है। इससे साबित होता है कि सही मार्गदर्शन मिलने पर यहां के युवा वैज्ञानिक शोध के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर अपना और शहर का परचम लहरा सकते हैं।

क्षेत्रीय खेल कार्यालय (Regional Sports Office) की तिरंगा रैली

स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में पूरे शहर में देशभक्ति का माहौल है। इसी कड़ी में क्षेत्रीय खेल कार्यालय (Regional Sports Office) द्वारा रीजनल स्पोर्ट्स स्टेडियम, गोरखपुर में एक भव्य तिरंगा रैली का आयोजन किया गया। इस राष्ट्रव्यापी ‘हर घर तिरंगा’ अभियान में स्टेडियम के अधिकारियों, खेल प्रशिक्षकों और लगभग 210 प्रतिभावान खिलाड़ियों ने पूरे उत्साह के साथ हिस्सा लिया। हाथों में तिरंगा लिए खिलाड़ियों ने जब मार्च किया, तो पूरे क्षेत्र में राष्ट्रीय गौरव का संचार हो गया। इस तरह के आयोजनों से न केवल युवाओं और खिलाड़ियों में देशभक्ति की भावना मजबूत होती है, बल्कि समाज में एकजुटता और राष्ट्रीयता का सकारात्मक संदेश भी जाता है।

सेंट एंड्रयूज डिग्री कॉलेज (St. Andrews Degree College) का अभियान

स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर सेंट एंड्रयूज डिग्री कॉलेज (St. Andrews Degree College) में ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के तीसरे संस्करण का भव्य आयोजन हुआ। प्राचार्या रैना सैमुएल के कुशल नेतृत्व में एनसीसी, एनएसएस और रोवर्स-रेंजर्स के सैकड़ों कैडेट्स ने एक विशाल पदयात्रा निकाली। इस रैली का मुख्य उद्देश्य शहरवासियों को देशभक्ति के प्रति जागरूक करना और उन्हें डिजिटल रूप से सरकारी पोर्टल पर जुड़ने के लिए प्रेरित करना था। युवाओं की इस सक्रिय भागीदारी से शहर की जनता में खासा उत्साह देखने को मिला। ऐसे आयोजनों से आम नागरिकों में राष्ट्र प्रेम की अलख जगती है और डिजिटल अभियानों को भी भारी समर्थन मिलता है।

गोरखपुर पुलिस (Gorakhpur Police) में बड़ा फेरबदल

कानून व्यवस्था को और अधिक चुस्त-दुरुस्त बनाने के लिए प्रशासन ने गोरखपुर पुलिस (Gorakhpur Police) महकमे में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। सिकरीगंज क्षेत्र में पुलिसिंग को बेहतर करने के उद्देश्य से वहां के प्रभारी निरीक्षक अंजुल कुमार चतुर्वेदी को तत्काल प्रभाव से हटाकर पुलिस लाइन भेज दिया गया है। उनके स्थान पर पैडलेगंज चौकी प्रभारी आशीष कुमार दुबे को सिकरीगंज का नया थानाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। इस फेरबदल का सीधा असर स्थानीय कानून व्यवस्था पर पड़ेगा। नई तैनाती से आम जनता को उम्मीद है कि अपराध पर त्वरित लगाम लगेगी और क्षेत्र में पुलिस की कार्यप्रणाली अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनेगी।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (Senior Superintendent of Police) की जनसुनवाई

आम जनता को त्वरित न्याय दिलाने के उद्देश्य से वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (Senior Superintendent of Police) ने गोरखपुर पुलिस कार्यालय में विशेष जनसुनवाई का आयोजन किया। दूर-दराज के ग्रामीण और शहरी इलाकों से आए दर्जनों फरियादियों ने सीधे कप्तान के सामने अपनी समस्याएं रखीं। एसएसपी ने मामलों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित थाना प्रभारियों को कड़े निर्देश दिए हैं कि सभी शिकायतों का पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से निस्तारण किया जाए। इस पहल से आम जनता का पुलिस प्रशासन पर भरोसा मजबूत होगा। यह सुनिश्चित करेगा कि पीड़ितों को थानों के चक्कर न लगाने पड़ें और उन्हें सही समय पर निष्पक्ष न्याय मिल सके।

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Navneet Mishra

Navneet Mishra is a seasoned journalist currently associated with Nirbhik India and its digital portal, nirbhikindia.in. With over six years of experience across print and digital platforms, Navneet specializes in politics, sports, economics, and geopolitics.
A Master’s graduate in Mass Communication from Deen Dayal Upadhyay Gorakhpur University, he is also a dedicated media scholar. His academic research focuses on “the pivotal role of Gorakhpur’s Hindi newspapers during the Indian freedom struggle against the British Crown”. Before joining Nirbhik India, Navneet spent five years at Adarsh Jeevan and gained valuable field experience at Amar Ujala Gorakhpur as training reporter only for 5 days.
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नवनीत मिश्रा वर्तमान में ‘निर्भीक इंडिया’ मीडिया समूह से जुड़े हैं। उन्होंने दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया है। पत्रकारिता के अपने 6 वर्षों के सफर में उन्होंने प्रिंट और डिजिटल दोनों डेस्क पर काम किया है। उनके शोध का विषय ब्रिटिश शासन के खिलाफ गोरखपुर के अखबारों का योगदान रहा है, जो उनकी ऐतिहासिक समझ को दर्शाता है। वे राजनीति, अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय मामलों (Geopolitics) पर निरंतर लिखते रहे हैं। ‘आदर्श जीवन’ दैनिक में 5 साल का कार्यकाल और ‘अमर उजाला’ गोरखपुर में ट्रेनिंग रिपोर्टिंग के तौर पर मात्र 5 दिन काम क्या है उनकी लेखनी को और भी निखारता है।

Navneet Mishra

Navneet Mishra is a seasoned journalist currently associated with Nirbhik India and its digital portal, nirbhikindia.in. With over six years of experience across print and digital platforms, Navneet specializes in politics, sports, economics, and geopolitics. A Master’s graduate in Mass Communication from Deen Dayal Upadhyay Gorakhpur University, he is also a dedicated media scholar. His academic research focuses on "the pivotal role of Gorakhpur’s Hindi newspapers during the Indian freedom struggle against the British Crown". Before joining Nirbhik India, Navneet spent five years at Adarsh Jeevan and gained valuable field experience at Amar Ujala Gorakhpur as training reporter only for 5 days. ---------------------------------------------------------------------------------- नवनीत मिश्रा वर्तमान में 'निर्भीक इंडिया' मीडिया समूह से जुड़े हैं। उन्होंने दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया है। पत्रकारिता के अपने 6 वर्षों के सफर में उन्होंने प्रिंट और डिजिटल दोनों डेस्क पर काम किया है। उनके शोध का विषय ब्रिटिश शासन के खिलाफ गोरखपुर के अखबारों का योगदान रहा है, जो उनकी ऐतिहासिक समझ को दर्शाता है। वे राजनीति, अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय मामलों (Geopolitics) पर निरंतर लिखते रहे हैं। 'आदर्श जीवन' दैनिक में 5 साल का कार्यकाल और 'अमर उजाला' गोरखपुर में ट्रेनिंग रिपोर्टिंग के तौर पर मात्र 5 दिन काम क्या है उनकी लेखनी को और भी निखारता है।

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