Gorakhpur Waterlogging News : निर्भीक इंडिया ने चेताया था
Gorakhpur Waterlogging News गोरखपुर की जमीनी हकीकत आज उन चाटुकार अखबारों और मीडिया घरानों के मुंह पर एक करारा तमाचा है, जो केवल सत्ता और प्रशासन की वाहवाही में लगे रहते हैं। 26 सितंबर की शाम 4 से 7 बजे के बीच मात्र 3 घंटे की बारिश ने ‘स्मार्ट सिटी’ गोरखपुर के ड्रेनेज सिस्टम (जल निकासी प्रबंधन) को पूरी तरह से नंगा कर दिया। 170 मिलीमीटर वर्षा (जिसमें से 120 मिलीमीटर केवल एक घंटे में) हुई और पूरा शहर एक विशाल तालाब में तब्दील हो गया।

अब अपनी इस घोर नाकामी को छिपाने और ‘डैमेज कंट्रोल’ करने के लिए गोरखपुर नगर निगम ने एक लंबी-चौड़ी प्रेस रिलीज जारी कर अपनी ‘तत्परता और समर्पण’ का गुणगान किया है। लेकिन ‘निर्भीक इंडिया’ आज इस प्रेस रिलीज का चीरहरण करेगा और बताएगा कि कैसे एक सप्ताह पहले जारी की गई हमारी सटीक चेतावनी के बावजूद पूरा प्रशासन और जनप्रतिनिधि कान में तेल डालकर सोते रहे।
Gorakhpur Waterlogging News : ‘निर्भीक इंडिया’ ने एक सप्ताह पहले ही दी थी चेतावनी
जलभराव कोई प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि प्रशासन की मानव-निर्मित विफलता है। ‘निर्भीक इंडिया’ ने अपनी साप्ताहिक मौसम रिपोर्ट में एक सप्ताह पूर्व ही इस भयावह स्थिति की सटीक भविष्यवाणी कर दी थी। हमारे समाचार पत्र में “जाते जाते बरस सकते हैं बादल” शीर्षक से प्रमुखता से खबर प्रकाशित की गई थी। उस रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से “सप्ताहांत पर भारी बारिश और वज्रपात की चेतावनी” जारी की गई थी।
हमने जनसंचार और मौसम विज्ञान के कड़े विश्लेषण के आधार पर अपनी रिपोर्ट में साफ लिखा था कि 26 सितंबर यानी शनिवार को गोरखपुर में भारी बारिश के साथ भयंकर वज्रपात होगा और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से झक्कड़ हवाएं चलेंगी।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया था कि सापेक्षता आर्द्रता 90% तक पहुंच जाएगी और इसके लिए मौसम विभाग का ‘येलो अलर्ट’ (Yellow Alert) भी जारी किया गया था। लेकिन इस Gorakhpur Waterlogging News के आने से पहले, क्या नगर निगम ने हमारी इस चेतावनी को गंभीरता से लिया? बिल्कुल नहीं!
Gorakhpur Waterlogging News : जाते-जाते मानसून ने खोली नगर निगम की पोल: Gorakhpur Weather Alert
इस पूरे सीजन में गोरखपुर में सामान्य से कम बारिश हुई थी। नगर निगम के पास पूरे शहर के नालों (Drainage) और संपवेल (Sumpwell) की डी-सिल्टिंग (De-silting) और सफाई के लिए पर्याप्त समय था। लेकिन ‘निर्भीक इंडिया’ के [Gorakhpur Weather Alert] और ‘जाते-जाते मानसून’ व अर्नव चक्रवात के संभावित खतरे की अनदेखी की गई।
जब 26 सितंबर को आसमान फटा और महज एक घंटे में 120 मिलीमीटर पानी गिरा, तो शहर का सीवर सिस्टम चोक हो गया। यह बारिश उस कमी को पूरा कर गई जो पूरे सीजन नहीं हुई थी, और साथ ही नगर निगम के प्री-मानसून सफाई के दावों को भी बहा ले गई।
अधिकारी से लेकर सांसद तक… सब रहे नदारद
इस भीषण Gorakhpur Waterlogging News का सबसे दुखद पहलू यह है कि जब ‘निर्भीक इंडिया’ लगातार अपनी रिपोर्ट के माध्यम से प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दे रहा था, तब गोरखपुर के अधिकारी से लेकर स्थानीय सांसद तक सब कान में तेल डालकर बैठे रहे।
नगर निगम की अपनी ‘इमेज चमकाने’ वाली प्रेस रिलीज में लिखा है कि माननीय सांसद श्री रवि किशन शुक्ला ने भारी बारिश के बाद जीडीए (GDA) कॉलोनी, लालडिग्गी, किराना मंडी आदि क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण किया और पंपों का जायजा लिया।
शहर की जनता पूछ रही है कि जब मौसम विभाग का अलर्ट था, तब आपदा प्रबंधन की पूर्व-बैठकें (Pre-planning meetings) क्यों नहीं की गईं? पानी भरने के बाद सड़कों पर उतरकर फोटो खिंचवाना और निर्देश देना महज एक राजनीतिक पीआर स्टंट (PR Stunt) है, जिसे जनता अब भली-भांति समझ चुकी है।
अब प्रेस रिलीज से ‘इमेज’ चमका रहा नगर निगम: [Nagar Nigam Gorakhpur Reality]
जब पूरा शहर डूब गया और लोगों के घरों में गंदा पानी घुस गया, तब नगर निगम की नींद टूटी। हमारे पास आई नगर निगम की आधिकारिक प्रेस रिलीज उनके बचाव का एक कमजोर पुलिंदा है। आइए इस [Nagar Nigam Gorakhpur Reality] का विश्लेषण करते हैं:
- महापौर और नगर आयुक्त का मैदान में उतरना: प्रेस रिलीज कहती है कि माननीय महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव एवं नगर आयुक्त श्री अजय जैन ने स्वयं मैदान में उतरकर जलभराव वाले क्षेत्रों (जीडीए कॉलोनी, गोरक्ष एंक्लेव, इलाहीबाग, डोमिनगढ़ आदि) का निरीक्षण किया। सच्चाई यह है कि यदि इन्होंने मानसून से पहले नालों का निरीक्षण किया होता, तो घुटने भर पानी में उतरने की नौबत ही नहीं आती।
- DG सेट और पंपों का दिखावा: निगम दावा कर रहा है कि लालडिग्गी और धर्मशाला बाज़ार जैसे प्रमुख क्षेत्रों में 125 KVA क्षमता के डीजी सेटों (DG Sets) की अतिरिक्त व्यवस्था की गई। यह अतिरिक्त व्यवस्था तब क्यों याद आई जब पूरा बाजार डूब चुका था?
- BSNL कार्यालय का डूबना: यह सबसे हास्यास्पद और डराने वाला तथ्य है। नगर निगम खुद मान रहा है कि BSNL कार्यालय परिसर में पानी भर गया था, जिसे निकालने के लिए सुबह 4 बजे तक पंपिंग करनी पड़ी ताकि इंटरनेट और संचार सेवाएं ठप न हों। यदि शहर का सबसे संवेदनशील संचार केंद्र जलभराव से सुरक्षित नहीं है, तो आम आदमी की क्या बिसात है?
- क्विक रिस्पांस टीम (QRT) का नाटक: रात्रिकालीन QRT और अभियंताओं के संपवेल पर खड़े होने का दावा किया जा रहा है। सवाल यह है कि किराना मंडी, राप्ती कॉम्प्लेक्स, गोलघर जैसे सबसे अहम व्यापारिक क्षेत्रों में पानी भरा ही क्यों? पानी उतरने के बाद जमा गाद (Silt) हटाना कोई अहसान नहीं है, बल्कि यह वह गाद है जिसे मानसून से पहले ही नालों से निकाल लिया जाना चाहिए था।
जनता को टोल-फ्री नंबर नहीं, सूखा शहर चाहिए!
प्रेस रिलीज के अंत में बताया गया है कि नगर निगम मुख्यालय स्थित कंट्रोल रूम 24 घंटे अलर्ट मोड पर है और टोल फ्री नंबर (1533, 8810709390 तथा 0551-2342621) जारी किए गए हैं। लेकिन यह Gorakhpur Waterlogging News स्पष्ट करती है कि जनता अब इन हेल्पलाइन नंबरों के झूठे आश्वासनों से थक चुकी है।
गोरखपुर के चाटुकार पत्रकार भले ही नगर निगम के इस ‘समर्पण’ की तारीफों के पुल बांधें, लेकिन ‘निर्भीक इंडिया’ सच लिखता रहेगा। अगर प्रशासन ने हमारी 21 सितंबर की चेतावनी (जाते जाते बरस सकते हैं बादल) को गंभीरता से लिया होता, तो आज गोरखपुर की जनता को अपनी करोड़ों की संपत्ति और व्यापार का नुकसान नहीं झेलना पड़ता। नगर निगम को प्रेस रिलीज के जरिए अपनी छवि सुधारने के बजाय, अपने भ्रष्ट ड्रेनेज सिस्टम और कार्यप्रणाली को सुधारने पर ध्यान देना चाहिए।

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