शुक्रवार, सितम्बर 11, 2026
फिल्म समीक्षा

Haiwaan movie review : रीयूनियन बचाएगा दोनों के करियर?

Haiwaan Movie Review : हैवान फिल्म की कहानी
  • फिल्म का नाम: हैवान (Haiwaan)
  • श्रेणी: साइकोलॉजिकल थ्रिलर / क्राइम एक्शन
  • निर्देशक: प्रियदर्शन (Priyadarshan)
  • निर्माता: वेंकट के. नारायण (KVN प्रोडक्शंस) और शैलजा देसाई फेन
  • रिलीज़ की तारीख: 11 सितम्बर 2026
  • रेटिंग: ⭐⭐⭐ (3/5 स्टार)
  • कलाकार (मुख्य भूमिका): सैफ अली खान, अक्षय कुमार, श्रिया पिलगांवकर, सैयामी खेर, बोमन ईरानी, असरानी, मोहनलाल (विशेष कैमियो)

Haiwaan Movie Review : हैवान फिल्म की कहानी

प्रियदर्शन के निर्देशन में बनी फिल्म ‘हैवान’ की कहानी अंधकार, बदले और न्याय के जटिल द्वंद्व के इर्द-गिर्द घूमती है। इस कथानक के केंद्र में श्याम (सैफ अली खान) है, जो आंखों की रोशनी न होने के बावजूद एक असाधारण, दक्ष मार्शल आर्टिस्ट और एक रिटायर्ड जज का वफादार केयरटेकर है।

श्याम का जीवन सीधा और शांत चल रहा होता है, लेकिन तभी जज की उनके ही आवास पर रहस्यमयी और नृशंस तरीके से हत्या कर दी जाती है। इस भयानक मर्डर केस के बाद परिस्थितियां कुछ ऐसी बनती हैं कि पुलिस और कानून की नजरें श्याम पर ही टिक जाती हैं और वह मुख्य संदिग्ध बनकर एक खौफनाक कानूनी जाल में उलझ जाता है। खुद को निर्दोष साबित करने की दोहरी चुनौती के बीच श्याम के कंधों पर उस स्वर्गीय जज की मासूम अनाथ बेटी की हिफाजत का भी भारी दारोमदार आ जाता है।

जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, हैवान मूवी रिव्यू (Haiwaan Movie Review) में रहस्य की परतें और अधिक गहरी होने लगती हैं। श्याम को जल्द ही आभास होता है कि जज की हत्या कोई साधारण लूटपाट या निजी रंजिश नहीं थी, बल्कि इसके पीछे एक खूंखार और मनोरोगी दिमाग काम कर रहा है।

यहीं पर परशुराम (अक्षय कुमार) की रोंगटे खड़े कर देने वाली एंट्री होती है, जो एक बेहद शातिर, बेरहम और साइको किलर है। परशुराम के पास जज और उनके परिवार से बदला लेने का एक गहरा, व्यक्तिगत और विक्षिप्त मकसद है। जब एक दृष्टिहीन व्यक्ति, जिसकी सुनने और सूंघने की इंद्रियां ही उसका सबसे बड़ा हथियार हैं, का सामना एक बेखौफ मनोरोगी से होता है, तो बिल्ली और चूहे का एक सांस रोक देने वाला खेल शुरू हो जाता है।

क्या श्याम बिना देखे उस शातिर दरिंदे के इरादों को भांप पाएगा? क्या वह कानून के शिकंजे से बचकर उस अनाथ बच्ची को परशुराम के खूनी पंजों से सुरक्षित निकाल सकेगा? यही इस सस्पेंस थ्रिलर का मुख्य सार है जो दर्शकों को अंत तक बांधे रखने की कोशिश करता है।

Haiwaan Movie Review : हैवान फिल्म की समीक्षा

‘हैवान’ वर्ष 2016 की ब्लॉकबस्टर मलयालम फिल्म ‘ओप्पम’ का आधिकारिक हिंदी रूपांतरण है। अगर वैश्विक समीक्षकों और दर्शकों के रिस्पॉन्स की बात करें, तो हैवान मूवी रिव्यू (Haiwaan Movie Review) को प्रमुख समीक्षा एग्रीगेटर्स पर मिली-जुली और औसत प्रतिक्रिया प्राप्त हुई है।

आईएमडीबी (IMDb) पर दर्शकों ने इसे 6.2/10 की रेटिंग दी है, जबकि रॉटेन टोमेटोज़ (Rotten Tomatoes) पर आलोचकों का फ्रेशनेस स्कोर 58% दर्ज किया गया है। वहीं गूगल रिव्यूज़ (Google Reviews) में लगभग 65% उपयोगकर्ताओं ने इसे एक संतोषजनक वन-टाइम वॉच माना है। इन सभी समीक्षा पोर्टलों के सामूहिक विश्लेषण के आधार पर इस फिल्म को 5 में से 3 स्टार की रेटिंग दी जा सकती है।

फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसका मुख्य द्वंद्व है। सैफ अली खान ने एक नेत्रहीन मार्शल आर्टिस्ट के किरदार में अपनी शारीरिक भाषा, सतर्कता और एक्शन मूव्स से जान फूंक दी है। वहीं, लगभग 18 साल बाद उनके सामने खड़े अक्षय कुमार एक पूरी तरह से डार्क, नेगेटिव और साइकोटिक विलेन ‘परशुराम’ के रूप में दर्शकों को डराने में कामयाब रहे हैं।

उनके चेहरे की ठंडी मुस्कान और क्रूरता पर्दे पर गहरा असर छोड़ती है। सहायक भूमिकाओं में श्रिया पिलगांवकर और सैयामी खेर ने ईमानदारी से काम किया है, जबकि दिवंगत असरानी की मौजूदगी भावुक करती है और मोहनलाल का विशेष कैमियो सिनेप्रेमियों के लिए एक सुखद सरप्राइज साबित होता है।

हालांकि, फिल्म की सबसे कमजोर कड़ी इसकी पटकथा और संपादन की गति है। फर्स्ट हाफ किरदारों की पृष्ठभूमि तैयार करने और माहौल बनाने में जरूरत से ज्यादा समय लेता है, जिससे थ्रिलर का आवश्यक खिंचाव कुछ हद तक कमजोर पड़ जाता है। पटकथा में कुछ तार्किक खामियां और अतिरिक्त उप-कहानियां मुख्य मर्डर मिस्ट्री से दर्शकों का ध्यान भटकाती हैं।

इसके अलावा, जो दर्शक मूल मलयालम फिल्म ‘ओप्पम’ पहले ही देख चुके हैं, उनके लिए इसमें नया सस्पेंस बहुत कम नजर आता है। फिर भी, प्रियदर्शन का थ्रिलर जॉनर में यह गंभीर प्रयास और दोनों प्रमुख अभिनेताओं की ऑन-स्क्रीन टक्कर इसे सिनेमाघरों में एक बार देखने लायक थ्रिलर जरूर बनाती है।

हैवान मूवी रिव्यू (Haiwaan Movie Review): छायांकन, निर्देशन और उपकरण

निर्देशक प्रियदर्शन ने अपनी पारंपरिक कॉमेडी छवि से हटकर एक गंभीर और डार्क साइकोलॉजिकल थ्रिलर रचने का सधा हुआ प्रयास किया है। उनका निर्देशन सेकंड हाफ के तनाव और क्लाइमेक्स में अपनी पूरी लय में लौटता है। सिनेमैटोग्राफर दिवाकर मणि का काम फिल्म का सबसे मजबूत तकनीकी पक्ष है; उन्होंने शैडो प्ले, कम रोशनी (Low-light cinematography) और उन्नत कैमरा उपकरणों का सटीक उपयोग करके एक डार्क और रहस्यमयी माहौल गढ़ा है।

कैमरा एंगल्स इस तरह सेट किए गए हैं जो एक नेत्रहीन व्यक्ति के नजरिए और उसके खतरे की अनुभूति को दर्शकों तक सीधे पहुंचाते हैं। वहीं, एम. एस. अय्यप्पन नायर का संपादन (Editing) थोड़ा ढीला है; यदि फर्स्ट हाफ से अनावश्यक दृश्यों को ट्रिम किया जाता, तो फिल्म अधिक क्रिस्प बनती। रोहन शंकर के संवाद सामान्य हैं, लेकिन साउंड डिजाइन और बैकग्राउंड स्कोर सस्पेंस को गहरा करने में पूरी मदद करते हैं।

हैवान मूवी रिव्यू (Haiwaan Movie Review): इसे क्यों देखें / न देखें

क्यों देखें:

  • सैफ अली खान और अक्षय कुमार का 18 साल बाद बड़े पर्दे पर धमाकेदार और रोंगटे खड़े करने वाला टकराव।
  • अक्षय कुमार का डरावना, क्रूर और अप्रत्याशित साइको किलर (परशुराम) वाला नकारात्मक अवतार।
  • सैफ अली खान का एक नेत्रहीन मार्शल आर्टिस्ट के रूप में भावनात्मक अभिनय और सधे हुए एक्शन सीन्स।
  • दिवाकर मणि की बेहतरीन लो-लाइट सिनेमैटोग्राफी और मोहनलाल का विशेष कैमियो अपीयरेंस।

क्यों न देखें:

  • यदि आप मूल मलयालम फिल्म ‘ओप्पम’ देख चुके हैं, तो कहानी में आपके लिए कोई नया सरप्राइज या सस्पेंस नहीं बचेगा।
  • फर्स्ट हाफ की धीमी गति और ढीले संपादन के चलते फिल्म की लंबाई जरूरत से ज्यादा खिंची हुई महसूस होती है।
  • अनावश्यक गानों और कमजोर उप-कहानियों के कारण मुख्य मर्डर-मिस्ट्री थ्रिलर की रफ्तार में आने वाला भटकाव।
फिल्म समीक्षक - नवनीत मिश्र
पत्रकार व मीडिया शोधार्थी
जनसंचार व मीडिया अध्ययन में मास्टर
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