उत्तर प्रदेश के ऊर्जा विभाग में प्रबंधन और कर्मचारियों के बीच गतिरोध लगातार गहराता जा रहा है। अपनी पूर्व निर्धारित रणनीति और मांगों को लेकर Vidyut Karmachari Sanyukt Sangharsh Samiti UP (विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश) के केंद्रीय पदाधिकारी आज लखनऊ स्थित ‘शक्ति भवन’ पहुँचे। यहाँ कर्मचारियों का उद्देश्य उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) के अध्यक्ष से सीधी वार्ता करना था।

निर्भीक इंडिया (संवाददाता नवनीत मिश्रा)- इस बीच, एक नए विवाद ने पूरे विभाग में आग में घी डालने का काम किया है। UPPCL Chairman Dalal Remark (यूपीपीसीएल चेयरमैन की ‘दलाल’ टिप्पणी) को लेकर पूरे प्रदेश के बिजली कर्मचारियों में भयंकर आक्रोश व्याप्त है। आज प्रदेश के सभी जनपदों और परियोजना मुख्यालयों पर कर्मचारियों ने विरोध प्रदर्शन कर इस अमर्यादित भाषा के प्रति अपना कड़ा प्रतिरोध दर्ज कराया है।
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UPPCL Chairman Dalal Remark: तकनीकी संवर्ग के अपमान पर भड़का आक्रोश
विवाद की शुरुआत हाल ही में हुई एक आधिकारिक ऑनलाइन बैठक से हुई। संघर्ष समिति का आरोप है कि चेयरमैन ने Technical staff UPPCL video conferencing के दौरान तकनीकी संवर्ग के कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए “दलाल” जैसे बेहद आपत्तिजनक और असंसदीय शब्द का प्रयोग किया।
UPPCL Chairman Dalal Remark ने उन हजारों कर्मचारियों की गरिमा को गहरी ठेस पहुंचाई है, जो विपरीत परिस्थितियों—चाहे वह भीषण गर्मी हो, कड़ाके की सर्दी हो या आंधी-तूफान—में दिन-रात कार्य करके पूरे प्रदेश की विद्युत व्यवस्था को सुचारु बनाए रखते हैं।
संघर्ष समिति ने चेयरमैन को एक कड़ा पत्र भेजा है जिसमें स्पष्ट किया गया है कि निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने में तकनीकी कर्मचारियों (लाइनमैन से लेकर अवर अभियंता तक) का योगदान सबसे महत्वपूर्ण और जोखिम भरा होता है।
ऐसे कर्तव्यनिष्ठ कर्मचारियों को इस तरह के अपमानजनक शब्दों से संबोधित करना न केवल निंदनीय है, बल्कि यह कार्य-संस्कृति पर भी बेहद प्रतिकूल प्रभाव डालता है। इसी कारण कर्मचारी अब Public apology from power corporation chairman (पावर कॉरपोरेशन के चेयरमैन से सार्वजनिक माफी) की सख्त मांग कर रहे हैं।

UPPCL Chairman Dalal Remark के विवाद के बीच 5 मार्च को वार्ता की उम्मीद
शक्ति भवन पहुँचे संघर्ष समिति के प्रतिनिधिमंडल को पावर कॉरपोरेशन के चेयरमैन डॉ. आशीष गोयल की ओर से यह आश्वासन दिया गया है कि वे इन सभी सुलगते मुद्दों पर होली के पर्व के बाद विस्तार से चर्चा करेंगे।
आधिकारिक सूत्रों और समिति के अनुसार, प्रबंधन और कर्मचारियों के बीच 5 मार्च को एक औपचारिक वार्ता होने की प्रबल संभावना है। हालांकि UPPCL Chairman Dalal Remark के कारण माहौल अभी भी तनावपूर्ण है, लेकिन संघर्ष समिति ने अपनी ओर से सकारात्मकता दिखाते हुए यह आशा व्यक्त की है कि 5 मार्च की यह वार्ता किसी समाधानपरक दिशा में आगे बढ़ेगी और कर्मचारियों के स्वाभिमान को बहाल किया जाएगा।
458 days electricity workers strike और जबरन स्मार्ट मीटर का विरोध
चेयरमैन की टिप्पणी के अलावा, कर्मचारियों का यह आंदोलन निजीकरण और दमनात्मक नीतियों के खिलाफ एक लंबे संघर्ष का हिस्सा है। निजीकरण के विरोध में चल रहे इस ऐतिहासिक 458 days electricity workers strike (458 दिनों के बिजली कर्मचारी हड़ताल/आंदोलन) के अवसर पर भी आज पूरे उत्तर प्रदेश में व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी रहा।
संघर्ष समिति की मुख्य मांगें जो इस वार्ता के केंद्र में रहेंगी, वे इस प्रकार हैं:
- उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयां वापसी: पिछले आंदोलनों के दौरान बिजली कर्मचारियों, संविदा कर्मियों और पदाधिकारियों पर की गई सभी दंडात्मक (निलंबन, एफआईआर, निष्कासन) और उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयों को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए।
- स्मार्ट मीटर पर रोक: प्रदेश भर में बिजली कर्मचारियों के विभागीय और निजी आवासों पर जो Forced smart meter installation UP (जबरन स्मार्ट मीटर लगाने की कार्यवाही) की जा रही है, उस पर तुरंत रोक लगाई जाए।
- सार्वजनिक माफी: UPPCL Chairman Dalal Remark पर प्रबंधन द्वारा स्थिति स्पष्ट की जाए और Public apology from power corporation chairman सुनिश्चित कर कर्मचारियों के सम्मान की रक्षा की जाए।
संघर्ष समिति ने यह स्पष्ट चेतावनी दी है कि जब तक उनकी ये जायज मांगें नहीं मानी जातीं, उत्पीड़नात्मक कार्रवाइयां वापस नहीं होतीं, और जबरन स्मार्ट मीटर थोपने की प्रक्रिया बंद नहीं होती, तब तक उनका यह शांतिपूर्ण लेकिन दृढ़ आंदोलन प्रदेश भर में इसी तरह जारी रहेगा। अब सबकी निगाहें 5 मार्च को होने वाली महत्वपूर्ण बैठक पर टिकी हैं।

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