गोरखपुर समाचारउत्तर प्रदेश

एम्स गोरखपुर (AIIMS Gorakhpur) में कॉक्लियर इम्प्लांट (cochlear implant)

निर्भीक इंडिया (संवाददाता नवनीत मिश्रा)- अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान यानी एम्स गोरखपुर (AIIMS Gorakhpur) के ईएनटी विभाग (ENT department) ने 7 और 8 अगस्त 2026 को लगातार दो दिनों में पाँच कॉक्लियर इम्प्लांट (cochlear implant) सर्जरी सफलतापूर्वक संपन्न की हैं। यह उपलब्धि चिकित्सा क्षेत्र और उन्नत श्रवण पुनर्स्थापन सेवाओं के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जा रही है।

एम्स गोरखपुर (AIIMS Gorakhpur) में जन्मजात श्रवण बाधिता (congenital hearing loss) और मरीजों की वर्तमान स्थिति
एम्स गोरखपुर (AIIMS Gorakhpur) में कॉक्लियर इम्प्लांट (cochlear implant)

एम्स गोरखपुर (AIIMS Gorakhpur) में जन्मजात श्रवण बाधिता (congenital hearing loss) और मरीजों की वर्तमान स्थिति

इन पाँच कॉक्लियर इम्प्लांट (cochlear implant) प्रक्रियाओं में चार छोटे बच्चे और एक वयस्क महिला शामिल थीं। रिपोर्ट के अनुसार, ये चारों बच्चे जन्मजात श्रवण बाधिता (congenital hearing loss) से पीड़ित थे, जिसके कारण उनका वाक् विकास (बोलने की क्षमता) भी गंभीर रूप से प्रभावित हुआ था।

वहीं, एक वयस्क महिला मरीज लगभग पाँच वर्ष पूर्व अपनी सुनने की क्षमता पूरी तरह से खो चुकी थीं, जिसे चिकित्सकीय भाषा में वयस्कों में पोस्टलिंगुअल श्रवण हानि (post-lingual hearing loss) कहा जाता है। श्रवण क्षमता न होने के कारण उनके कार्य एवं रोजगार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा था। एम्स गोरखपुर में हुए इस सफल उपचार से यह स्पष्ट होता है कि वयस्कों में स्थायी श्रवण हानि के उपचार में कॉक्लियर इम्प्लांट (cochlear implant) का महत्व तेजी से बढ़ रहा है।

कॉक्लियर इम्प्लांट (cochlear implant) क्या है और यह पारंपरिक श्रवण यंत्रों से कैसे बेहतर है?

इंटरनेट पर लोग अक्सर खोजते हैं कि कॉक्लियर इम्प्लांट (cochlear implant) क्या है और यह सामान्य मशीन से कैसे अलग है। कॉक्लियर इम्प्लांट गंभीर से अत्यधिक गंभीर श्रवण हानि वाले ऐसे चयनित मरीजों के लिए एक उन्नत उपचार विकल्प है, जिन्हें पारंपरिक श्रवण यंत्रों (hearing aids) से पर्याप्त लाभ नहीं मिल पाता है।

सर्जरी के बाद उचित श्रवण एवं वाक् पुनर्वास (auditory and speech rehabilitation) के माध्यम से मरीजों की ध्वनि सुनने और संचार क्षमता में महत्वपूर्ण सुधार संभव होता है। यह पुनर्वास मरीजों को मुख्यधारा के समाज से फिर से जुड़ने में मदद करता है।

एम्स गोरखपुर की विशेषज्ञ चिकित्सा टीम

ये सभी प्रक्रियाएँ ईएनटी विभाग (ENT department) के निरंतर संचालित कॉक्लियर इम्प्लांट कार्यक्रम के अंतर्गत सफलतापूर्वक की गईं। इन जटिल सर्जिकल प्रक्रियाओं को डॉ. पंखुड़ी मित्तल के कुशल नेतृत्व में संपन्न किया गया। इस सर्जिकल टीम में डॉ. अश्वनी कुमार चौधरी, डॉ. रुचिका अग्रवाल और ईएनटी विभाग की पूरी टीम ने सक्रिय भूमिका निभाई।

इस कार्यक्रम की सफलता में एनेस्थीसियोलॉजी विभाग (anesthesiology department) का महत्वपूर्ण सहयोग प्राप्त हुआ। डॉ. संतोष कुमार शर्मा, डॉ. अंकिता काबी, डॉ. गणेश आर. निमजे, डॉ. विजेता बाजपेयी, डॉ. प्रियंका द्विवेदी एवं एनेस्थीसिया टीम ने मरीजों की सुरक्षित और सुचारु शल्य चिकित्सा सुनिश्चित की।

उन्नत श्रवण सेवाएं (advanced hearing services) और भविष्य की दिशा

यह उल्लेखनीय है कि एम्स गोरखपुर में पिछले वर्ष भी दो कॉक्लियर इम्प्लांट (cochlear implant) सर्जरी सफलतापूर्वक की जा चुकी हैं और दोनों मरीज वर्तमान में अच्छा कर रहे हैं।

कॉक्लियर इम्प्लांट कार्यक्रम का यह सफल संचालन एम्स गोरखपुर की कार्यपालक निदेशक एवं सीईओ, मेजर जनरल डॉ. विभा दत्ता के कुशल मार्गदर्शन, प्रोत्साहन और सहयोग से संभव हुआ है। उनके नेतृत्व में संस्थान में उन्नत श्रवण सेवाओं (advanced hearing services) को सुदृढ़ एवं विस्तारित करने की दिशा में निरंतर महत्वपूर्ण प्रयास किए जा रहे हैं।

लगातार दो दिनों में पाँच सर्जरी का सफलतापूर्वक संपन्न होना गोरखपुर, पूर्वी उत्तर प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों के मरीजों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। अब उन्हें आधुनिक कॉक्लियर इम्प्लांट एवं श्रवण पुनर्वास सेवाएं अपने निकट ही उपलब्ध हो सकेंगी।

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