गोरखपुर समाचारउत्तर प्रदेश

लेग अल्सर क्लिनिक (Leg Ulcer Clinic) एम्स गोरखपुर में शुरू

गोरखपुर: लेग अल्सर क्लिनिक (Leg Ulcer Clinic) की बहुप्रतीक्षित शुरुआत एम्स गोरखपुर (AIIMS Gorakhpur) के सर्जरी विभाग द्वारा कर दी गई है। यह विशेष क्लिनिक गोरखपुर, पूर्वांचल और आसपास के उन मरीजों के लिए एक बड़ी राहत लेकर आया है, जो पैरों में होने वाले गंभीर घावों और पुराने अल्सर से पीड़ित हैं।

लेग अल्सर क्लिनिक (Leg Ulcer Clinic) की टाइमिंग और ओपीडी की जानकारी

इस नई स्वास्थ्य सुविधा के माध्यम से मरीजों को अस्पताल की लंबी कतारों से मुक्ति मिलेगी और पैरों के घाव (leg wound) की सटीक जांच, ड्रेसिंग व त्वरित इलाज एक ही स्थान पर सुगमता से उपलब्ध हो सकेगा।

लेग अल्सर क्लिनिक (Leg Ulcer Clinic) की टाइमिंग और ओपीडी की जानकारी

एम्स गोरखपुर (AIIMS Gorakhpur) के डिपार्टमेंट ऑफ सर्जरी (Department of Surgery) ने जानकारी दी है कि यह विशेष लेग अल्सर क्लिनिक (Leg Ulcer Clinic) प्रत्येक सप्ताह गुरुवार को दोपहर 2:00 बजे से 4:00 बजे तक संचालित किया जाएगा।

मरीज सर्जरी ओपीडी (Surgery OPD) के कमरा नंबर 103 में जाकर विशेषज्ञ चिकित्सकों से सीधा परामर्श ले सकते हैं। मरीजों की शारीरिक अक्षमता और सुविधा को ध्यान में रखते हुए, दोपहर 2 से 4 बजे के बीच इस विशेष क्लिनिक के नाम से एक अलग ओपीडी पर्चा (OPD slip) बनाया जाएगा, ताकि चलने-फिरने में असमर्थ मरीजों को अपना इलाज कराने में किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

किन बीमारियों और पैरों के घावों (leg wounds) का होगा इलाज?

इस लेग अल्सर क्लिनिक (Leg Ulcer Clinic) में पैरों में होने वाले किसी भी प्रकार के अल्सर या पुराने घावों (chronic wounds) का सघन उपचार किया जाएगा। आमतौर पर, पैरों में अल्सर की जटिल समस्या डायबिटीज (Diabetes) के मरीजों में सर्वाधिक पाई जाती है। इसके अतिरिक्त इस क्लिनिक में निम्नलिखित बीमारियों का भी इलाज होगा:

  • वैरिकोज वेन (Varicose veins) के कारण पैरों में बनने वाले वैरिकोज अल्सर।
  • फाइलेरिया यानी हाथी पांव (Filariasis) की बीमारी से उत्पन्न होने वाले घाव।
  • ट्रॉपिक अल्सर (Tropic ulcer) की समस्या।
  • पैरों में लगातार रहने वाली सूजन या किसी गंभीर चोट के कारण जल्दी न भरने वाले घाव।

मल्टी-डिसिप्लिनरी इलाज: शुगर और फिजियोथेरेपी (People Also Search For)

अक्सर लोग इंटरनेट पर खोजते हैं कि डायबिटीज अल्सर (Diabetic Ulcer) को तेजी से कैसे ठीक किया जाए और इसके लिए कौन से विभाग में जाना चाहिए। एम्स गोरखपुर ने इसके लिए एक मल्टी-डिसिप्लिनरी (बहु-विभागीय) व्यवस्था तैयार की है:

  • डायबिटीज कंट्रोल: यदि घाव का मुख्य कारण अनियंत्रित शुगर है, तो मरीज को शुगर नियंत्रण के लिए एंडोक्रिनोलॉजी विभाग (Endocrinology Department) के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. देबदित्य दास (Dr. Debaditya Das) के पास विशेष परामर्श के लिए भेजा जाएगा।
  • फिजियोथेरेपी और कृत्रिम अंग: अल्सर या घाव के कारण पैरों की मूवमेंट प्रभावित होने पर एक्सरसाइज, सिकाई, फिजियोथेरेपी (Physiotherapy) और प्रोस्थेसिस (Artificial limb) के लिए मरीज को पीएमआर (PMR) डिपार्टमेंट के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अभिमन्यु वासुदेव (Dr. Abhimanyu Vasudeva) के पास रेफर किया जाएगा।

एम्स गोरखपुर (AIIMS Gorakhpur) प्रबंधन की विशेष पहल

इस लेग अल्सर क्लिनिक (Leg Ulcer Clinic) के सफल शुभारंभ पर एम्स की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर मेजर विभा दत्ता (Major Vibha Dutta) ने सर्जरी विभाग के अध्यक्ष डॉ. गौरव गुप्ता (Dr. Gaurav Gupta), डॉ. देबदित्य दास और डॉ. अभिमन्यु वासुदेव को बधाई दी है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यह क्लिनिक विशेष रूप से उन मरीजों के लिए अत्यंत फायदेमंद सिद्ध होगा, जो घावों के कारण ठीक से चल भी नहीं पाते हैं। प्रबंधन ने गोरखपुर और आसपास की जनता से अपील की है कि वे इस सर्वसुविधायुक्त क्लिनिक का भरपूर लाभ उठाएं।

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Navneet Mishra

Navneet Mishra is a seasoned journalist currently associated with Nirbhik India and its digital portal, nirbhikindia.in. With over six years of experience across print and digital platforms, Navneet specializes in politics, sports, economics, and geopolitics.
A Master’s graduate in Mass Communication from Deen Dayal Upadhyay Gorakhpur University, he is also a dedicated media scholar. His academic research focuses on “the pivotal role of Gorakhpur’s Hindi newspapers during the Indian freedom struggle against the British Crown”. Before joining Nirbhik India, Navneet spent five years at Adarsh Jeevan and gained valuable field experience at Amar Ujala Gorakhpur as training reporter only for 5 days.
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नवनीत मिश्रा वर्तमान में ‘निर्भीक इंडिया’ मीडिया समूह से जुड़े हैं। उन्होंने दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया है। पत्रकारिता के अपने 6 वर्षों के सफर में उन्होंने प्रिंट और डिजिटल दोनों डेस्क पर काम किया है। उनके शोध का विषय ब्रिटिश शासन के खिलाफ गोरखपुर के अखबारों का योगदान रहा है, जो उनकी ऐतिहासिक समझ को दर्शाता है। वे राजनीति, अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय मामलों (Geopolitics) पर निरंतर लिखते रहे हैं। ‘आदर्श जीवन’ दैनिक में 5 साल का कार्यकाल और ‘अमर उजाला’ गोरखपुर में ट्रेनिंग रिपोर्टिंग के तौर पर मात्र 5 दिन काम क्या है उनकी लेखनी को और भी निखारता है।

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Navneet Mishra is a seasoned journalist currently associated with Nirbhik India and its digital portal, nirbhikindia.in. With over six years of experience across print and digital platforms, Navneet specializes in politics, sports, economics, and geopolitics. A Master’s graduate in Mass Communication from Deen Dayal Upadhyay Gorakhpur University, he is also a dedicated media scholar. His academic research focuses on "the pivotal role of Gorakhpur’s Hindi newspapers during the Indian freedom struggle against the British Crown". Before joining Nirbhik India, Navneet spent five years at Adarsh Jeevan and gained valuable field experience at Amar Ujala Gorakhpur as training reporter only for 5 days. ---------------------------------------------------------------------------------- नवनीत मिश्रा वर्तमान में 'निर्भीक इंडिया' मीडिया समूह से जुड़े हैं। उन्होंने दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया है। पत्रकारिता के अपने 6 वर्षों के सफर में उन्होंने प्रिंट और डिजिटल दोनों डेस्क पर काम किया है। उनके शोध का विषय ब्रिटिश शासन के खिलाफ गोरखपुर के अखबारों का योगदान रहा है, जो उनकी ऐतिहासिक समझ को दर्शाता है। वे राजनीति, अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय मामलों (Geopolitics) पर निरंतर लिखते रहे हैं। 'आदर्श जीवन' दैनिक में 5 साल का कार्यकाल और 'अमर उजाला' गोरखपुर में ट्रेनिंग रिपोर्टिंग के तौर पर मात्र 5 दिन काम क्या है उनकी लेखनी को और भी निखारता है।

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