निर्भीक संपादकीय

संपादकीय स्वतंत्रता (Editorial Independence) : नहीं तो कुछ नहीं

प्रस्तावना- पत्रकारिता का मूल उद्देश्य समाज को सत्य, तथ्य और संतुलित जानकारी प्रदान करना है। यह उद्देश्य तभी पूरा हो

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निर्भीक संपादकीय

प्रधान संपादक (Editor in Chief) पत्रकारिता की आत्मा

प्रस्तावना- किसी भी समाचार पत्र या मीडिया संस्थान की वास्तविक पहचान उसके संपादकीय दृष्टिकोण से होती है। यह दृष्टिकोण मुख्य

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निर्भीक संपादकीय

व्हिसलब्लोअर संरक्षण अधिनियम (Whistleblowers Protection Act): सत्य के प्रहरियों की असुरक्षा, किसे बचाने का प्रयास?

प्रस्तावना- किसी भी जीवंत, पारदर्शी और परिपक्व लोकतंत्र की वास्तविक संजीवता केवल उसके संविधान के पन्नों में नहीं, बल्कि इस

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निर्भीक संपादकीय

लोकतंत्र का चौथा स्तंभ: क्या अपनी भूमिका निभा रहा ?

प्रस्तावना- लोकतांत्रिक व्यवस्था की नींव चार प्रमुख स्तंभों पर टिकी मानी जाती हैविधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका और प्रेस। इन संस्थाओं के

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निर्भीक संपादकीय

रीढ़विहीन पत्रकारिता (Spineless Journalism): लोकतंत्र हेतु खतरा

प्रस्तावना- लोकतांत्रिक व्यवस्था में पत्रकारिता को चौथा स्तंभ कहा जाता है। इसका मूल उद्देश्य सत्ता से सवाल पूछना, जनता के

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निर्भीक संपादकीय

(Fourth Pillar of Democracy) : प्रेस के बिना लोकतंत्र अधूरा

प्रस्तावना- लोकतंत्र की मूल संरचना चार प्रमुख स्तंभोंविधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका और प्रेसपर आधारित मानी जाती है। इन चारों में प्रेस

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