आपदा जोखिम न्यूनीकरण (Disaster Risk Reduction): मंथन
बलरामपुर (निर्भीक इंडिया ब्यूरो): आपदा जोखिम न्यूनीकरण (Disaster Risk Reduction) के वैश्विक संकल्प को धरातल पर उतारने और देवीपाटन मंडल के तराई अंचल को सुरक्षित रखने के लिए माँ पाटेश्वरी विश्वविद्यालय में एक महत्वपूर्ण संगोष्ठी संपन्न हुई।

विश्वविद्यालय के ‘स्कूल ऑफ जनरल एंड अप्लाइड ज्योग्राफी’ द्वारा ‘मिशन शक्ति’ एवं ‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत अंतर्राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण दिवस (International Day for Disaster Risk Reduction) पर आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को आपदाओं के प्रति जागरूक करना और प्रभावी आपदा जोखिम न्यूनीकरण के व्यावहारिक उपायों के प्रति संवेदनशील बनाना रहा।
निर्भीक इंडिया (Nirbhik India) की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, नेपाल सीमा से सटे बलरामपुर और आसपास के जनपदों में बाढ़, आकाशीय बिजली और सर्पदंश जैसी विभीषिकाओं से बचाव के लिए आपदा जोखिम न्यूनीकरण को जमीनी स्तर पर लागू करना अत्यंत अनिवार्य है। सम्मेलन में आधुनिक पूर्व-चेतावनी तकनीकों तथा ‘सचेत’ व ‘दामिनी’ ऐप के जरिए आपदा जोखिम न्यूनीकरण को जन-आंदोलन बनाने पर बल दिया गया।
आपदा जोखिम न्यूनीकरण (Disaster Risk Reduction): देवीपाटन मंडल में 112 पहाड़ी नाले और बाढ़ का संकट
सम्मेलन के मुख्य अतिथि एवं बलरामपुर के आपदा प्रबंधन विशेषज्ञ (Disaster Management Specialist) अरुण कुमार सिंह ने अपने संबोधन में बताया कि आपदा जोखिम न्यूनीकरण की सफलता हमेशा भौगोलिक परिस्थितियों के सटीक अध्ययन पर निर्भर करती है। बलरामपुर जनपद में बाढ़, भूकंप, जंगल की आग, जलभराव में डूबना और सर्पदंश जैसी घटनाएं प्रमुख आपदाएं हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि आपदा प्रबंधन में स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण घटक है।
आपदा प्रबंधन विशेषज्ञ के अनुसार, प्रभावी आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए आपदा की समय पर पहचान, कुशल प्रबंधन और त्वरित निवारण के साथ-साथ दूसरों की सहायता करते हुए अपनी सुरक्षा का ध्यान रखना जरूरी है:
112 पहाड़ी नालों का संजाल: देवीपाटन मंडल में 112 मौसमी पहाड़ी नाले बहते हैं। बरसात में इनका पाट सामान्य नदियों से भी अधिक चौड़ा हो जाता है, जिसके लिए पूर्व-नियोजित आपदा जोखिम न्यूनीकरण अत्यंत आवश्यक है।
32 त्वरित आपदा टीमें: आपातकालीन स्थिति में राहत और बचाव कार्यों को सफल बनाने के लिए मंडल में 32 टीमें पूरी तरह सक्रिय हैं।
गांवों में मुनादी: बाढ़ के दौरान गांवों में ढोल बजाकर मुनादी कराना आपदा प्रबंधन का प्रभावी माध्यम है, जिससे लोग समय रहते ऊंचे स्थानों पर चले जाएं।
आपदा जोखिम न्यूनीकरण (Disaster Risk Reduction) में सचेत और दामिनी मोबाइल ऐप की भूमिका
डिजिटल तकनीक के इस दौर में वैज्ञानिक पूर्व-सूचना तंत्र आपदा जोखिम न्यूनीकरण की सबसे बड़ी शक्ति बन चुका है। विशेषज्ञ ने केंद्र सरकार द्वारा विकसित किए गए दामिनी एवं सचेत ऐप (Damini and Sachet App) के उपयोग से जीवन रक्षा को मजबूत करने का आह्वान किया:
‘सचेत’ (SACHET) ऐप: भारत सरकार द्वारा चिह्नित 23 प्रमुख आपदाओं के लिए यह ऐप मौसम विभाग की पूर्व चेतावनियां वास्तविक समय में उपलब्ध कराता है, जो आपदा जोखिम न्यूनीकरण का मजबूत आधार है।
‘दामिनी’ (DAMINI) ऐप: आकाशीय बिजली गिरने से 30 से 45 मिनट पहले 20 से 40 किमी के दायरे में चेतावनी देकर यह ऐप आकाशीय वज्रपात से सुरक्षा सुनिश्चित करता है।
वज्रपात से सुरक्षा का नियम: आकाशीय बिजली चमकने पर पेड़ों के नीचे न रुकें। खुले स्थान में दोनों पैरों को सटाकर उकड़ू (Crouching position) बैठना ही आपदा जोखिम न्यूनीकरण का प्रमाणित नियम है।
आपदा जोखिम न्यूनीकरण (Disaster Risk Reduction): सर्पदंश और आकाशीय बिजली से बचाव के जीवनरक्षक उपाय
ग्रामीण भारत में अंधविश्वास को मिटाना भी आपदा जोखिम न्यूनीकरण का अभिन्न हिस्सा है। सम्मेलन में वैज्ञानिक जागरूकता पर जोर दिया गया:
सर्पदंश के आंकड़े: देश में हर साल 50 से 58 हजार लोग सर्पदंश से और लगभग पौने दो लाख लोग सड़क हादसों में जान गंवाते हैं। इन मौतों को रोकना आपदा जोखिम न्यूनीकरण की प्राथमिक चुनौती है।
झाड़-फूंक पर रोक: सांप या कुत्ते के काटने पर झाड़-फूंक के बजाय तत्काल अस्पताल जाकर एंटी-वेनम लगवाना ही सुरक्षा का सबसे भरोसेमंद मार्ग है।
भूकंप सुरक्षा: भूकंप का सटीक पूर्वानुमान संभव नहीं है, इसलिए भूकंपरोधी संरचनाओं का निर्माण ही आपदा जोखिम न्यूनीकरण का सर्वोत्तम उपाय है।
आपदा जोखिम न्यूनीकरण (Disaster Risk Reduction) के तहत मानव जनित दुर्घटनाओं और आग पर नियंत्रण
प्राकृतिक खतरों के साथ-साथ मानव जनित दुर्घटनाओं को रोकना भी आपदा जोखिम न्यूनीकरण का मुख्य अंग है। औद्योगिक विकास के साथ सुरक्षा के नियम और कड़े होने चाहिए:
सीएनजी व गैस सुरक्षा: वाहनों में सीएनजी और घरेलू सिलेंडरों का नियमित निरीक्षण हादसों की रोकथाम में सहायक होता है।
चीनी मिल व प्लास्टिक सुरक्षा: चीनी मिलों और प्लास्टिक उद्योगों में फायर सेफ्टी मानकों का पालन कर मानव जनित आपदा जोखिम न्यूनीकरण किया जा सकता है।
जंगल की आग: सोहेलवा वन्यजीव प्रभाग में आग से सुरक्षा के लिए वन समितियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए।
आपदा जोखिम न्यूनीकरण (Disaster Risk Reduction): एआई की अनियंत्रित गति भी नई आपदा—कुलपति
समारोह की अध्यक्षता कर रहे कुलपति प्रो. रविशंकर सिंह ने कहा कि चुनौतियां ही नए अवसर पैदा करती हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए जनचेतना और सामुदायिक तत्परता सबसे अहम हथियार है:
एजेंटिक एआई (Agentic AI) से सतर्कता: कुलपति ने आगाह किया कि अनियंत्रित कृत्रिम बुद्धिमत्ता भी एक आधुनिक आपदा बन सकती है, इसलिए तकनीकी क्षेत्र में आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए एआई को नैतिक बनाना आवश्यक है।
तकनीक के दास न बनें: युवाओं को तकनीक का सहायक के रूप में उपयोग करना चाहिए। सामाजिक संकटों को भी आपदा मानकर समय रहते रोकथाम के प्रयास किए जाने चाहिए।
विश्वविद्यालय बनाएगा आपदा मानचित्र: कुलपति ने घोषणा की कि विश्वविद्यालय पूरे देवीपाटन मंडल की आपदाओं को चिह्नित कर व्यापक स्तर पर आपदा जोखिम न्यूनीकरण अभियान चलाएगा।
कार्यक्रम का कुशल संयोजन डॉ. मयंक सिंह एवं डॉ. अक्षय वर्मा ने किया तथा मंच संचालन डॉ. दिशिता सिंह ने किया। संगोष्ठी में विभिन्न विभागों के शिक्षक और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।
आपदा जोखिम न्यूनीकरण (Disaster Risk Reduction): अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (PAA)
प्र. 1: अंतर्राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण दिवस कब और क्यों मनाया जाता है?
उत्तर: संयुक्त राष्ट्र के तत्वावधान में प्रतिवर्ष 13 अक्टूबर को अंतर्राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण दिवस मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य जनहानि को न्यूनतम करना है।
प्र. 2: आकाशीय बिजली की पूर्व चेतावनी किस ऐप से मिलती है?
उत्तर: भारत सरकार के ‘दामिनी’ (Damini) ऐप से आकाशीय बिजली गिरने की संभावना की सटीक जानकारी 30-45 मिनट पहले मिल जाती है।
प्र. 3: सर्पदंश होने पर तुरंत क्या कदम उठाना चाहिए?
उत्तर: झाड़-फूंक में समय नष्ट न करते हुए पीड़ित को सीधे नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र ले जाकर एंटी-स्नेक वेनम का इंजेक्शन लगवाना चाहिए।
प्र. 4: ‘सचेत’ (SACHET) ऐप किस प्रकार उपयोगी है?
उत्तर: यह ऐप राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा देश की 23 चिह्नित आपदाओं की पूर्व चेतावनी मोबाइल पर सीधे उपलब्ध कराता है।
आपदा जोखिम न्यूनीकरण (Disaster Risk Reduction) केवल एक सरकारी दायित्व नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का सामाजिक कर्तव्य है। निर्भीक इंडिया (Nirbhik India) जनसुरक्षा और जागरूकता से जुड़ी प्रत्येक पहल को निष्पक्षता से समाज तक पहुंचाने के लिए संकल्पित है।

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Navneet Mishra is a seasoned journalist currently associated with Nirbhik India and its digital portal, nirbhikindia.in. With over six years of experience across print and digital platforms, Navneet specializes in politics, sports, economics, and geopolitics.
A Master’s graduate in Mass Communication from Deen Dayal Upadhyay Gorakhpur University, he is also a dedicated media scholar. His academic research focuses on “the pivotal role of Gorakhpur’s Hindi newspapers during the Indian freedom struggle against the British Crown”. Before joining Nirbhik India, Navneet spent five years at Adarsh Jeevan and gained valuable field experience at Amar Ujala Gorakhpur as training reporter only for 5 days.
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नवनीत मिश्रा वर्तमान में ‘निर्भीक इंडिया’ मीडिया समूह से जुड़े हैं। उन्होंने दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया है। पत्रकारिता के अपने 6 वर्षों के सफर में उन्होंने प्रिंट और डिजिटल दोनों डेस्क पर काम किया है। उनके शोध का विषय ब्रिटिश शासन के खिलाफ गोरखपुर के अखबारों का योगदान रहा है, जो उनकी ऐतिहासिक समझ को दर्शाता है। वे राजनीति, अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय मामलों (Geopolitics) पर निरंतर लिखते रहे हैं। ‘आदर्श जीवन’ दैनिक में 5 साल का कार्यकाल और ‘अमर उजाला’ गोरखपुर में ट्रेनिंग रिपोर्टिंग के तौर पर मात्र 5 दिन काम क्या है उनकी लेखनी को और भी निखारता है।

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