बड़ी साइबर ठगी (cyber fraud) का पर्दाफाश
निर्भीक इंडिया (संवाददाता नवनीत मिश्रा)- : उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में पुलिस प्रशासन ने वित्तीय अपराधों पर कड़ा प्रहार करते हुए एक बेहद जटिल और बड़ी साइबर ठगी (cyber fraud) के नेटवर्क का सफलतापूर्वक पर्दाफाश किया है। पुलिस अधीक्षक नगर और पुलिस अधीक्षक अपराध के कुशल मार्गदर्शन में, स्थानीय थाना और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीन शातिर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। इन गिरफ्तार आरोपियों में एक निजी बैंक का कर्मचारी भी शामिल है, जिसने अपने पद और ग्राहक के विश्वास का दुरुपयोग करते हुए फर्जी तरीके से बैंक खाता संचालित किया और लगभग 75 लाख रुपये का अवैध वित्तीय लेन-देन किया।

बैंक कर्मचारी ने कैसे रची साइबर ठगी (cyber fraud) की साजिश?
इस पूरे आपराधिक घटनाक्रम का मुख्य सूत्रधार हरीश कुमार सिंह है, जो गोरखपुर के तारामंडल क्षेत्र स्थित बंधन बैंक की शाखा में कार्यरत था। स्थानीय थाने में दर्ज प्राथमिकी (मुकदमा अपराध संख्या 396/2026) के विवरण के अनुसार, पीड़ित वादी ने वर्ष 2023 में आरोपी हरीश के बार-बार अनुरोध करने पर अपनी फर्म के नाम से बैंक में एक खाता खुलवाया था।
हालांकि, बैंक की लचर सेवाओं से असंतुष्ट होकर वादी ने उसी वर्ष उस खाते को पूरी तरह से बंद करने के लिए लिखित आवेदन दे दिया था। इसके पश्चात वर्ष 2025 में, बैंक कर्मचारी हरीश ने बेहतर सेवाएं देने का नया झांसा देकर वादी से पुनः उनके महत्वपूर्ण दस्तावेज ले लिए और फर्म के नाम पर एक नया खाता खोल दिया।
ऋण के नाम पर दस्तावेजों का दुरुपयोग और साइबर अपराध (cyber crime)
इस सुनियोजित साइबर अपराध (cyber crime) की पटकथा में एक नया मोड़ तब आया जब अप्रैल 2026 में पीड़ित वादी ने वाहन खरीदने के लिए बैंक ऋण की जानकारी हेतु आरोपी हरीश से संपर्क किया। ऋण प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के बहाने आरोपी ने वादी के आवश्यक व्यक्तिगत दस्तावेज, जैसे आधार कार्ड और पैन कार्ड, प्राप्त कर लिए। ईएमआई (मासिक किस्त) अत्यधिक होने के कारण वादी ने वाहन खरीदने का विचार त्याग दिया।
इसके बाद मई 2026 में, आरोपी हरीश वादी के पास आया और बिना किसी स्पष्ट जानकारी के वह मोबाइल सिम कार्ड अपने साथ ले गया जो वर्ष 2023 में खोले गए पुराने खाते से जुड़ा हुआ था। इसी सिम कार्ड का उपयोग अवैध वित्तीय लेन-देन की ओटीपी (OTP) प्राप्त करने और खाते को नियंत्रित करने के लिए किया गया, जो वर्तमान में साइबर ठगी (cyber fraud) का सबसे प्रचलित तरीका बन चुका है।
राजस्थान पुलिस की सूचना से खुला साइबर अपराध (cyber crime) का राज
इस पूरे फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ तब हुआ जब 27 जून 2026 को पीड़ित वादी को राजस्थान राज्य से सूचना मिली कि उनके बैंक खाते के माध्यम से बड़े पैमाने पर अवैध वित्तीय लेन-देन हुआ है। वादी को अपना पक्ष रखने के लिए जांच हेतु राजस्थान बुलाया गया। वहां की जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि वादी के उस बैंक खाते में लगभग 75 लाख रुपये की अवैध धनराशि जमा की गई थी।
जिसे बाद में विभिन्न अन्य अज्ञात बैंक खातों में स्थानांतरित (ट्रांसफर) कर दिया गया था। इस खुलासे के बाद पीड़ित ने स्थानीय थाने में तहरीर दी, जिसके आधार पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 61(2), 238, 317(5) और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम की धारा 66सी और 66डी के तहत गंभीर धाराओं में मुकदमा पंजीकृत किया।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई और जालसाजों की गिरफ्तारी
क्षेत्राधिकारी कैंट के कड़े पर्यवेक्षण और निरीक्षक श्यामानंद राय के नेतृत्व में गठित साइबर सेल और स्थानीय पुलिस की टीम ने जाल बिछाकर तीन मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पकड़े गए अभियुक्तों का विवरण इस प्रकार है:
- हरीश कुमार सिंह (पुत्र राजकुमार सिंह) – निवासी बखिरा, संत कबीर नगर (बंधन बैंक तारामंडल, गोरखपुर में कार्यरत)।
- सुशांत विश्वकर्मा (पुत्र अशोक विश्वकर्मा) – निवासी रायगंज अलहदादपुर, थाना कैंट, जनपद गोरखपुर।
- विनय साहनी (पुत्र सत्येंद्र साहनी) – निवासी काली मंदिर कूड़ाघाट सिंघाड़िया, थाना एम्स, जनपद गोरखपुर।
पुलिस टीम ने इन अभियुक्तों के कब्जे से अपराध में प्रयुक्त 04 मोबाइल फोन भी बरामद किए हैं। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है और अग्रिम विधिक कार्यवाही की जा रही है।
मनी म्यूल क्या है और लोग कैसे होते हैं शिकार?
इंटरनेट पर लोग अक्सर यह सवाल खोजते हैं कि आम नागरिकों के बैंक खातों के माध्यम से साइबर ठगी (cyber fraud) कैसे संचालित की जाती है और ‘मनी म्यूल’ (Money Mule) खाते क्या होते हैं। दरअसल, जालसाज अक्सर भोले-भाले लोगों या ग्राहकों को निशाना बनाते हैं। जब किसी निर्दोष व्यक्ति के बैंक खाते का उपयोग ठगी गई अवैध धनराशि को मंगवाने और उसे आगे अन्य खातों में भेजने के लिए किया जाता है, तो उस खाते को ‘मनी म्यूल’ खाता कहा जाता है।
अपराधी बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत से या लोगों को गुमराह करके उनके दस्तावेजों का इस्तेमाल करते हैं। इसके बाद, खाते से जुड़े मोबाइल नंबर (सिम कार्ड) को अपने कब्जे में ले लेते हैं, जिससे असली खाताधारक को बिना कुछ किए ही कानूनी परेशानियों और पुलिस की जांच का सामना करना पड़ता है।
इस तरह के साइबर अपराध (cyber crime) से खुद को कैसे सुरक्षित रखें?
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इस प्रकार की जटिल साइबर ठगी (cyber fraud) से बचने के लिए नागरिकों को निम्नलिखित कड़े कदम उठाने चाहिए:
- सिम कार्ड की सुरक्षा: अपना सिम कार्ड या पंजीकृत मोबाइल नंबर कभी भी किसी बैंक एजेंट या अनजान व्यक्ति को इस्तेमाल के लिए न दें।
- खाता बंद करने की पुष्टि: यदि आप कोई बैंक खाता बंद करने का लिखित आवेदन देते हैं, तो बैंक से उसकी अंतिम पावती (रिसिप्ट) जरूर लें और पुष्टि करें कि वह पूरी तरह से निष्क्रिय हो गया है।
- दस्तावेजों का सावधानी से उपयोग: बैंक ऋण या अन्य सेवाओं के लिए अपने महत्वपूर्ण दस्तावेज केवल बैंक की आधिकारिक शाखा में ही जमा करें और उस पर उपयोग का उद्देश्य और तिथि स्पष्ट रूप से लिखें।
- निरंतर निगरानी: समय-समय पर अपने बैंक स्टेटमेंट और वित्तीय लेन-देन के संदेशों की जांच करते रहें ताकि किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि का तुरंत पता चल सके।
पुलिस प्रशासन आम जनता से अपील कर रहा है कि वे अपनी व्यक्तिगत और बैंकिंग जानकारी को पूरी तरह से गोपनीय रखें ताकि इस तरह के संगठित अपराधों को जड़ से खत्म किया जा सके।

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Navneet Mishra is a seasoned journalist currently associated with Nirbhik India and its digital portal, nirbhikindia.in. With over six years of experience across print and digital platforms, Navneet specializes in politics, sports, economics, and geopolitics.
A Master’s graduate in Mass Communication from Deen Dayal Upadhyay Gorakhpur University, he is also a dedicated media scholar. His academic research focuses on “the pivotal role of Gorakhpur’s Hindi newspapers during the Indian freedom struggle against the British Crown”. Before joining Nirbhik India, Navneet spent five years at Adarsh Jeevan and gained valuable field experience at Amar Ujala Gorakhpur as training reporter only for 5 days.
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नवनीत मिश्रा वर्तमान में ‘निर्भीक इंडिया’ मीडिया समूह से जुड़े हैं। उन्होंने दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया है। पत्रकारिता के अपने 6 वर्षों के सफर में उन्होंने प्रिंट और डिजिटल दोनों डेस्क पर काम किया है। उनके शोध का विषय ब्रिटिश शासन के खिलाफ गोरखपुर के अखबारों का योगदान रहा है, जो उनकी ऐतिहासिक समझ को दर्शाता है। वे राजनीति, अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय मामलों (Geopolitics) पर निरंतर लिखते रहे हैं। ‘आदर्श जीवन’ दैनिक में 5 साल का कार्यकाल और ‘अमर उजाला’ गोरखपुर में ट्रेनिंग रिपोर्टिंग के तौर पर मात्र 5 दिन काम क्या है उनकी लेखनी को और भी निखारता है।

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