Gorakhpur Traffic Police का नया प्लान से जान बचाने का दावा
Gorakhpur Traffic Police ने महानगर और ग्रामीण इलाकों में सड़क हादसों के दौरान होने वाली मौतों को पूरी तरह से रोकने के लिए एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। अक्सर सड़क दुर्घटना के बाद सही समय पर प्राथमिक उपचार (First Aid) न मिलने से घायलों की जान चली जाती है।

इसी गंभीर समस्या को खत्म करने के लिए Gorakhpur Traffic Police ने ‘सेव लाइफ फाउंडेशन’ (Save Life Foundation) के साथ मिलकर एक विशेष अभियान की शुरुआत की है। इस अभियान का मुख्य लक्ष्य गोरखपुर को एक ‘जीरो फैटेलिटी डिस्ट्रिक्ट’ (Zero Fatality District – ZFD) बनाना है, जहां सड़क हादसों में होने वाली मृत्यु दर शून्य हो जाए।
Gorakhpur Traffic Police का ‘Zero Fatality District’ मिशन
सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली जनहानि को कम करने के लिए पुलिस लाइन गोरखपुर स्थित ‘व्हाइट हाउस’ (White House) में एक विशेष तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। पुलिस अधीक्षक यातायात (SP Traffic) और क्षेत्राधिकारी यातायात (CO Traffic) के नेतृत्व में आयोजित इस वर्कशॉप में Gorakhpur Traffic Police और जनपद के थानों पर गठित ‘क्रैश इन्वेस्टिगेशन/कंट्रोल’ (CC) टीमों को हाई-टेक ट्रेनिंग दी गई।
इस खास ट्रेनिंग प्रोग्राम को ‘सेव लाइफ फाउंडेशन’ की एक्सपर्ट टीम ने संचालित किया। इसका मुख्य उद्देश्य पुलिसकर्मियों को यह सिखाना था कि दुर्घटनास्थल पर पहुंचने के बाद पहले ‘गोल्डन ऑवर’ (Golden Hour) में पीड़ित की जान कैसे बचाई जाए, ताकि अस्पताल पहुंचने से पहले ही मरीज दम न तोड़े।
Gorakhpur Traffic Police ने सीखी CPR की तकनीक
इस वर्कशॉप का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा जीवन रक्षक उपायों का प्रायोगिक (Practical) प्रशिक्षण था। Gorakhpur Traffic Police की सीसी टीम के प्रभारियों और पुलिसकर्मियों को विशेषज्ञ प्रशिक्षकों द्वारा सीपीआर (CPR – Cardiopulmonary Resuscitation) देने की विस्तृत जानकारी दी गई।
- प्रशिक्षण के दौरान पुलिसकर्मियों को मेडिकल डमी (Dummy) के माध्यम से सीपीआर का लाइव डेमो दिया गया।
- उन्हें सिखाया गया कि यदि किसी घायल की सांस रुक रही हो या दिल धड़कना बंद कर दे, तो एंबुलेंस आने से पहले उसे कृत्रिम सांस और चेस्ट कंप्रेशन (Chest Compression) कैसे दिया जाए।
- इसके अलावा, टीम को ‘गुड सेमेरिटन’ (Good Samaritan) यानी नेक मददगार दिशा-निर्देशों के बारे में भी बारीकी से बताया गया। इसका उद्देश्य यह है कि हादसे के समय मदद करने वाले आम नागरिकों को पुलिसिया पूछताछ से बचाया जा सके और उन्हें घायलों की मदद के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।
किन 8 थानों की Gorakhpur Traffic Police टीम हुई शामिल?
गोरखपुर जिले में कुल 14 थानों पर सीसी (CC) टीम का गठन किया गया है। इस प्रथम चरण की तीन दिवसीय कार्यशाला में कुल 14 में से 8 प्रमुख थानों की सीसी टीमों ने अपने प्रभारियों के साथ हिस्सा लिया। इनमें मुख्य रूप से ये पुलिस स्टेशन शामिल रहे:
- थाना गुलरिहा
- थाना कैंट
- थाना खोराबार
- थाना झंगहा
- थाना चौरी-चौरा
- थाना सहजनवा
- थाना गीडा
- थाना पिपराईच
प्रशिक्षण सत्र के समापन पर, ‘सेव लाइफ फाउंडेशन’ की टीम ने Gorakhpur Traffic Police के सभी उपस्थित कर्मियों का एक लिखित और प्रायोगिक टेस्ट (परीक्षा) भी लिया। इस परीक्षा में पुलिसकर्मियों ने सीखी गई जीवन रक्षक तकनीकों का प्रदर्शन किया। परीक्षा पास करने वाले सभी कर्मियों को तत्काल प्रभाव से इस हाई-टेक प्रशिक्षण का आधिकारिक प्रमाण पत्र (Certificate) वितरित किया गया।

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Navneet Mishra is a seasoned journalist currently associated with Nirbhik India and its digital portal, nirbhikindia.in. With over six years of experience across print and digital platforms, Navneet specializes in politics, sports, economics, and geopolitics.
A Master’s graduate in Mass Communication from Deen Dayal Upadhyay Gorakhpur University, he is also a dedicated media scholar. His academic research focuses on “the pivotal role of Gorakhpur’s Hindi newspapers during the Indian freedom struggle against the British Crown”. Before joining Nirbhik India, Navneet spent five years at Adarsh Jeevan and gained valuable field experience at Amar Ujala Gorakhpur as training reporter only for 5 days.
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नवनीत मिश्रा वर्तमान में ‘निर्भीक इंडिया’ मीडिया समूह से जुड़े हैं। उन्होंने दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया है। पत्रकारिता के अपने 6 वर्षों के सफर में उन्होंने प्रिंट और डिजिटल दोनों डेस्क पर काम किया है। उनके शोध का विषय ब्रिटिश शासन के खिलाफ गोरखपुर के अखबारों का योगदान रहा है, जो उनकी ऐतिहासिक समझ को दर्शाता है। वे राजनीति, अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय मामलों (Geopolitics) पर निरंतर लिखते रहे हैं। ‘आदर्श जीवन’ दैनिक में 5 साल का कार्यकाल और ‘अमर उजाला’ गोरखपुर में ट्रेनिंग रिपोर्टिंग के तौर पर मात्र 5 दिन काम क्या है उनकी लेखनी को और भी निखारता है।

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