इज्जतनगर में कवच संस्करण 4.0 (Kavach Version 4.0) की मंजूरी
बरेली/इज्जतनगर: कवच संस्करण 4.0 (Kavach Version 4.0) को लेकर भारतीय रेल ने पूर्वोत्तर रेलवे के इज्जतनगर रेल मंडल की संरक्षा व्यवस्था को अत्याधुनिक तकनीक से लैस करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है।
रेलवे बोर्ड द्वारा मंडल के लगभग 660 रूट किलोमीटर लंबे रेल खंड पर कवच संस्करण 4.0 (Kavach Version 4.0) की स्थापना के लिए ₹295 करोड़ की अनुमानित लागत राशि को प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है। इस आधुनिक स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली के लागू होने से क्षेत्र में ट्रेन परिचालन की निगरानी और यात्री संरक्षा व्यवस्था पहले से कहीं अधिक सुदृढ़ होगी।

अम्ब्रेला योजना के तहत स्वीकृत हुई इज्जतनगर में कवच संस्करण 4.0 (Kavach Version 4.0) परियोजना
यह संपूर्ण सुरक्षा कार्य ‘भारतीय रेल के शेष रेल खंडों पर लॉन्ग-टर्म इवोल्यूशन (एल.टी.ई.) के संचार बैकबोन के साथ कवच का प्रावधान‘ नामक अम्ब्रेला योजना के अंतर्गत स्वीकृत किया गया है।
रेल अधिकारियों के अनुसार, इस परियोजना में उच्च गति वाले डिजिटल संचार तंत्र (LTE) का उपयोग बैकबोन के रूप में किया जाएगा। इससे कंट्रोल रूम और ट्रेन इंजनों के बीच रियल-टाइम डेटा का सुरक्षित आदान-प्रदान संभव हो सकेगा। इस व्यवस्था से उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के सीमावर्ती क्षेत्रों में ट्रेनों का संचालन अधिक भरोसेमंद और समयबद्ध बनेगा।
कवच संस्करण 4.0 (Kavach Version 4.0) परियोजना तहत इज्जतनगर मंडल के कौन-कौन से रेल खंड होंगे कवर?
पूर्वोत्तर रेलवे प्रशासन के अनुसार, इस महत्वाकांक्षी परियोजना के अंतर्गत इज्जतनगर मंडल के कुल 53 महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशनों को शामिल किया गया है। स्वदेशी सुरक्षा तकनीक स्थापित करने के लिए निम्नलिखित प्रमुख रेल मार्गों का चयन किया गया है:
- कासगंज-काठगोदाम रूट: कासगंज (छोड़कर)-इज्जतनगर तथा इज्जतनगर (छोड़कर)-काठगोदाम रेल खंड।
- उत्तराखंड कनेक्टिविटी: लालकुआँ-रामपुर (छोड़कर), लालकुआँ (छोड़कर)-काशीपुर तथा रामनगर-कटघर रेल मार्ग।
- तराई व सीमावर्ती रेल खंड: भोजीपुरा-टनकपुर, पीलीभीत-शाहजहाँपुर (छोड़कर) एवं पीलीभीत (छोड़कर)-मैलानी (छोड़कर) रेल खंड।
- कानपुर लिंक: मंधना जंक्शन (छोड़कर)-ब्रह्मावर्त रेल खंड।
इन सभी चिह्नित रूटों पर ट्रैक-साइड उपकरण, रेडियो टावर और डिजिटल सिग्नलिंग इंफ्रास्ट्रक्चर स्थापित किया जाएगा, जिससे ट्रेनों का सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित हो सके।
कवच तकनीक क्या है और यह हादसों को कैसे रोकती है? (People Also Search For)
इंटरनेट और सर्च इंजन पर रेल यात्री अक्सर यह खोजते हैं कि भारत की स्वदेशी कवच प्रणाली कैसे कार्य करती है और यह दुर्घटनाओं को रोकने में कितनी कारगर है। कवच भारत द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित स्वचालित ट्रेन सुरक्षा (Automatic Train Protection – ATP) प्रणाली है।
यह प्रणाली ट्रेनों की आवाजाही की निरंतर और सटीक निगरानी करती है। यदि किसी स्थिति में लोको पायलट (ट्रेन चालक) लाल सिग्नल को पार करता है, जिसे तकनीकी भाषा में ‘सिग्नल पास एट डेंजर’ (SPAD) कहा जाता है, तो यह प्रणाली स्वतः सक्रिय हो जाती है। यह सिस्टम आवश्यकता पड़ने पर अपने आप ब्रेक लगा देता है, जिससे दो ट्रेनों की संभावित टक्कर या किसी अन्य बड़ी दुर्घटना को समय रहते रोका जा सकता है।
कोहरे और खराब मौसम में ट्रेन सुरक्षा (People Also Search For)
सर्च प्लेटफॉर्म्स पर यह सवाल भी बहुत लोकप्रिय है कि सर्दियों के दौरान घने कोहरे में ट्रेनों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होती है। शीतकाल में अत्यधिक कोहरे के कारण ट्रैक पर दूर के सिग्नल देख पाना लोको पायलटों के लिए चुनौतीपूर्ण होता है।
यह स्वचालित प्रणाली चालकों को केबिन के भीतर ही सिग्नल की स्थिति दिखाती है। यह प्रणाली ट्रेनों को उनकी अधिकतम अनुमन्य गति (Maximum Permissible Speed) पर सुरक्षित रूप से चलने में मदद करती है और प्रतिकूल मौसम स्थितियों में भी ट्रेन संचलन को पूरी तरह से संरक्षित बनाए रखती है।
रेल दुर्घटनाओं पर अंकुश और यात्रियों के लिए सुरक्षा का नया युग
इज्जतनगर रेल मंडल के 660 रूट किमी. खंड पर कवच प्रणाली की स्थापना से तराई और पहाड़ी क्षेत्रों की रेल कनेक्टिविटी अधिक सुरक्षित हो जाएगी। ₹295 करोड़ की लागत से तैयार होने वाला यह सुरक्षा ढांचा न केवल मानवीय भूलों के कारण होने वाली दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाएगा, बल्कि परिचालन विश्वसनीयता (Operational Reliability) में भी व्यापक सुधार लाएगा। इस परियोजना के पूर्ण होने से पूर्वोत्तर रेलवे का यह महत्वपूर्ण मंडल सुरक्षित रेल परिवहन के एक नए युग में प्रवेश करेगा।

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Navneet Mishra is a seasoned journalist currently associated with Nirbhik India and its digital portal, nirbhikindia.in. With over six years of experience across print and digital platforms, Navneet specializes in politics, sports, economics, and geopolitics.
A Master’s graduate in Mass Communication from Deen Dayal Upadhyay Gorakhpur University, he is also a dedicated media scholar. His academic research focuses on “the pivotal role of Gorakhpur’s Hindi newspapers during the Indian freedom struggle against the British Crown”. Before joining Nirbhik India, Navneet spent five years at Adarsh Jeevan and gained valuable field experience at Amar Ujala Gorakhpur as training reporter only for 5 days.
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नवनीत मिश्रा वर्तमान में ‘निर्भीक इंडिया’ मीडिया समूह से जुड़े हैं। उन्होंने दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया है। पत्रकारिता के अपने 6 वर्षों के सफर में उन्होंने प्रिंट और डिजिटल दोनों डेस्क पर काम किया है। उनके शोध का विषय ब्रिटिश शासन के खिलाफ गोरखपुर के अखबारों का योगदान रहा है, जो उनकी ऐतिहासिक समझ को दर्शाता है। वे राजनीति, अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय मामलों (Geopolitics) पर निरंतर लिखते रहे हैं। ‘आदर्श जीवन’ दैनिक में 5 साल का कार्यकाल और ‘अमर उजाला’ गोरखपुर में ट्रेनिंग रिपोर्टिंग के तौर पर मात्र 5 दिन काम क्या है उनकी लेखनी को और भी निखारता है।

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