गोरखपुर समाचारउत्तर प्रदेश

एमएमएमयूटी (MMMUT Gorakhpur) को 3 बड़ी शोध परियोजनाएं

गोरखपुर (गोरखपुर) : मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय यानी एमएमएमयूटी (MMMUT Gorakhpur) के प्राध्यापकों ने अनुसंधान और तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में एक नई उपलब्धि दर्ज की है। उत्तर प्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (UPCST) द्वारा विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के चार शिक्षकों की तीन महत्वपूर्ण शोध परियोजनाओं को वित्तीय सहायता स्वीकृत की गई है।

यह अनुदान स्वास्थ्य, डिजिटल कनेक्टिविटी और पर्यावरण संरक्षण जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण सामाजिक क्षेत्रों में शोध एवं विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रदान किया गया है। इन अभिनव परियोजनाओं के माध्यम से वर्तमान समय की व्यावहारिक आवश्यकताओं से जुड़े जमीनी तकनीकी समाधान विकसित किए जाएंगे।

एमएमएमयूटी (MMMUT Gorakhpur) में डिजिटल कनेक्टिविटी के लिए हाई-गेन प्लानर एंटीना

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग विभाग के प्रमुख शोधकर्ता डॉ. सुधांशु वर्मा को “शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) कनेक्टिविटी के लिए कॉम्पैक्ट और हाई-गेन प्लानर एंटीना” विषय पर शोध करने हेतु 14.08 लाख रुपये का अनुदान स्वीकृत हुआ है।

इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य दूरदराज के गांवों और घनी आबादी वाले शहरों में आईओटी (IoT) आधारित स्मार्ट उपकरणों के लिए छोटे आकार के तथा उच्च दक्षता वाले एंटीना डिजाइन करना है। यह तकनीक कम ऊर्जा खपत में भी निर्बाध और भरोसेमंद नेटवर्क कनेक्टिविटी प्रदान करेगी। शोध के दौरान एंटीना डिजाइनिंग, कंप्यूटर सिमुलेशन, प्रोटोटाइप निर्माण और वास्तविक परिवेश में फील्ड टेस्टिंग की जाएगी। इस एंटीना में 8 से 10 डीबी (dB) तक गेन प्राप्त करने का लक्ष्य रखा गया है। इसका प्रत्यक्ष लाभ स्मार्ट कृषि, स्वास्थ्य सेवाओं, स्मार्ट सिटी मिशन और दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल कनेक्टिविटी को सुदृढ़ करने में मिलेगा।

एमएमएमयूटी (MMMUT Gorakhpur) में हेल्थ एटीएम (Health ATM) में स्तन कैंसर की शुरुआती पहचान

इसी विभाग के एक अन्य प्रोफेसर डॉ. प्रवीण कुमार राव को 14.58 लाख रुपये की विशेष परियोजना के लिए वित्तीय सहायता प्राप्त हुई है। उनकी परियोजना “इंटीग्रेटेड हेल्थ एटीएम प्लेटफॉर्म में स्तन कैंसर की प्रारंभिक पहचान और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक उपचार के आकलन के लिए आईएसएम बैंड एंटीना सिस्टम” पर आधारित है।

इस नवाचार में माइक्रोवेव इमेजिंग और एंटीना तकनीक को आधुनिक स्वास्थ्य जांच प्लेटफॉर्म्स के साथ एकीकृत किया जाएगा। इस तकनीक के माध्यम से महिलाओं में स्तन कैंसर की शुरुआती अवस्था में ही पहचान की जा सकेगी और उपचार के प्रभाव का सटीक एवं किफायती आकलन संभव होगा। यह तकनीक ग्रामीण व शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में कैंसर स्क्रीनिंग की पहुंच को आसान बनाएगी।

अंतिम संस्कार वस्त्रों का हरित निस्तारण एवं पुनर्चक्रण

विश्वविद्यालय के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग को अंतिम संस्कार में उपयोग किए जाने वाले वस्त्रों के पर्यावरण अनुकूल निस्तारण और रिसाइक्लिंग पर तीन वर्षीय शोध परियोजना की मंजूरी मिली है। “अंतिम संस्कार में प्रयुक्त वस्त्रों के सतत निस्तारण एवं पुनर्चक्रण की दिशा में: वस्त्र अपशिष्ट प्रबंधन हेतु एक हरित रूपरेखा” नामक इस ग्रीन प्रोजेक्ट के प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर डॉ. पल्लव गुप्ता तथा को-प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर डॉ. वीरेंद्र कुमार हैं।

इस अनूठे अध्ययन के अंतर्गत कफन, चादरों और अनुष्ठानिक वस्त्रों से उत्पन्न होने वाले टेक्सटाइल वेस्ट का वैज्ञानिक ढंग से प्रबंधन किया जाएगा। इसमें बायोडिग्रेडेबल एवं कम्पोस्टेबल कफन, फाइबर रिकवरी, नॉन-वोवन उत्पाद, इंसुलेशन सामग्री, पैडिंग और एग्रीकल्चरल टेक्सटाइल में इनके पुन: उपयोग की संभावनाओं को परखा जाएगा।

शोध दल द्वारा विस्तृत फील्ड सर्वे, प्रयोगशाला परीक्षण और लाइफ-साइकिल असेसमेंट (LCA) के आधार पर एक ग्रीन फ्रेमवर्क, स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तथा नगर निकायों, श्मशान घाटों एवं कब्रिस्तानों के लिए व्यावहारिक नीतिगत सुझाव तैयार किए जाएंगे।

एमएमएमयूटी (MMMUT Gorakhpur) में शोध प्रोत्साहन की स्थिति क्या है? (People Also Search For)

अक्सर छात्र और शोधार्थी यह जानने का प्रयास करते हैं कि उत्तर प्रदेश के तकनीकी विश्वविद्यालयों में अनुसंधान और विकास (R&D) के लिए किस तरह का वातावरण उपलब्ध कराया जा रहा है तथा इन परियोजनाओं का समाज पर क्या प्रभाव पड़ता है।

इस बड़ी उपलब्धि पर खुशी व्यक्त करते हुए एमएमएमयूटी (MMMUT Gorakhpur) की माननीय कुलपति प्रो. अनुपमा कौशिक शर्मा ने सभी शोधकर्ता शिक्षकों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि ये स्वीकृत परियोजनाएं संस्थान की निरंतर बढ़ती शोध क्षमता और समाजोपयोगी नवाचार के प्रति कटिबद्धता को प्रदर्शित करती हैं।

उन्होंने रेखांकित किया कि ऐसे परिणाम-उन्मुख शोध से न केवल तकनीकी प्रगति होगी, बल्कि स्वास्थ्य, संचार और सतत विकास (Sustainable Development) के क्षेत्रों में आम जनता को सीधा और व्यावहारिक लाभ प्राप्त होगा।

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Navneet Mishra

Navneet Mishra is a seasoned journalist currently associated with Nirbhik India and its digital portal, nirbhikindia.in. With over six years of experience across print and digital platforms, Navneet specializes in politics, sports, economics, and geopolitics.
A Master’s graduate in Mass Communication from Deen Dayal Upadhyay Gorakhpur University, he is also a dedicated media scholar. His academic research focuses on “the pivotal role of Gorakhpur’s Hindi newspapers during the Indian freedom struggle against the British Crown”. Before joining Nirbhik India, Navneet spent five years at Adarsh Jeevan and gained valuable field experience at Amar Ujala Gorakhpur as training reporter only for 5 days.
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नवनीत मिश्रा वर्तमान में ‘निर्भीक इंडिया’ मीडिया समूह से जुड़े हैं। उन्होंने दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया है। पत्रकारिता के अपने 6 वर्षों के सफर में उन्होंने प्रिंट और डिजिटल दोनों डेस्क पर काम किया है। उनके शोध का विषय ब्रिटिश शासन के खिलाफ गोरखपुर के अखबारों का योगदान रहा है, जो उनकी ऐतिहासिक समझ को दर्शाता है। वे राजनीति, अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय मामलों (Geopolitics) पर निरंतर लिखते रहे हैं। ‘आदर्श जीवन’ दैनिक में 5 साल का कार्यकाल और ‘अमर उजाला’ गोरखपुर में ट्रेनिंग रिपोर्टिंग के तौर पर मात्र 5 दिन काम क्या है उनकी लेखनी को और भी निखारता है।

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Navneet Mishra is a seasoned journalist currently associated with Nirbhik India and its digital portal, nirbhikindia.in. With over six years of experience across print and digital platforms, Navneet specializes in politics, sports, economics, and geopolitics. A Master’s graduate in Mass Communication from Deen Dayal Upadhyay Gorakhpur University, he is also a dedicated media scholar. His academic research focuses on "the pivotal role of Gorakhpur’s Hindi newspapers during the Indian freedom struggle against the British Crown". Before joining Nirbhik India, Navneet spent five years at Adarsh Jeevan and gained valuable field experience at Amar Ujala Gorakhpur as training reporter only for 5 days. ---------------------------------------------------------------------------------- नवनीत मिश्रा वर्तमान में 'निर्भीक इंडिया' मीडिया समूह से जुड़े हैं। उन्होंने दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया है। पत्रकारिता के अपने 6 वर्षों के सफर में उन्होंने प्रिंट और डिजिटल दोनों डेस्क पर काम किया है। उनके शोध का विषय ब्रिटिश शासन के खिलाफ गोरखपुर के अखबारों का योगदान रहा है, जो उनकी ऐतिहासिक समझ को दर्शाता है। वे राजनीति, अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय मामलों (Geopolitics) पर निरंतर लिखते रहे हैं। 'आदर्श जीवन' दैनिक में 5 साल का कार्यकाल और 'अमर उजाला' गोरखपुर में ट्रेनिंग रिपोर्टिंग के तौर पर मात्र 5 दिन काम क्या है उनकी लेखनी को और भी निखारता है।

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