पॉक्सो एक्ट (POCSO Act): 2 गिरफ्तार
गोरखपुर: पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) के तहत अत्यंत सख्त विधिक प्रावधानों और पुलिस प्रशासन की निरंतर कार्रवाइयों के बावजूद, समाज में महिलाओं और विशेषकर नाबालिग लड़कियों के विरुद्ध होने वाले गंभीर अपराध थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। जनपद गोरखपुर में बाल सुरक्षा और महिला सम्मान से जुड़े दो अलग-अलग आपराधिक मामलों में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दो मुख्य अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है।

शहर के रामगढ़ताल और ग्रामीण क्षेत्र के बेलघाट थाना पुलिस द्वारा की गई ये गिरफ्तारियां दर्शाती हैं कि पुलिस महकमा सतर्क है, किंतु लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं बाल सुरक्षा तंत्र और सामाजिक मानसिकता पर एक बड़ा सवालिया निशान भी लगा रही हैं।
रामगढ़ताल में पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) की बड़ी कार्रवाई
पुलिस अधीक्षक नगर के मार्गदर्शन और क्षेत्राधिकारी कैण्ट के पर्यवेक्षण में रामगढ़ताल थाना पुलिस ने एक गंभीर यौन अपराध के मामले में बड़ी सफलता हासिल की है। प्रभारी निरीक्षक रामगढ़ताल के कुशल नेतृत्व में वरिष्ठ उप-निरीक्षक (व.उ.नि.) अनूपमणि त्रिपाठी और उनकी टीम ने मु.अ.सं. 429/2026 में नामजद वांछित अभियुक्त को गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तार किए गए इस अभियुक्त की पहचान सिकन्दर राम उर्फ राकेश (पुत्र सहदेव राम) के रूप में हुई है। यह आरोपी मूल रूप से वार्ड नंबर 04, हरिपुर बकुला हरमठ, थाना चनपटिया, जनपद पश्चिमी चम्पारण (बेतिया), राज्य बिहार का निवासी है। पुलिस ने इस अभियुक्त के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 65(ए) और पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) की अत्यंत गंभीर धारा ¾(2) के तहत विधिक कार्रवाई की है।
पुलिस के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, इस शातिर अपराधी का पूर्व में भी आपराधिक इतिहास रहा है। वर्ष 2025 में इसके खिलाफ थाना रामगढ़ताल में ही धोखाधड़ी और कूट रचित दस्तावेज तैयार करने (मु.अ.सं. 0750/2025, धारा 420/467/468/471 व 120बी भादवि) का मुकदमा दर्ज किया गया था।
बेलघाट पुलिस की कार्रवाई: छेड़खानी व पॉक्सो का आरोपी अरेस्ट
वहीं दूसरी ओर, पुलिस अधीक्षक दक्षिणी के निर्देशन और क्षेत्राधिकारी खजनी के पर्यवेक्षण में बेलघाट थाना पुलिस ने भी एक नाबालिग के साथ छेड़खानी और मारपीट के मामले में सख्त कदम उठाया है। प्रभारी निरीक्षक बेलघाट के नेतृत्व में गठित पुलिस टीम ने मु.अ.सं. 231/2026 में नामजद अभियुक्त अतुल उर्फ गोल्डेन (पुत्र मदन गौतम) को गिरफ्तार कर लिया।
यह आरोपी ग्राम छितौना, थाना बेलघाट, जनपद गोरखपुर का ही निवासी है। पुलिस के अनुसार, इस अभियुक्त ने न केवल शील भंग करने का प्रयास किया, बल्कि मारपीट कर आपराधिक धमकी भी दी। बेलघाट पुलिस ने अभियुक्त अतुल के विरुद्ध बीएनएस (BNS) की धारा 74 (शील भंग), 115(2) (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना), 351(3) (आपराधिक धमकी), 352 (शांति भंग) तथा पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) की धारा 7/8 के तहत अभियोग पंजीकृत किया है।
पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) क्या है और इसमें सजा के प्रावधान? (People Also Search For)
सर्च इंजन और इंटरनेट पर आम नागरिक अक्सर यह खोजते हैं कि बाल यौन अपराध संरक्षण अधिनियम (Protection of Children from Sexual Offences) यानी पॉक्सो कानून क्या है और इसमें कितनी सख्त सजा का प्रावधान है।
- विधिक जानकारों के अनुसार:
- धारा 3/4 पॉक्सो एक्ट: यह प्रवेशन यौन हमले (Penetrative Sexual Assault) से संबंधित है, जिसमें दोषी पाए जाने पर 20 वर्ष के कठोर कारावास से लेकर आजीवन कारावास और मृत्युदंड तक की सजा का स्पष्ट विधिक प्रावधान है। (रामगढ़ताल मामले में यही धारा लगाई गई है)।
- धारा 7/8 पॉक्सो एक्ट: यह यौन हमले (Sexual Assault) को परिभाषित करती है, जिसमें न्यूनतम 3 वर्ष से लेकर 5 वर्ष तक के कठोर कारावास की सजा निर्धारित की गई है। (बेलघाट मामले में यह धारा लागू है)।
कड़े कानूनों के बावजूद क्यों नहीं रुक रहे अपराध? (People Also Search For)
लोग यह भी जानना चाहते हैं कि इतने सख्त कानूनों के बाद भी महिलाओं और नाबालिगों के खिलाफ ऐसी आपराधिक गतिविधियां लगातार क्यों हो रही हैं। विश्लेषकों का मानना है कि केवल कानून बना देना ही पर्याप्त नहीं है।
इसके लिए जमीनी स्तर पर पारिवारिक जागरूकता, स्कूलों में बाल सुरक्षा शिक्षा (गुड टच-बैड टच), और समाज के हर तबके में नैतिक मूल्यों का विकास अत्यंत आवश्यक है। गोरखपुर पुलिस की ये दोनों त्वरित कार्रवाइयां अपराधियों के लिए एक कड़ा संदेश हैं, लेकिन अपराध को जड़ से खत्म करने के लिए समाज की सामूहिक भागीदारी अपरिहार्य है।
गिरफ्तारियां सुनिश्चित करने वाली संयुक्त पुलिस टीमें
इन दोनों संवेदनशील मामलों में आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुंचाने के लिए गोरखपुर पुलिस की दोनों टीमों ने अत्यधिक तत्परता दिखाई।
- रामगढ़ताल थाना टीम: व.उ.नि. अनूपमणि त्रिपाठी और रिक्रूट कांस्टेबल आदित्य राय।
- बेलघाट थाना टीम: उप-निरीक्षक (उ.नि.) दिग्विजय सिंह, रिक्रूट कांस्टेबल आमोद कुमार और रिक्रूट कांस्टेबल विजेता सिंह यादव।
वर्तमान में गोरखपुर पुलिस द्वारा पकड़े गए दोनों अभियुक्तों के खिलाफ अग्रिम विधिक कार्यवाही पूरी करते हुए उन्हें सक्षम न्यायालय के समक्ष पेश किया जा रहा है, ताकि उन्हें उनके किए की सख्त कानूनी सजा दिलाई जा सके।

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